भागलपुर में विक्रमशिला सेतु बंद होने से पहले प्रशासन एक्शन में, बना रूट प्लान; नाव-क्रूज के किराये पर नजर

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु बंद होने से पहले प्रशासन ने वैकल्पिक रूट और यातायात प्लान तैयार किया है। नाव-क्रूज के किराये और सुरक्षा मानकों की निगरानी होगी।
भागलपुर में विक्रमशिला सेतु बंद होने से पहले प्रशासन एक्शन में, बना रूट प्लान; नाव-क्रूज के किराये पर नजर
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भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और पुनर्स्थापन कार्य के चलते सेतु के बंद रहने की संभावित अवधि को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन का प्रमुख माध्यम है, इसलिए इसके बंद रहने के दौरान यात्रियों, एंबुलेंस, जरूरी सेवाओं और दूसरे वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी। इसी को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर उच्चस्तरीय निगरानी समिति गठित की गई है, जो वैकल्पिक रूट, ट्रैफिक डायवर्जन, जलमार्ग और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की निगरानी करेगी।

जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। अपर जिला दंडाधिकारी विधि-व्यवस्था को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा अपर समाहर्ता लोक शिकायत निवारण, अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, नवगछिया अनुमंडल पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक नगर-1 और नवगछिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को समिति में शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य केवल कागजी स्तर पर योजना बनाना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पूरी व्यवस्था की समीक्षा और निगरानी करना है।

विक्रमशिला सेतु के बंद रहने की स्थिति में सबसे पहले वैकल्पिक सड़कों की स्थिति देखी जाएगी। प्रशासन उन रास्तों का स्थलीय निरीक्षण करेगा, जिनसे भागलपुर और नवगछिया के बीच वाहनों की आवाजाही कराई जा सकती है। सड़क की चौड़ाई, वाहनों का दबाव और संभावित जाम को देखते हुए जरूरत के अनुसार वन-वे व्यवस्था लागू की जा सकती है। भारी वाहनों के लिए अलग डायवर्जन रूट निर्धारित करने के साथ कुछ रास्तों पर नो-एंट्री के नियम भी लागू किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि एक ही सड़क पर छोटे-बड़े सभी वाहनों का दबाव बढ़ने से लंबा जाम न लगे।

प्रशासन की योजना में दोनों तरफ यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित करना भी शामिल है। भागलपुर शहर और नवगछिया क्षेत्र में ऐसे स्थान चिन्हित किए जाएंगे, जहां ऑटो, ई-रिक्शा और दूसरे यात्री वाहन यात्रियों को उतार और चढ़ा सकें। पिकअप और ड्रॉपिंग प्वाइंट ऐसे स्थानों पर बनाने की तैयारी है, जहां पर्याप्त जगह उपलब्ध हो और यातायात बाधित न हो। इन स्थानों पर भीड़ नियंत्रण के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। इससे जलमार्ग तक पहुंचने वाले यात्रियों को सड़क पर अव्यवस्थित तरीके से वाहन खड़े होने की समस्या से राहत मिल सकती है।

सेतु बंद रहने के दौरान गंगा पार करने के लिए नाव और क्रूज सेवा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रशासन ने इसी वजह से जलमार्ग के संचालन को लेकर सुरक्षा और किराये दोनों पर विशेष निगरानी रखने का निर्णय लिया है। इससे पहले भी विक्रमशिला सेतु से यातायात बाधित होने पर बरारी, बाबूपुर और महादेवपुर घाटों के बीच नाव और जलयान की वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। उस दौरान प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ निर्धारित किराया लागू करने पर भी जोर दिया था।

नए इंतजाम में प्रशासन की कोशिश है कि नाव या क्रूज संचालक यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूल सकें। इसके लिए निर्धारित किराये की सूची घाटों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर बड़े बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले किराये की जानकारी मिल सके, इसके लिए रेट चार्ट सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली जगह पर लगाया जाएगा। अगर निर्धारित दर से अधिक रकम वसूलने की शिकायत मिलती है तो संबंधित दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी कार्रवाई करेंगे। प्रशासन ने ओवरचार्जिंग को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कही है।

इस व्यवस्था का मकसद यह है कि पुल बंद होने का फायदा उठाकर निजी नाव संचालक या अन्य सेवा प्रदाता यात्रियों से अतिरिक्त रकम न वसूलें। इससे पहले भी जलमार्ग सेवा के दौरान प्रशासन ने निर्धारित दरें जारी की थीं। पुराने निर्धारित शुल्क में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 25 रुपये और उससे अधिक उम्र के यात्रियों के लिए 50 रुपये का किराया बताया गया था। हालांकि मौजूदा व्यवस्था में लागू अंतिम दर प्रशासन के ताजा रेट चार्ट के अनुसार ही मान्य होगी। इसलिए यात्रियों को घाट पर प्रदर्शित आधिकारिक दर को ही आधार बनाना होगा।

नाव और क्रूज के संचालन में केवल किराया ही नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता में है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चयनित जलयान के संचालन से पहले सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। घाट पर जेटी, पहुंच मार्ग, रोशनी और बैरिकेडिंग जैसी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों को नाव पर चढ़ने और उतरने के दौरान परेशानी न हो और किसी तरह की दुर्घटना की आशंका कम की जा सके।

प्रशासन ने प्रत्येक नाव और क्रूज पर पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट और लाइफ बॉय रखने की अनिवार्यता बताई है। इसके अलावा अग्निशामक यंत्र और प्रशिक्षित गोताखोरों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। किसी भी नाव या क्रूज में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा मानकों का सत्यापन होने के बाद ही संचालन की अनुमति दिए जाने की बात कही गई है।

इससे पहले विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के दौरान प्रशासन ने जलमार्ग व्यवस्था में सुरक्षा को लेकर आपदा मित्रों, गोताखोरों, एंबुलेंस, स्ट्रेचर और घाटों पर रोशनी जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की थी। प्रशासन की ओर से सरकारी और निजी नावों के साथ टग बोट और बड़े जलयान के विकल्प पर भी काम किया गया था। इससे यह स्पष्ट है कि पुल बंद होने की स्थिति में सड़क के साथ जलमार्ग को भी एक वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी पहले से की जाती रही है।

विक्रमशिला सेतु भागलपुर और नवगछिया के बीच केवल स्थानीय आवागमन का माध्यम नहीं है। इसका इस्तेमाल उत्तर बिहार, कोसी और सीमांचल की तरफ जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों द्वारा भी किया जाता है। पुल बंद होने पर सड़क मार्ग से लंबा डायवर्जन लागू होने की स्थिति में यात्रा की दूरी और समय दोनों बढ़ सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन को छोटे वाहनों, सार्वजनिक परिवहन और भारी वाहनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजने की स्थिति में प्रशासन को सड़क की क्षमता और ट्रैफिक दबाव का भी आकलन करना होगा। पहले की व्यवस्था में नवगछिया की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए भागलपुर-दोगच्छी-सुलतानगंज-मुंगेर-खगड़िया-नवगछिया जैसे लंबे मार्ग का इस्तेमाल कराने की योजना सामने आ चुकी है। इसके अलावा भागलपुर बायपास के जरिए सुलतानगंज, बरियारपुर, मुंगेर और खगड़िया होते हुए वैकल्पिक मार्ग का भी इस्तेमाल किया गया है।

सेतु बंद रहने की स्थिति में एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को सबसे पहले प्राथमिकता देने की जरूरत होगी। प्रशासन द्वारा गठित समिति में आपदा प्रबंधन और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिससे आपातकालीन यातायात को लेकर समन्वय बनाए रखने में मदद मिल सकती है। एंबुलेंस के लिए जलमार्ग या वैकल्पिक सड़क मार्ग में किस रास्ते का इस्तेमाल किया जाएगा, इसकी निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने में अतिरिक्त समय न लगे, इसके लिए यातायात व्यवस्था में आपातकालीन वाहनों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

दैनिक यात्रियों के लिए भी प्रशासन को पिकअप और ड्रॉपिंग प्वाइंट की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुल बंद होने के बाद यात्रियों को एक वाहन से उतरकर दूसरे वाहन या नाव तक पहुंचना पड़ सकता है। यदि यह प्रक्रिया व्यवस्थित नहीं हुई तो घाटों और सड़क के आसपास भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए प्रशासन ने दोनों छोरों पर उपयुक्त स्थानों को चिन्हित करने और वहां पर्याप्त खुली जगह रखने की योजना बनाई है।

नाव और क्रूज के किराये की निगरानी के साथ यात्रियों को शिकायत की सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। प्रशासन ने निर्धारित दर से अधिक वसूली की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इससे यात्रियों को यह जानकारी रहेगी कि अधिक पैसा मांगे जाने पर शिकायत कहां की जा सकती है। घाटों पर रेट चार्ट लगाने का उद्देश्य भी किराये को पारदर्शी बनाना है।

प्रशासन की निगरानी समिति में भागलपुर और नवगछिया दोनों क्षेत्रों के अधिकारी शामिल किए गए हैं। इससे गंगा के दोनों किनारों पर यातायात और जलमार्ग संचालन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पूरी की जा सकती है। एक तरफ से आने वाले यात्रियों और दूसरी तरफ से जाने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था करनी पड़ सकती है। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में यात्री संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त निगरानी की जरूरत होगी।

इस पूरी योजना में पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। ट्रैफिक डायवर्जन, नो-एंट्री, वन-वे, पार्किंग और भीड़ नियंत्रण जैसे मामलों में पुलिस को मौके पर तैनात रहना होगा। घाटों पर भीड़ बढ़ने की स्थिति में यात्रियों को कतारबद्ध करने और नाव की क्षमता के अनुसार सवार कराने की व्यवस्था करनी होगी। सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाले संचालकों पर कार्रवाई भी पुलिस और प्रशासन के समन्वय से की जाएगी।

पुल निर्माण निगम की ओर से पहले बताया गया था कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के स्थायी पुनर्निर्माण के लिए सेतु को यातायात के लिए बंद करने की योजना बनाई गई थी। उस समय तीन महीने तक बंद रखने की बात सामने आई थी। इसके कारण जिला प्रशासन के सामने वैकल्पिक परिवहन और यातायात व्यवस्था तैयार करने की जरूरत बनी। अब प्रशासन की ताजा तैयारी इसी चुनौती को देखते हुए आगे बढ़ रही है।

भागलपुर प्रशासन का कहना है कि सेतु बंद रहने की अवधि में आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाएगी। छह सदस्यीय समिति सड़क मार्ग, जलमार्ग, किराया, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन से जुड़े मामलों पर नजर रखेगी। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी स्तर पर मनमाना किराया वसूलने या सुरक्षा मानकों की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अब आने वाले दिनों में इस व्यवस्था की असली परीक्षा तब होगी, जब विक्रमशिला सेतु पर यातायात पूरी तरह प्रभावित होगा और बड़ी संख्या में यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों तथा जलमार्ग का इस्तेमाल करना पड़ेगा। रूट डायवर्जन, घाटों की व्यवस्था, नाव और क्रूज की उपलब्धता, किराये की पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों का पालन—इन सभी पर एक साथ नजर रखना प्रशासन के लिए जरूरी होगा। यदि सभी विभागों के बीच समन्वय बना रहता है तो पुल बंद रहने के दौरान यातायात को व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।

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