भागलपुर में आंगन से लौटी गंगा, खेतों में अब भी पानी; बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बरकरार, 15-20 दिन बाद घर लौटेंगे परिवार

भागलपुर में गंगा-कोसी का जलस्तर घटने से राहत मिली, लेकिन खेतों और दियारा इलाकों में पानी जमा है। विस्थापित परिवारों को घर लौटने में 15-20 दिन लगेंगे।
भागलपुर में आंगन से लौटी गंगा, खेतों में अब भी पानी; बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बरकरार, 15-20 दिन बाद घर लौटेंगे परिवार
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भागलपुर में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में अब लगातार कमी आ रही है। बाढ़ का पानी कई गांवों की गलियों, घरों और आंगन से उतरने लगा है, जिससे लंबे समय से पानी में घिरे लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन नदी का पानी कम होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित परिवारों की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कई दियारा और निचले इलाकों में अब भी खेत-खलिहान, संपर्क मार्ग और घरों के आसपास पानी जमा है। पानी घटने के बाद जगह-जगह दलदल और कीचड़ की स्थिति बन गई है। ऐसे में विस्थापित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे अपने घरों में सुरक्षित तरीके से कब वापस लौट पाएंगे।

नाथनगर सहित कई ग्रामीण इलाकों में मुख्य सड़कों से बाढ़ का पानी हटने के बाद आवागमन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। सड़क पर पानी कम होने से पैदल और वाहनों की आवाजाही शुरू हुई है, लेकिन दियारा की बस्तियों में हालात अभी अलग हैं। कई घरों और झोपड़ियों के भीतर तथा आसपास पानी और कीचड़ जमा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, घरों में जमा पानी और नमी को पूरी तरह खत्म होने में 15 से 20 दिन तक का समय लग सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित स्थानों पर रह रहे विस्थापित परिवार तुरंत अपने घरों में लौटने की स्थिति में नहीं हैं।

बाढ़ के दौरान जिन परिवारों ने अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों, सड़कों या तटबंधों पर शरण ली थी, उनके लिए पानी कम होना निश्चित रूप से राहत की खबर है, लेकिन घर वापसी की राह अभी आसान नहीं है। घरों के आसपास जमा गंदा पानी, कीचड़, नमी और खराब रास्ते दैनिक जीवन को मुश्किल बना रहे हैं। कई जगहों पर लोगों को जरूरी सामान लाने के लिए भी जलजमाव वाले रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। इससे बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं की परेशानी और बढ़ जाती है।

नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र में भी गंगा और कोसी के जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों नदियों के जलस्तर में रोजाना करीब 3 से 5 सेंटीमीटर की कमी देखी जा रही है। नदी का फैलाव कम होने से बाढ़ का दबाव घटा है, लेकिन इस्माईलपुर, गोपालपुर और रंगरा प्रखंड के कई विस्थापित परिवार अभी भी बांधों और ऊंची सड़कों के आसपास रह रहे हैं। निचले इलाकों में पानी पूरी तरह नहीं निकलने के कारण कई परिवारों को अपने मवेशियों के साथ अस्थायी ठिकानों पर रहना पड़ रहा है।

बाढ़ का पानी घटने के बाद अब लोगों की नजर जलनिकासी पर टिक गई है। नदी में पानी कम होना और जमीन से पानी निकलना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। जिन इलाकों में प्राकृतिक निकासी के रास्ते बाधित हैं, वहां पानी लंबे समय तक जमा रह सकता है। यही स्थिति फिलहाल भागलपुर के कई निचले और दियारा इलाकों में दिखाई दे रही है। खेतों में पानी भरा रहने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि खरीफ की फसल को भारी नुकसान हुआ है और लंबे समय तक खेत जलमग्न रहने से अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।

सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम क्षेत्र में भी गंगा का जलस्तर घटा है, लेकिन गनगनियां, तिलकपुर और महेशी सहित कई निचले इलाकों की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। कई संपर्क मार्ग अब भी जलमग्न हैं। ऐसे में ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने साफ पेयजल, राशन, बच्चों के लिए दूध और दूसरी जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

कहलगांव प्रखंड में भी ज्यादातर गांवों से बाढ़ का पानी कम हुआ है, लेकिन तोफिल और अनठावन जैसे गांवों में जलजमाव अभी बना हुआ है। यहां पानी की निकासी नहीं होने के कारण खेत लंबे समय से डूबे हुए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में पानी जमा रहने से खरीफ की फसलें खराब होकर नष्ट हो गई हैं। किसानों को अब यह चिंता सता रही है कि यदि खेतों से पानी समय पर नहीं निकला तो रबी की फसल की बुआई भी प्रभावित हो सकती है।

बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही प्रशासन और ग्रामीणों के सामने अब दूसरी चुनौती शुरू हो गई है। बाढ़ के बाद कीचड़, गंदगी, जलजमाव और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को सामान्य करना जरूरी होगा। लंबे समय तक जमा पानी से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, पेयजल और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं बनी रह सकती हैं। जिन घरों में पानी घुसा था, वहां लोग लौटने से पहले यह भी देख रहे हैं कि मकान रहने लायक है या नहीं और आसपास का पानी पूरी तरह निकला है या नहीं।

दियारा क्षेत्र में घर वापसी का मामला और गंभीर है। यहां कई परिवारों के घर कच्चे या अस्थायी ढांचे के हैं। लगातार पानी और कीचड़ में रहने के बाद घरों की स्थिति खराब हो सकती है। ऐसे परिवारों के लिए केवल नदी का जलस्तर कम होना पर्याप्त नहीं है। घर के आसपास का पानी सूखना, रास्तों का खुलना और रहने योग्य स्थिति बनना भी जरूरी है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी वजह से कई परिवारों को अभी कम से कम 15 से 20 दिन तक इंतजार करना पड़ सकता है।

बाढ़ के कारण खेतों में जमा पानी किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता में से एक है। खरीफ की फसलें पहले ही प्रभावित हो चुकी हैं और जिन खेतों में पानी लंबे समय तक ठहरा रहेगा, वहां मिट्टी की स्थिति और अगली खेती पर असर पड़ सकता है। किसानों को अब फसल नुकसान के बाद आगे की खेती के लिए मदद और खेतों से जल्द पानी निकालने की जरूरत है। यदि जलनिकासी में देरी हुई तो इसका असर केवल मौजूदा फसल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अगले कृषि चक्र पर भी पड़ सकता है।

हालांकि गंगा और कोसी का जलस्तर नीचे जाने से बाढ़ का तत्काल खतरा कम हुआ है, लेकिन प्रभावित इलाकों में राहत की प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है। लोगों के लिए घर लौटना, घरों की सफाई करना, खराब सामान को हटाना, पशुओं की व्यवस्था करना और खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाना लंबी प्रक्रिया होगी। बाढ़ के दौरान जिन परिवारों की रोजी-रोटी और घरेलू सामान प्रभावित हुआ है, उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में समय लगेगा।

भागलपुर में मौजूदा स्थिति इस बात को भी दिखाती है कि बाढ़ का असर नदी के जलस्तर के साथ तुरंत खत्म नहीं होता। नदी पीछे हटने के बाद भी पानी निचले इलाकों में जमा रहता है और खेतों में दलदल की स्थिति बन जाती है। इस कारण विस्थापित परिवारों को कुछ और समय तक अस्थायी ठिकानों पर रहना पड़ता है। प्रशासन के लिए अब प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों से जलनिकासी, संपर्क मार्गों को बहाल करने और लोगों को सुरक्षित तरीके से घर वापस भेजने की होगी।

फिलहाल भागलपुर में बाढ़ का पानी उतरने से राहत जरूर मिली है, लेकिन दियारा और निचले इलाकों के लोगों के लिए संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ नदी का जलस्तर घट रहा है तो दूसरी तरफ खेतों और रास्तों में जमा पानी नई चुनौती बन गया है। नाथनगर, नवगछिया, सुल्तानगंज और कहलगांव के प्रभावित इलाकों में हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं, लेकिन कई परिवारों को अभी अपने घर लौटने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

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