शेख हसीना के दिल्ली से अपना पहला सार्वजनिक भाषण देने और बांग्लादेश लौटने के दावे के बाद वहां की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना के संबोधन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बांग्लादेश और जुलाई आंदोलन में मारे गए लोगों का अपमान बताया था।
ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग भविष्य में BNP के साथ विलय कर सकती है। उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अवामी लीग को BNP का सहयोगी बताया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब शेख हसीना के भारत से दिए गए हालिया सार्वजनिक संबोधन को लेकर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार और BNP के नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। हालांकि, BNP सांसद का यह बयान पार्टी की आधिकारिक नीति है या उनका व्यक्तिगत विचार, इस बारे में स्पष्टता जरूरी है। फिलहाल इसे एक सांसद के बयान के रूप में ही देखा जा रहा है।
शेख हसीना के संबोधन से बांग्लादेश में बढ़ा विवाद
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से संबोधन किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ, जिसमें हसीना वर्चुअल माध्यम से शामिल हुईं। बताया गया कि उन्होंने कैमरा बंद रखते हुए ऑडियो के जरिए अपनी बात रखी और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। यह उपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश से बाहर आई थीं।
अपने संबोधन में शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह दिसंबर तक अपने देश वापस जाने की कोशिश करेंगी। हसीना ने यह भी कहा कि उन्हें गिरफ्तारी या अपनी जान को खतरे की आशंका के बारे में जानकारी है, लेकिन इन परिस्थितियों के कारण वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। उनका यह बयान बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में चर्चा का बड़ा विषय बन गया।
BNP सांसद ने अवामी लीग को बताया सहयोगी
हसीना के बयान के कुछ दिनों बाद BNP सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने अवामी लीग को लेकर अलग रुख पेश किया। सुनामगंज-2 से सांसद चौधरी ने एक रैली में कहा कि अवामी लीग को BNP का दुश्मन नहीं बल्कि सहयोगी माना जाना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का संदर्भ देते हुए दोनों राजनीतिक दलों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, सांसद ने यह दावा भी किया कि भविष्य में अवामी लीग का BNP में विलय हो सकता है। हालांकि, इस बयान से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि BNP और अवामी लीग के बीच वास्तव में विलय की कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

क्या BNP की आधिकारिक नीति बदल गई है?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BNP के कई वरिष्ठ नेता अतीत में अवामी लीग और शेख हसीना के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाते रहे हैं। BNP के वरिष्ठ नेता रूहुल कबीर रिजवी ने शेख हसीना के भारत से दिए गए संबोधन के बाद उनकी आलोचना की थी। उन्होंने हसीना के संबोधन को जुलाई आंदोलन में मारे गए लोगों का अपमान बताया और भारत से राजनीतिक बयान देने को लेकर भी सवाल उठाए।
इससे संकेत मिलता है कि BNP के भीतर अवामी लीग को लेकर सांसद नासिर उद्दीन चौधरी की टिप्पणी को पार्टी की सर्वसम्मत नीति मानना अभी उचित नहीं होगा।
शेख हसीना के खिलाफ BNP का पुराना रुख
बांग्लादेश की राजनीति में BNP और अवामी लीग लंबे समय से एक-दूसरे के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। शेख हसीना के लंबे शासनकाल के दौरान BNP ने उनकी सरकार की नीतियों और राजनीतिक व्यवस्था की लगातार आलोचना की। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह विरोध और अधिक तीखा हुआ है।
BNP के नेताओं ने शेख हसीना पर जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों की राजनीतिक जिम्मेदारी का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, शेख हसीना और अवामी लीग के समर्थक इन घटनाओं तथा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अलग राजनीतिक संदर्भ में देखते हैं।
भारत से हसीना का बयान क्यों महत्वपूर्ण है?
शेख हसीना का भारत से सार्वजनिक संबोधन सिर्फ बांग्लादेश की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर भी चर्चा बढ़ी है।हसीना के भारत में रहने और वहीं से राजनीतिक बयान देने को लेकर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने आपत्ति जताई है। सरकार समर्थक नेताओं का तर्क है कि भारत की धरती से बांग्लादेश की राजनीति पर टिप्पणी करना संवेदनशील मामला है। वहीं, हसीना के समर्थक इसे अपने राजनीतिक विचार व्यक्त करने का अधिकार मानते हैं।











