बेटे के जन्म की खुशियां मातम में बदलीं: सड़क हादसे में भारतीय सेना के ग्रेनेडियर का निधन, 3 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

राजस्थान के झुंझुनूं जिलेल के ग्रेनेडियर सुनील कुमार की सड़क हादसे में मौत हो गई। 17 दिन पहले बेटे का जन्म हुआ था। सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

राजस्थान की वीरो की भूमि झुंझुनूं जिले के ग्रेनेडियर सुनील कुमार की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। 17 दिन पहले ही उनके घर बेटे का जन्म हुआ था। नामकरण संस्कार की तैयारियों के बीच आई इस दुखद खबर से परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां भारतीय सेना के एक जवान की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। महज 17 दिन पहले उनके घर बेटे का जन्म हुआ था और परिवार नवजात के नामकरण संस्कार की तैयारियों में जुटा हुआ था। लेकिन खुशियों के इस माहौल ने अचानक मातम का रूप ले लिया जब छुट्टी पर घर आए जवान ने हादसे के बाद दम तोड़ दिया।

जवान का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके तीन वर्षीय बेटे ने मुखाग्नि देकर सभी की आंखें नम कर दीं।

देश सेवा में समर्पित था जवान का जीवन

29 वर्षीय सुनील कुमार भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट में कार्यरत थे। वर्ष 2017 में सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने लगभग नौ वर्षों तक देश की विभिन्न सैन्य इकाइयों और अग्रिम क्षेत्रों में सेवाएं दीं। वर्तमान में वे सेना की एक सक्रिय यूनिट में तैनात थे और अपने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा तथा समर्पण के लिए जाने जाते थे।

उनकी शादी वर्ष 2019 में हुई थी। परिवार में पत्नी, तीन साल का बेटा और हाल ही में जन्मा नवजात पुत्र शामिल हैं। परिवार सामान्य ग्रामीण जीवन जी रहा था और जवान की नौकरी पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय थी।

17 दिन पहले घर में गूंजी थी किलकारी

परिजनों के अनुसार, कुछ ही दिन पहले सुनील कुमार छुट्टी लेकर अपने गांव लौटे थे। छुट्टी का मुख्य उद्देश्य परिवार के साथ समय बिताना और नवजात बेटे के जन्म की खुशियां मनाना था।

महज 17 दिन पहले उनके घर दूसरे बेटे का जन्म हुआ था। परिवार में उत्सव जैसा माहौल था और पारंपरिक नामकरण संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदारों को निमंत्रण देने और कार्यक्रम की योजना बनाने का काम शुरू हो चुका था।

किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ दिनों बाद यही घर खुशी के बजाय शोक का केंद्र बन जाएगा।

सड़क हादसे ने छीन ली जिंदगी

जानकारी के अनुसार, 29 मई की शाम सुनील कुमार किसी जरूरी काम से मोटरसाइकिल लेकर निकले थे। रास्ते में उनकी बाइक अचानक फिसल गई और वे सड़क पर गिर पड़े।

हादसा इतना गंभीर था कि उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरी चोटें आईं। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया।

बाद में उन्हें जयपुर के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। हालांकि उपचार के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया।

तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा पार्थिव शरीर

जवान के निधन की खबर मिलते ही परिवार और गांव में शोक फैल गया। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ गांव लाया गया।

गांव पहुंचने से पहले एक श्रद्धांजलि यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा, पूर्व सैनिक और सामाजिक संगठन शामिल हुए। रास्ते भर लोगों ने फूल बरसाकर जवान को श्रद्धांजलि दी और देशभक्ति के नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।

तिरंगे में लिपटे ताबूत को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। गांव के लोगों ने कहा कि उन्होंने एक ऐसे बेटे को खो दिया जिसने देश सेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य माना।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

जैसे ही जवान का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता, भाई और अन्य रिश्तेदार अपने प्रियजन को अंतिम बार देखकर भावुक हो उठे।

सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब उनकी पत्नी ने अपने पति के अंतिम दर्शन किए। गोद में 17 दिन के नवजात बेटे को लिए वह बेसुध हो गईं। परिवार की महिलाएं उन्हें संभालने का प्रयास करती रहीं, लेकिन माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि कुछ दिन पहले तक घर में नवजात के आगमन की खुशियां मनाई जा रही थीं और अब वही घर गहरे शोक में डूबा हुआ है।

तीन साल के बेटे ने दी अंतिम विदाई

अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया जब जवान के तीन वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

इतनी कम उम्र में पिता को खो देने वाले बच्चे को शायद इस घटना की गंभीरता का पूरी तरह एहसास नहीं था, लेकिन वहां मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य बेहद भावुक था। कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।

सेना के अधिकारियों ने बच्चे को राष्ट्रीय ध्वज सौंपते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि देश हमेशा जवान के बलिदान और सेवाओं को याद रखेगा।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

भारतीय सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और राष्ट्रीय ध्वज के साथ जवान को अंतिम विदाई दी गई।

सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सुनील कुमार ने अपने सेवा काल में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ देश की सेवा की। उनकी असामयिक मृत्यु सेना और समाज दोनों के लिए बड़ी क्षति है।

गांव और क्षेत्र में शोक की लहर

जवान के निधन के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रशासन से परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

कई सामाजिक संगठनों और पूर्व सैनिकों ने भी परिवार को सहयोग का आश्वासन दिया है। लोगों का कहना है कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति समाज का विशेष दायित्व होता है।

Leave a comment