भारत–ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: G7 में मोदी- स्टार्मर ने इसकी घोषणा की

भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। G7 समिट में पीएम मोदी और कीर स्टार्मर ने इसकी घोषणा की। टैरिफ घटेंगे, व्यापार बढ़ेगा

भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। G7 समिट में पीएम मोदी और कीर स्टार्मर ने इसकी घोषणा की। समझौते से टैरिफ घटेंगे, व्यापार बढ़ेगा और भारतीय प्रोफेशनल्स व उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।

पेरिस/लंदन/नई दिल्ली: फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और ब्रिटेन ने अपने आर्थिक संबंधों को नई दिशा देते हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लागू होने की घोषणा की। यह समझौता 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा, जिसकी घोषणा भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने संयुक्त रूप से की।

दोनों नेताओं की मुलाकात G7 समिट के दौरान हुई, जहां उन्होंने व्यापार, निवेश और वैश्विक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। यह समझौता 24 जुलाई 2025 को औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित हुआ था और अब इसे लागू करने की समयसीमा तय कर दी गई है।

भारत–ब्रिटेन FTA क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत और ब्रिटेन के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेश प्रवाह को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य व्यापार बाधाओं को कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है।

इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक लागत कम होगी, निर्यात बढ़ेगा और उद्योगों को नई प्रतिस्पर्धात्मकता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी के एक नए युग की शुरुआत करेगा।

टैरिफ में बड़ी कटौती: भारतीय निर्यातकों को मिलेगा फायदा

इस समझौते के तहत भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने वाला है। भारतीय कपड़ा उद्योग, फुटवियर सेक्टर और कुछ खाद्य उत्पादों पर ब्रिटेन द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ को काफी हद तक कम किया जाएगा। कपड़ा और फुटवियर उद्योग, जो भारत के रोजगार और निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, अब ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होंगे। 

इससे छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत के मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर को नई गति देगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।

ब्रिटिश व्हिस्की और ऑटोमोबाइल पर बड़ा बदलाव

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू ब्रिटिश उत्पादों पर भारत में टैरिफ कटौती भी है। भारत में ब्रिटिश व्हिस्की पर लगने वाला शुल्क 150% से घटाकर 40% कर दिया गया है। यह निर्णय दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन और बाजार पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। इसी तरह ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बड़ा बदलाव किया गया है। 

भारत–ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: G7 में मोदी- स्टार्मर ने इसकी घोषणा की

कोटा प्रणाली के तहत ऑटोमोबाइल पर टैरिफ 100% से घटाकर 10% कर दिया गया है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से घरेलू ऑटो निर्माताओं पर प्रतिस्पर्धी दबाव भी बढ़ सकता है, जिससे उन्हें नवाचार और उत्पादन क्षमता में सुधार करना होगा।

भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत: सोशल सिक्योरिटी नियमों में बदलाव

इस समझौते में भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अब ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से राहत मिलेगी। यह राहत पहले 36 महीने तक सीमित थी, जिसे अब बढ़ाकर 60 महीने कर दिया गया है। 

इसका सीधा फायदा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों, हेल्थकेयर वर्कर्स और अन्य कुशल श्रमिकों को मिलेगा जो ब्रिटेन में कार्यरत हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम दोनों देशों के बीच मानव संसाधन गतिशीलता को बढ़ाएगा और भारतीय प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर अधिक अवसर प्रदान करेगा।

व्यापारिक दुनिया के लिए तैयारी का समय

FTA के लागू होने से पहले दोनों देशों के व्यवसायों को 28 दिनों का समय दिया गया है ताकि वे नई व्यापारिक व्यवस्था के लिए खुद को तैयार कर सकें। इस अवधि में कंपनियां अपनी सप्लाई चेन, मूल्य निर्धारण और निर्यात रणनीतियों को नए नियमों के अनुसार ढाल सकेंगी। सरकारों का मानना है कि यह संक्रमण काल व्यापारिक व्यवधानों को कम करेगा और सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगा।

भारत–ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय

यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं का परिणाम है। दोनों देश पहले से ही एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं, लेकिन इस FTA के लागू होने से आर्थिक संबंधों में अभूतपूर्व विस्तार की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को “भारत–ब्रिटेन संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया। 

उन्होंने कहा कि यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता में भी योगदान देगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी इस समझौते को दोनों देशों के लिए “win-win situation” बताया और कहा कि इससे रोजगार, निवेश और नवाचार के नए अवसर पैदा होंगे।

वैश्विक व्यापार पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–ब्रिटेन FTA का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक व्यापार संरचना को भी प्रभावित करेगा। यह समझौता एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक पुल को मजबूत करेगा।

भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, अब यूरोपीय बाजारों में अपनी उपस्थिति और मजबूत करेगा। वहीं ब्रिटेन ब्रेक्जिट के बाद नए वैश्विक व्यापार साझेदारों के साथ अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

Leave a comment