नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक क्षमता और कूटनीतिक कौशल की पहली परीक्षा दे रहे हैं। काठमांडू के लोकप्रिय मेयर के रूप में अपनी छवि बनाने वाले बालेन शाह अब पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उनके सामने चुनौतियां पहले से कहीं ज्यादा जटिल हैं।
World News: Balendra Shah के नेतृत्व में Nepal अब एक नए राजनीतिक सफर पर निकल चुका है। पिछले साल हुए प्रदर्शन के बाद, जब केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई और इस साल नए चुनाव हुए, तब नेपाल ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अब Balendra Shah प्रधानमंत्री बन चुके हैं, लेकिन सत्ता का सफर हमेशा चुनौतियों से भरा होता है। नेपाल, जो भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से रणनीतिक अखाड़ा रहा है, उसके सामने कई जटिल समस्याएं हैं।
India और Nepal के संबंध सदियों पुराने हैं और दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और मजबूत राजनीतिक संबंध रहे हैं। लेकिन केपी शर्मा ओली के समय इन राजनीतिक संबंधों में काफी खटास आ गई थी, जिसे अब सुधारने की दिशा में काम करना Balendra Shah के सामने बड़ी चुनौती है।
बालेन शाह की लोकप्रियता और चुनौती
बालेन शाह ने मेयर के रूप में भ्रष्टाचार और शहरी विकास पर सख्त रुख अपनाकर अपने समर्थकों के बीच लोकप्रियता हासिल की थी। हालांकि, आलोचक कहते हैं कि शहर के प्रशासन और पूरे देश के शासन में अंतर बहुत बड़ा है। राष्ट्रीय शासन के लिए उनके पास सीमित अनुभव है, और देश के जटिल राजनीतिक तंत्र को संभालना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उनकी छवि एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में स्थापित है। मेयर के तौर पर उन्होंने भारत और चीन के प्रति कई बार कठोर टिप्पणियां की थीं, जैसे भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध या “ग्रेटर नेपाल” का नक्शा दिखाना। अब प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें इन देशों के साथ संतुलन बनाना होगा, जिससे उनकी राष्ट्रवादी छवि और अंतरराष्ट्रीय संबंध दोनों सुरक्षित रहें।

भारत-नेपाल संबंधों में बालेन शाह की भूमिका
भारत और नेपाल के संबंध सदियों पुराने और मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक सहयोग रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में नेपाल को अपनी विदेश नीति का अहम हिस्सा बनाया और 2014 में नेपाल की यात्रा की। यह पिछले 17 वर्षों में भारत के किसी प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा का पहला मौका था।
केपी शर्मा ओली के समय भारत-नेपाल संबंध तनावपूर्ण रहे, क्योंकि ओली ने चीन के साथ करीबी संपर्क बनाए। अब बालेन शाह के सामने यह चुनौती है कि वे संतुलित विदेश नीति अपनाकर भारत और चीन दोनों के साथ संबंधों को बनाए रखें।
लिपुलेख दर्रे का विवाद
हाल ही में भारत और चीन ने जून 2026 से लिपुलेख दर्रे के जरिए द्विपक्षीय व्यापार फिर से शुरू करने का फैसला किया। नेपाल इस क्षेत्र (कालापानी-लिपुलेख-लिंपियाधुरा) को अपना संप्रभु हिस्सा मानता है। बालेन शाह का राजनीतिक इतिहास और राष्ट्रवादी छवि इसे और जटिल बनाती है। अगर वे इस व्यापार का विरोध करते हैं, तो भारत और चीन दोनों नाराज हो सकते हैं। वहीं, अगर वे चुप रहते हैं, तो नेपाल के भीतर उनकी राष्ट्रवादी छवि पर सवाल उठ सकते हैं।
बालेन शाह मधेसी समुदाय (मैथिली भाषी) से आते हैं, जिससे भारत के साथ उनके सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध मजबूत हैं। भारत उनसे संतुलित कूटनीति की उम्मीद रखता है। चीन ने हाल ही में नेपाल के नए नोट छापने का ठेका लिया है, जिसमें विवादित नक्शा शामिल है। इस प्रकार बालेन शाह को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति के बीच संतुलन बनाना होगा।









