बांग्लादेश में BNP के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर राष्ट्रपति चुनाव जीत गए हैं। संसद में उन्हें 255 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार ओली अहमद को 88 वोट मिले। आलमगीर ने 167 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वह 21 अगस्त को शपथ लेंगे।
ढाका: बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा घोषित हो गया है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। संसद में हुए मतदान में उन्हें 255 वोट मिले, जबकि 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। इस तरह आलमगीर ने ओली अहमद को 167 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को लाल गुलाब देकर बधाई दी। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर अभिवादन भी किया। राष्ट्रपति चुनाव का यह मुकाबला बांग्लादेश की राजनीति के लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार आमने-सामने थे।
संसद में तीन घंटे चला मतदान
राष्ट्रपति चुनाव के लिए गुरुवार को ढाका स्थित संसद भवन में मतदान कराया गया। मतदान दोपहर 2 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक चला। कुल 349 सांसदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। संविधान के तहत संसद सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। ऐसे में संसद में बहुमत रखने वाली पार्टी के उम्मीदवार की स्थिति स्वाभाविक रूप से मजबूत रहती है।
इस चुनाव में BNP के पास 247 सांसदों का समर्थन बताया गया था, जबकि जमात-ए-इस्लामी की अगुआई वाले 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के पास 81 सांसद हैं। संसद की 350 सीटों में से चटगांव-4 सीट फिलहाल खाली है। अदालत के आदेश के बाद इस सीट से निर्वाचित सदस्य की सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
मिर्जा फखरुल आलमगीर को 255 वोट मिले
मतगणना पूरी होने के बाद मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को 255 वोट मिले। विपक्षी उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को 88 वोट मिले। इस तरह दोनों उम्मीदवारों के बीच 167 वोटों का अंतर रहा।
आलमगीर लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और BNP के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। राष्ट्रपति पद के लिए उनकी जीत सत्तारूढ़ पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BNP ने बताया है कि आलमगीर 21 अगस्त की शाम बंगभवन में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। पार्टी के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने शपथ ग्रहण कार्यक्रम की पुष्टि की है।
विपक्षी उम्मीदवार ओली अहमद ने चुनाव पर उठाए सवाल
चुनाव हारने के बाद विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव का परिणाम पहले से तय था और सांसदों को अपनी इच्छा के मुताबिक मतदान करने की स्वतंत्रता नहीं थी।
ढाका में पत्रकारों से बातचीत में ओली अहमद ने कहा कि सांसदों पर अपनी पार्टी के फैसले के मुताबिक मतदान करने का दबाव रहता है। उन्होंने संविधान के आर्टिकल 70 का भी हवाला दिया।
उनका कहना है कि अगर कोई सांसद अपनी पार्टी के निर्देश के खिलाफ वोट करता है, तो उसे अपनी संसदीय सदस्यता गंवाने का खतरा हो सकता है। विपक्षी नेता ने इसी प्रावधान को सांसदों की स्वतंत्र मतदान क्षमता के लिए बाधा बताया।
हालांकि, सत्तारूढ़ BNP की ओर से चुनाव परिणाम को लेकर किसी तरह की अनियमितता स्वीकार नहीं की गई है। इसलिए विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए, जब तक इनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने न आएं।
35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव में हुआ सीधा मुकाबला
बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव का इतिहास देखें तो 1991 के बाद यह पहला मौका है जब दो उम्मीदवारों के बीच वास्तविक चुनावी मुकाबला हुआ। देश में अब तक 12 राष्ट्रपति चुनाव हो चुके हैं। इनमें से आठ बार राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए।
बांग्लादेश में 1974 में पहली बार संसद के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव हुआ था। उस समय सांसदों ने मोहम्मद मोहम्मदुल्लाह को राष्ट्रपति चुना था। 1975 में संविधान में बदलाव के बाद राष्ट्रपति के सीधे चुनाव का प्रावधान किया गया।
इसके बाद 1978, 1981 और 1986 में जनता ने सीधे राष्ट्रपति का चुनाव किया। हालांकि, 1991 में संसदीय शासन व्यवस्था फिर लागू होने के बाद राष्ट्रपति का चुनाव दोबारा सांसदों के जरिए होने लगा।
1991 में दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ था। इसके बाद लंबे समय तक सत्ता पक्ष के उम्मीदवार के सामने विपक्ष ने प्रभावी चुनौती नहीं दी। 2023 तक हुए चुनावों में राष्ट्रपति निर्विरोध चुने जाते रहे।

इस बार विपक्ष ने उम्मीदवार क्यों उतारा?
इस चुनाव में विपक्ष की ओर से उम्मीदवार उतारना महज राष्ट्रपति पद की दौड़ तक सीमित नहीं माना जा रहा। 11 दलों का गठबंधन संसद में अपनी राजनीतिक मौजूदगी और एकजुटता दिखाना चाहता है।
भले ही विपक्ष के पास सत्ता पक्ष की तुलना में कम सांसद थे और जीत की संभावना सीमित थी, लेकिन उम्मीदवार उतारने से गठबंधन को अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिला।
विपक्ष के लिए राष्ट्रपति चुनाव सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और संसद के भीतर अपनी भूमिका को मजबूत करने का मंच भी बना। ओली अहमद की उम्मीदवारी ने चुनाव को औपचारिक प्रक्रिया के बजाय प्रतिस्पर्धी मुकाबले में बदल दिया।
राष्ट्रपति का पद कितना महत्वपूर्ण है?
बांग्लादेश में राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है, जबकि प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं। इसलिए राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
राष्ट्रपति संसद द्वारा चुना जाता है और सामान्य परिस्थितियों में सरकार के साथ संवैधानिक ढांचे के भीतर काम करता है। इसी वजह से राष्ट्रपति चुनाव में संसद के शक्ति संतुलन का सीधा प्रभाव दिखाई देता है।
पूर्व राष्ट्रपति के इस्तीफे से खाली हुआ पद
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद हुआ। शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया था।
76 वर्षीय शहाबुद्दीन अप्रैल 2023 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने थे। उनका कार्यकाल 2028 तक चलना था, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
शहाबुद्दीन को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी माना जाता था। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति पद खाली हो गया और नए राष्ट्रपति के चुनाव की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई।
बांग्लादेश की राजनीति में नया अध्याय
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा सकती है। पहली बार लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष ने अपना उम्मीदवार उतारा और सांसदों के बीच मतदान हुआ।
हालांकि राष्ट्रपति का पद कार्यकारी सरकार की तुलना में सीमित शक्तियों वाला है, लेकिन चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबला बांग्लादेश की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।
आलमगीर के सामने अब संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ देश के राजनीतिक माहौल में राष्ट्रपति पद की निष्पक्ष भूमिका बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं, विपक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए अपने आरोपों को आगे भी राजनीतिक मुद्दा बना सकता है। फिलहाल BNP के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत के साथ बांग्लादेश को नया राष्ट्रपति मिल गया है। आज 21 अगस्त को बंगभवन में उनके शपथ लेने के बाद वह आधिकारिक रूप से देश के राष्ट्रपति का पद संभालेंगे।










