बेटे की 15 साल की कोशिश लाई रंग, 2 एकड़ जमीन दान देने वाले के नाम पर हुआ भागलपुर का स्कूल; BSEB ने दी मंजूरी

भागलपुर के सबौर में 2 एकड़ जमीन दान करने वाले संजय यादव के 15 साल के प्रयास रंग लाए। BSEB ने स्कूल का नाम राम लखन गोप के नाम पर करने की मंजूरी दी।
बेटे की 15 साल की कोशिश लाई रंग, 2 एकड़ जमीन दान देने वाले के नाम पर हुआ भागलपुर का स्कूल; BSEB ने दी मंजूरी
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भागलपुर के सबौर प्रखंड के इंग्लिश गांव स्थित एक विद्यालय को आखिरकार उसके जमीनदाता के पिता के नाम से नई पहचान मिल गई है। शिक्षा के लिए अपनी निजी जमीन दान करने वाले पूर्व मुखिया संजय कुमार यादव करीब 15 वर्षों से स्कूल का नाम अपने पिता स्वर्गीय राम लखन गोप के नाम पर कराने के लिए प्रयास कर रहे थे। लंबे समय तक चली विभागीय प्रक्रिया और लगातार प्रयासों के बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने विद्यालय के नाम में आधिकारिक संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब यह विद्यालय 'राम लखन गोप उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, इंग्लिश, सबौर, भागलपुर' के नाम से जाना जाएगा।

यह कहानी केवल एक स्कूल के नाम बदलने की नहीं है, बल्कि शिक्षा के लिए निजी जमीन दान करने और उस योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के प्रयास की भी है। रिपोर्ट के अनुसार फरका पंचायत के पूर्व मुखिया संजय कुमार यादव ने वर्ष 2011 में गांव के बच्चों और खासकर बेटियों की पढ़ाई के लिए अपनी करीब दो एकड़ निजी जमीन विद्यालय के लिए दान की थी। उस समय उनकी इच्छा थी कि जिस जमीन पर बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए विद्यालय बने, उसे उनके पिता राम लखन गोप के नाम से भी पहचान मिले। जमीन दान करने के बाद स्कूल का निर्माण और शैक्षणिक गतिविधियां आगे बढ़ीं, लेकिन नामकरण की प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं हो सकी।

संजय कुमार यादव के लिए यह प्रक्रिया आसान नहीं रही। जमीन का निबंधन कराने के बाद उन्होंने स्कूल के नाम में अपने पिता का नाम शामिल कराने के लिए संबंधित विभागों और कार्यालयों में लगातार संपर्क किया। सरकारी प्रक्रिया के तहत स्कूल के स्तर और स्वरूप में भी बदलाव आया। 16 अगस्त 2018 को कन्या मध्य विद्यालय को उत्क्रमित कर उच्च माध्यमिक विद्यालय यानी प्लस टू स्तर का दर्जा दिया गया। विद्यालय का शैक्षणिक स्तर बढ़ गया, लेकिन जमीनदाता के पिता के नाम पर स्कूल के नामकरण का मामला अभी लंबित रहा। इसके बाद भी संजय यादव ने प्रयास बंद नहीं किए और लगातार विभागीय स्तर पर इस मांग को आगे बढ़ाते रहे।

इस दौरान स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या और विद्यालय की भूमिका भी इलाके के लिए महत्वपूर्ण बनी रही। ग्रामीण क्षेत्र में स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध कराना शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि पर्याप्त जमीन मिलने पर विद्यालय भवन, कक्षाओं और विद्यार्थियों के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास संभव होता है। संजय कुमार यादव ने अपनी निजी जमीन विद्यालय के लिए उपलब्ध कराकर इस दिशा में योगदान दिया था। अब उसी विद्यालय को उनके पिता के नाम से आधिकारिक पहचान मिलने के बाद परिवार और स्थानीय लोगों के बीच संतोष का माहौल है।

स्कूल के नामकरण की प्रक्रिया में वर्ष 2023 के बाद नया मोड़ आया। शिक्षा विभाग की ओर से जमीन दानदाताओं के परिजनों के नाम पर विद्यालयों के नामकरण से संबंधित नीतिगत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद संजय कुमार यादव ने अपनी पुरानी मांग को फिर से विभागीय स्तर पर मजबूती से उठाया। उन्होंने संबंधित दस्तावेज और जमीन दान से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराए और स्कूल का नाम अपने पिता के नाम पर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को भागलपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से विद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव की विधिवत अनुशंसा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भेजी गई। समिति के स्तर पर उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्ताव की जांच की गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 सितंबर 2026 को BSEB की ओर से नाम में आधिकारिक संशोधन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इस आदेश के बाद विद्यालय को अब राम लखन गोप उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय के नाम से पहचान मिलेगी।

करीब 15 साल पहले जिस जमीन को शिक्षा के उद्देश्य से दान किया गया था, उसी जमीन पर बने विद्यालय को अब दानदाता के पिता का नाम मिलना परिवार के लिए भावनात्मक उपलब्धि है। संजय कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने जमीन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि गांव के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दान की थी। उनकी इच्छा थी कि उनके पिता का नाम भी इस विद्यालय के माध्यम से लंबे समय तक याद रखा जाए। नामकरण की मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने इसे अपने परिवार और पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण बताया।

विद्यालय का नाम अब बदल जाने के बाद स्कूल के आधिकारिक रिकॉर्ड और शैक्षणिक दस्तावेजों में भी नई पहचान दर्ज होगी। इससे उस क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी यह स्कूल अब नए नाम से जाना जाएगा। विद्यालय से जुड़े लोगों के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस व्यक्ति के परिवार की जमीन पर स्कूल खड़ा हुआ, उसका नाम अब संस्था की पहचान का हिस्सा बन गया है।

ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के लिए जमीन दान करने की परंपरा का सामाजिक महत्व भी इस मामले से सामने आता है। सरकारी विद्यालयों के लिए भूमि उपलब्ध होना कई बार बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति द्वारा निजी जमीन उपलब्ध कराने से विद्यालय के लिए स्थायी आधार तैयार हो सकता है। संजय कुमार यादव ने वर्ष 2011 में दो एकड़ जमीन इसी उद्देश्य से दी थी। इसके बाद विद्यालय के विकास के साथ-साथ उसे उच्च माध्यमिक स्तर तक भी उत्क्रमित किया गया।

संजय यादव की 15 साल की कोशिश का दूसरा पहलू सरकारी प्रक्रिया की लंबी अवधि भी है। जमीन दान किए जाने के बाद नामकरण की इच्छा पूरी होने में वर्षों लग गए। हालांकि इस दौरान विद्यालय का दर्जा बढ़ा और वह कन्या मध्य विद्यालय से उत्क्रमित होकर उच्च माध्यमिक विद्यालय बना, लेकिन नाम परिवर्तन का मामला अलग प्रक्रिया के तहत चलता रहा। अंततः विभागीय अनुशंसा और BSEB की स्वीकृति के बाद यह प्रक्रिया पूरी हो सकी।

अब 'राम लखन गोप उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, इंग्लिश, सबौर, भागलपुर' नाम से यह विद्यालय क्षेत्र में पहचाना जाएगा। स्कूल का यह नाम उस परिवार के योगदान की याद भी दिलाएगा, जिसने शिक्षा के लिए अपनी निजी जमीन उपलब्ध कराई थी। आने वाले समय में इस विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी जब स्कूल का नाम लेंगे, तो उसके पीछे जुड़ी जमीन दान और लंबे प्रयास की कहानी भी उनके सामने होगी।

संजय कुमार यादव के लिए यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं था। उनके अनुसार जिस जमीन पर विद्यालय बना, वह उनके परिवार की निजी संपत्ति थी और उसे उन्होंने क्षेत्र के बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के लिए समर्पित किया। पिता के नाम पर स्कूल की पहचान बनाने की उनकी इच्छा भी इसी भावना से जुड़ी थी। करीब डेढ़ दशक तक प्रयास करने के बाद जब BSEB की ओर से आधिकारिक स्वीकृति मिली तो परिवार के लिए यह लंबे इंतजार के पूरा होने जैसा रहा।

भागलपुर के सबौर क्षेत्र में सामने आई यह घटना इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा के लिए किया गया योगदान केवल तत्काल लाभ तक सीमित नहीं रहता। जमीन दान करने वाले परिवार की इच्छा थी कि उसका उपयोग बच्चों की शिक्षा के लिए हो और साथ ही उनके पिता की स्मृति भी उससे जुड़ी रहे। अब दोनों उद्देश्य एक साथ पूरे होते दिखाई दे रहे हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों के बीच राम लखन गोप का नाम आने वाले वर्षों में स्कूल की पहचान का हिस्सा रहेगा।

फिलहाल BSEB की मंजूरी के बाद स्कूल के नामकरण को लेकर वर्षों से चल रही प्रक्रिया समाप्त हो गई है। वर्ष 2011 में दो एकड़ जमीन दान करने के बाद शुरू हुआ यह प्रयास वर्ष 2026 में जाकर पूरा हुआ। 15 वर्षों के दौरान विद्यालय का दर्जा भी बढ़ा और अब उसे जमीनदाता के पिता राम लखन गोप के नाम से आधिकारिक पहचान भी मिल गई है। परिवार और स्थानीय क्षेत्र के लिए यह लंबे समय से प्रतीक्षित फैसला है, जबकि विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए भी यह उनके स्कूल के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।

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