अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वह शाह को केवल एक अच्छा कलाकार समझते थे। विवाद के बीच भाजपा और विपक्षी नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
नई दिल्ली: बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक वीडियो बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अभिनेता की आलोचना करते हुए कहा कि वह अब तक उन्हें एक सम्मानित कलाकार के तौर पर जानते थे, लेकिन उनके विचारों के बारे में पहले जानकारी नहीं थी। शाह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खुद को 'दिमागी नक्सल' बताया था।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ हो रहे कथित व्यवहार पर सवाल उठाए थे। इसके बाद भाजपा नेताओं ने उनके बयान पर आपत्ति जताई, जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।
रिजिजू बोले- शाह को सिर्फ एक अच्छा कलाकार समझता था
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह शाह को एक सभ्य और अच्छा अभिनेता मानते थे, लेकिन उनकी राजनीतिक सोच को लेकर उनकी राय बदल गई है।
इससे पहले बुधवार को रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी अभिनेता की आलोचना की थी। उन्होंने शाह को खतरनाक शहरी 'दिमागी नक्सल' बताते हुए कहा कि उनके वास्तविक विचारों को समझने में काफी देर हो गई। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि इस तरह की सोच भारतीय लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। हालांकि, यह रिजिजू की राजनीतिक टिप्पणी है, शाह के खिलाफ किसी अपराध की पुष्टि नहीं।
नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो में क्या कहा था?
विवाद की शुरुआत मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई, जब नसीरुद्दीन शाह ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में अभिनेता ने खुद को 'दिमागी नक्सल' बताते हुए कहा कि सरकार के आलोचकों को राष्ट्रविरोधी और टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे नाम दिए जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं की आवाज कमजोर करने और शिक्षण संस्थानों के माहौल को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। शाह ने सवाल उठाया कि छात्रों के विरोध और असहमति को लेकर सरकार का रवैया इतना सख्त क्यों है। उन्होंने मीडिया और भाजपा की सोशल मीडिया गतिविधियों की भी आलोचना की।
जामिया और जेएनयू के छात्रों का उठाया मुद्दा
नसीरुद्दीन शाह ने अपने बयान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और जामिया मिलिया इस्लामिया का जिक्र किया। उन्होंने इन संस्थानों में छात्र आंदोलनों के दौरान कथित कार्रवाई पर चिंता जताई। शाह का कहना था कि युवाओं के साथ होने वाले व्यवहार को भुलाया नहीं जाएगा।
दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का भी उन्होंने समर्थन किया। अभिनेता ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिशों के बावजूद देश के युवाओं का हौसला कमजोर नहीं होगा। वीडियो के आखिर में उन्होंने आंदोलन कर रहे युवाओं के प्रति समर्थन जताया।
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी जताई नाराजगी
नसीरुद्दीन शाह के बयान पर फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी प्रतिक्रिया दी। पंडित ने आरोप लगाया कि शाह की सार्वजनिक टिप्पणियों से उनकी छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने अभिनेता के व्यवहार को उनकी हताशा से जोड़ते हुए आलोचना की।
पंडित ने शाह को मनोचिकित्सक से सलाह लेने तक की बात कही। हालांकि, उनकी यह टिप्पणी व्यक्तिगत राय है और इसे अभिनेता के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में किसी चिकित्सकीय निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
रामदास अठावले और आरपी सिंह ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने नसीरुद्दीन शाह को अच्छा अभिनेता बताते हुए कहा कि उन्हें समाज की भलाई के लिए सरकार को सुझाव देने का अधिकार है। हालांकि, अठावले ने शाह की भाषा और भाजपा के प्रति उनके रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अभिनेता को नक्सली विचारधारा जैसी सोच से दूर रहना चाहिए।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी शाह के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए उनकी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता की टिप्पणियां देश में अराजकता को बढ़ावा देने वाली सोच को दर्शाती हैं।
विपक्ष ने कहा- सरकार की आलोचना करना गलत नहीं
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने नसीरुद्दीन शाह का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने अपने व्यक्तिगत विचार रखे हैं और किसी को केवल असहमति के कारण निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। रॉय ने आरोप लगाया कि भाजपा को अपने खिलाफ व्यक्त किए गए विचार पसंद नहीं आते।
कांग्रेस की राज्यसभा सांसद जेबी माथेर ने भी भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों को अक्सर अलग-अलग राजनीतिक नामों से संबोधित किया जाता है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और सार्वजनिक हस्तियों को अपनी राय रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
छात्र आंदोलन से शुरू हुआ विवाद राजनीतिक मुद्दा बना
नसीरुद्दीन शाह का वीडियो मूल रूप से शिक्षण संस्थानों और छात्र आंदोलनों से जुड़ा था, लेकिन अब यह राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। भाजपा नेताओं ने उनके शब्दों और सरकार पर लगाए गए आरोपों की आलोचना की है।
दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकार से सवाल पूछने के अधिकार का समर्थन किया है। इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की राजनीतिक टिप्पणियों पर असहमति किस तरह व्यक्त की जानी चाहिए।









