भागलपुर: शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या अब रोजमर्रा की परेशानी बनती जा रही है। शहर की कई प्रमुख सड़कों की चौड़ाई कागज पर भले ही 40 फीट के आसपास हो, लेकिन जमीन पर इनका बड़ा हिस्सा अतिक्रमण, सड़क किनारे खड़े वाहनों, दुकानों के बाहर रखे सामान और ठेले-खोमचों की वजह से घिर गया है। नतीजा यह है कि करीब 40 फीट चौड़ी सड़क कई जगहों पर सिमटकर महज 15 फीट के आसपास रह गई है। सड़क की उपलब्ध जगह कम होने के कारण दो वाहनों के आमने-सामने आने पर भी यातायात प्रभावित हो जाता है। बाजार के व्यस्त इलाकों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जहां खरीदारी करने आने वाले लोगों के वाहन सड़क किनारे खड़े हो जाते हैं और देखते ही देखते लंबा जाम लग जाता है।
भागलपुर में पार्किंग की समस्या कोई नई नहीं है। शहर के प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में रोज बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और दूसरे जरूरी कामों के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उनके वाहनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में लोग सड़क किनारे ही बाइक, स्कूटर और कार खड़ी कर देते हैं। एक तरफ दुकान के बाहर सामान और दूसरी तरफ वाहन खड़े होने के बाद सड़क का काफी हिस्सा उपयोग के बाहर हो जाता है। इसके बाद सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए जगह इतनी कम बचती है कि सामान्य यातायात भी जाम का रूप लेने लगता है।
सबसे ज्यादा परेशानी व्यस्त समय में होती है। सुबह कार्यालय और स्कूल जाने के समय यातायात का दबाव बढ़ता है। इसके बाद दोपहर में बाजार में खरीदारी करने वाले लोगों की भीड़ बढ़ जाती है। शाम होते-होते स्थिति और खराब हो जाती है। कार्यालयों से लौटने वाले लोग, बाजार पहुंचने वाले ग्राहक, ई-रिक्शा, ऑटो, बाइक और चारपहिया वाहन एक ही सड़क पर जगह बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी एक वाहन के थोड़ी देर रुकने से पीछे वाहनों की कतार लग जाती है। कई बार कुछ मिनट का व्यवधान आधे घंटे या उससे अधिक समय तक चलने वाले जाम में बदल जाता है।
शहरवासियों का कहना है कि जाम का सबसे बड़ा कारण केवल वाहनों की बढ़ती संख्या नहीं है, बल्कि उपलब्ध सड़क का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं होना भी है। यदि सड़क की पूरी चौड़ाई यातायात के लिए उपलब्ध हो तो वाहनों का दबाव काफी हद तक संभाला जा सकता है। लेकिन सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण चौड़ी सड़क भी संकरी गली जैसी दिखाई देने लगती है। कई स्थानों पर सड़क के दोनों किनारों पर वाहन खड़े होने के बाद बीच में इतनी ही जगह बचती है कि वाहन धीरे-धीरे निकल सकें।
फुटपाथ की स्थिति भी यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। जहां पैदल यात्रियों के लिए जगह होनी चाहिए, वहां कई जगह दुकान का सामान, ठेले, अस्थायी दुकानें और अन्य सामान रख दिया जाता है। इसके कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है। जब पैदल यात्री और वाहन एक ही हिस्से में चलते हैं तो यातायात की गति प्रभावित होती है। साथ ही दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। बाजार क्षेत्र में यह समस्या ज्यादा दिखाई देती है क्योंकि खरीदारी करने वालों की संख्या भी अधिक रहती है।
शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए पार्किंग की व्यवस्था लंबे समय से जरूरी मानी जाती रही है। इसके बावजूद पर्याप्त पार्किंग स्थल तैयार नहीं हो सके हैं। पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने का सीधा असर मुख्य सड़कों पर दिखाई देता है। ग्राहक दुकान के पास वाहन खड़ा करना चाहते हैं और दुकानदारों के अपने वाहन भी सड़क किनारे लगे रहते हैं। कई जगह माल लाने-ले जाने वाले वाहन भी व्यस्त समय में सड़क पर खड़े हो जाते हैं। इससे कुछ समय के लिए सड़क पूरी तरह बाधित होने की स्थिति बन जाती है।
दूसरी ओर शहर में स्ट्रीट फूड कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए प्रस्तावित ‘खाऊ गली’ की योजना भी अभी उस रूप में सामने नहीं आ सकी है, जैसी उम्मीद की जा रही थी। शहर में कई जगह सड़क किनारे खाने-पीने के ठेले और दुकानें लगती हैं। शाम के समय इन जगहों पर ग्राहकों की भीड़ जुटती है। लोग सड़क किनारे वाहन खड़ा करके खाने-पीने लगते हैं। इससे पहले से संकरी सड़क पर अतिरिक्त दबाव बन जाता है। यदि स्ट्रीट फूड कारोबारियों के लिए एक निर्धारित और व्यवस्थित जगह उपलब्ध हो तो सड़क किनारे लगने वाले ठेले और ग्राहकों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है।
‘खाऊ गली’ की अवधारणा सिर्फ स्ट्रीट फूड कारोबार को जगह देने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए शहर के छोटे दुकानदारों और ठेले वालों को व्यवस्थित स्थान मिल सकता है। यदि वहां बैठने की जगह, साफ-सफाई, बिजली, पानी, कचरा प्रबंधन और पार्किंग की व्यवस्था हो तो यह शहर के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थल भी बन सकता है। इससे सड़क किनारे बिखरे हुए स्ट्रीट फूड कारोबार को एक जगह लाया जा सकेगा और मुख्य सड़कों पर वाहनों तथा पैदल लोगों का दबाव कम किया जा सकता है। लेकिन जब तक यह योजना जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं होती, तब तक सड़क किनारे कारोबार की वजह से यातायात प्रभावित होने की समस्या बनी रहने की संभावना है।
भागलपुर में ट्रैफिक जाम का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ रहा है। थोड़ी दूरी तय करने में कई बार काफी समय लग जाता है। लोग समय पर कार्यालय या जरूरी काम के लिए नहीं पहुंच पाते। विद्यार्थियों और मरीजों को भी परेशानी होती है। जाम में फंसे वाहनों के कारण ईंधन की खपत बढ़ती है और लोगों का समय भी बर्बाद होता है। लगातार जाम की स्थिति में वाहन चालकों में तनाव बढ़ना भी स्वाभाविक है।
सबसे चिंता की बात यह है कि जाम की समस्या कुछ खास समय या एक-दो सड़कों तक सीमित नहीं रह गई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में यातायात का दबाव बढ़ने के साथ जाम की समस्या दिखाई देने लगी है। एक सड़क पर जाम लगने के बाद वाहन चालक वैकल्पिक रास्तों की ओर मुड़ते हैं और वहां भी वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। इस तरह एक स्थान की यातायात समस्या धीरे-धीरे दूसरे इलाकों को भी प्रभावित करने लगती है।
शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ ट्रैफिक पुलिस की तैनाती से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। पुलिसकर्मी सड़क पर खड़े होकर यातायात को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन यदि सड़क का बड़ा हिस्सा पार्किंग और अतिक्रमण में चला गया है तो उनके लिए भी यातायात को सुचारु रखना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए नगर निगम, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस को मिलकर काम करना होगा। सड़क की वास्तविक चौड़ाई बहाल करने के साथ पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी लगातार होनी चाहिए। अक्सर अभियान के दौरान सड़क खाली करा दी जाती है, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा दुकान का सामान सड़क पर आने लगता है या वाहन उसी जगह खड़े होने लगते हैं। इससे स्थायी सुधार नहीं हो पाता। लोगों का कहना है कि यदि सड़क खाली कराने के बाद वहां दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए नियमित निगरानी की जाए तो स्थिति काफी बेहतर हो सकती है।
व्यवस्थित पार्किंग के साथ नो-पार्किंग जोन भी स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। जहां पार्किंग की अनुमति नहीं है, वहां बड़े और स्पष्ट संकेतक लगाए जाएं। लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि वाहन कहां खड़ा किया जा सकता है और कहां नहीं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई हो तो सड़क किनारे वाहन खड़ा करने की आदत पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है।
इसके साथ ही बाजार क्षेत्रों में लोडिंग और अनलोडिंग की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है। दुकानों में सामान पहुंचाने वाले वाहन कई बार दिन के व्यस्त समय में सड़क पर रुक जाते हैं। सामान उतारने में कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन उस दौरान पीछे वाहनों की कतार लग जाती है। यदि बाजारों में माल लाने और ले जाने के लिए निर्धारित समय तय किया जाए तो यातायात पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सकता है।
ई-रिक्शा और ऑटो के लिए भी निर्धारित स्टैंड की जरूरत है। कई जगह यात्री मिलने की उम्मीद में चालक सड़क के बीच या किनारे वाहन रोककर खड़े रहते हैं। पीछे से आने वाले वाहनों को रास्ता बदलना पड़ता है। अगर ऐसे वाहनों के लिए निर्धारित स्थान हों और उनका पालन कराया जाए तो यातायात का प्रवाह बेहतर हो सकता है। सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था को व्यवस्थित करना भी शहर के ट्रैफिक मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शहर के व्यापारियों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि दुकानदार अपने सामान को सड़क की सीमा से बाहर न रखें और ग्राहकों को सड़क पर वाहन खड़ा करने के बजाय निर्धारित पार्किंग की ओर जाने के लिए प्रेरित करें तो समस्या काफी कम हो सकती है। इसी तरह ग्राहकों को भी थोड़ी दूरी पैदल चलने की आदत डालनी होगी। हर दुकान के ठीक सामने वाहन खड़ा करने की प्रवृत्ति बाजार की सड़कों को और संकरा करती है।
भागलपुर की सड़कों पर वाहनों की संख्या आने वाले समय में और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मौजूदा समस्या को नजरअंदाज करना भविष्य में और बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। शहर के विकास के साथ यातायात व्यवस्था को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है। सड़क चौड़ी करने के साथ-साथ पार्किंग, फुटपाथ, स्ट्रीट वेंडिंग और सार्वजनिक परिवहन के लिए अलग-अलग व्यवस्था करनी होगी।
शहरवासियों की मांग है कि जिन स्थानों पर पार्किंग की योजना प्रस्तावित है, वहां काम जल्द शुरू किया जाए। इसके साथ ही ‘खाऊ गली’ की योजना को भी केवल प्रस्ताव तक सीमित न रखा जाए। यदि इन दोनों योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए तो शहर के कई हिस्सों में सड़क पर बढ़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है। लोगों का कहना है कि समस्या सामने है और उसका समाधान भी स्पष्ट है, जरूरत सिर्फ योजनाओं को जमीन पर उतारने की है।
आज स्थिति यह है कि 40 फीट चौड़ी सड़क का बड़ा हिस्सा उपयोग में नहीं आ रहा। सड़क की दोनों तरफ अतिक्रमण और वाहन खड़े होने से कई स्थानों पर सिर्फ 15 फीट के आसपास रास्ता बचता है। इतनी कम जगह में बढ़ते यातायात को नियंत्रित करना आसान नहीं है। एक तरफ से आने वाला वाहन दूसरी तरफ से आने वाले वाहन को जगह देने के लिए रुकता है और वहीं से जाम की शुरुआत हो जाती है। कुछ ही देर में पीछे वाहनों की संख्या बढ़ने लगती है और जाम कई सौ मीटर तक फैल जाता है।
शहरवासियों को अब अस्थायी कार्रवाई नहीं बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है। सड़क की चौड़ाई वापस मिले, पार्किंग के लिए अलग जगह हो, फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए खाली रहे, स्ट्रीट फूड कारोबारियों को निर्धारित स्थान मिले और ई-रिक्शा व ऑटो के लिए स्टैंड तय हों, तभी यातायात व्यवस्था में वास्तविक बदलाव दिखाई देगा। यदि इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम किया जाए तो भागलपुर में रोज लगने वाले जाम से काफी राहत मिल सकती है।
फिलहाल पार्किंग और ‘खाऊ गली’ जैसी योजनाओं के पूरी तरह जमीन पर नहीं उतरने से शहर की मुख्य सड़कों पर दबाव बना हुआ है। अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग ने समस्या को और गंभीर कर दिया है। ऐसे में शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि नगर निगम और प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाएगा। लोगों की मांग है कि सड़कों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ पार्किंग की स्थायी व्यवस्था की जाए और स्ट्रीट फूड कारोबार को भी व्यवस्थित जगह दी जाए। तभी शहर की सड़कें फिर से अपनी वास्तविक चौड़ाई में इस्तेमाल हो सकेंगी और 40 फीट की सड़कें 15 फीट तक सिमटने की स्थिति से भागलपुर को बाहर निकाला जा सकेगा









