भागलपुर के पुरानी रामनगर में कटाव से स्कूल बंद, NH पार कर दूसरे गांव पढ़ने जाते हैं बच्चे; हादसे का खतरा बरकरार

: भागलपुर के पुरानी रामनगर में कटाव के कारण स्कूल बंद है। बच्चे पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाते हैं और NH पार करते समय हादसे का खतरा बना रहता है।
भागलपुर के पुरानी रामनगर में कटाव से स्कूल बंद, NH पार कर दूसरे गांव पढ़ने जाते हैं बच्चे; हादसे का खतरा बरकरार
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भागलपुर के पुरानी रामनगर गांव में कटाव की समस्या ने बच्चों की पढ़ाई पर असर डालना शुरू कर दिया है। कटाव के कारण स्कूल बंद होने से गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांव का रुख करना पड़ रहा है। उन्हें रोजाना राष्ट्रीय राजमार्ग यानी NH पार करके दूसरे गांव जाना पड़ता है। इस दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों के बीच छोटे बच्चों का सड़क पार करना किसी बड़े हादसे को दावत दे सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में कटाव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

स्कूल बंद होने के कारण बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे गांव पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रास्ते में NH पार करना उनकी मजबूरी बन गया है। व्यस्त सड़क पर वाहनों की आवाजाही के बीच बच्चों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराने की चुनौती अभिभावकों के सामने है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते बच्चों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह रास्ता अधिक जोखिम भरा है, क्योंकि उन्हें सड़क पर वाहनों की रफ्तार और दूरी का सही अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।

ग्रामीणों के मुताबिक, कटाव के कारण गांव में स्कूल का संचालन प्रभावित हुआ है। स्कूल बंद होने से सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिनके बच्चे प्राथमिक और मध्य स्तर की कक्षाओं में पढ़ते हैं। बच्चों को दूसरे गांव के स्कूल तक पहुंचाने के लिए परिवारों को अतिरिक्त समय और व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई अभिभावकों के लिए रोजाना बच्चों को स्कूल छोड़ना और वापस लाना भी मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद वे बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होने देना चाहते, इसलिए जोखिम उठाकर उन्हें दूसरे गांव भेज रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कटाव से बचाव और इलाके में सुधार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीन पर अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते तो आज बच्चों को स्कूल जाने के लिए NH पार करने की मजबूरी नहीं होती। लोगों के मन में यह सवाल भी है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी गांव की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हुआ। हालांकि, खर्च की गई राशि, काम की प्रकृति और उसकी वर्तमान स्थिति से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।

कटाव की समस्या केवल स्कूल और बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। इससे गांव के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को आवागमन, सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कटाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से गांव के सामने लगातार खतरा बना हुआ है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

ग्रामीण प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग कर रहे हैं कि कटाव प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएं। बंद पड़े स्कूल की स्थिति का आकलन कर पढ़ाई फिर से शुरू कराने की व्यवस्था की जाए। जब तक स्कूल में पढ़ाई शुरू नहीं होती, तब तक बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करना भी जरूरी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि NH पार करने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम किए जाएं, ताकि पढ़ाई के लिए घर से निकलने वाले बच्चों को हर दिन हादसे के डर का सामना न करना पड़े।

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