नई रिसर्च के अनुसार मच्छर कुछ लोगों की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर की गंध, कार्बन डाइऑक्साइड, त्वचा की रासायनिक संरचना, गर्मी और नमी जैसे कारक मच्छरों को संभावित होस्ट पहचानने में मदद करते हैं।
पेरिस: मच्छरों के काटने को लेकर लंबे समय से लोगों के बीच यह सवाल रहा है कि कुछ लोगों को मच्छर अधिक क्यों काटते हैं, जबकि कुछ लोग अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं। अब वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में इस रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार शरीर से निकलने वाली गंध, कार्बन डाइऑक्साइड, त्वचा की रासायनिक संरचना और शरीर की गर्मी जैसे कई कारक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शरीर से निकलने वाले संकेतों पर नजर रखते हैं मच्छर
वैज्ञानिकों के अनुसार मच्छर अपने शिकार की पहचान करने के लिए कई तरह के जैविक संकेतों का उपयोग करते हैं। विशेष रूप से मादा मच्छर, जो खून चूसती हैं, अपने आसपास मौजूद लोगों का पता लगाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, शरीर की गंध, गर्मी और नमी जैसे संकेतों को महसूस करती हैं। यही कारण है कि कुछ लोग मच्छरों को दूसरों की तुलना में अधिक आकर्षित करते हैं।
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फ्रांस के इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च फॉर डेवलपमेंट के मेडिकल एंटोमोलॉजिस्ट फ्रेडरिक सिमार्ड के अनुसार मच्छरों का आकर्षण हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता। यह समय, स्वास्थ्य स्थिति और शरीर में होने वाले बदलावों के अनुसार भी बदल सकता है।
कार्बन डाइऑक्साइड बनती है प्रमुख वजह
शोधकर्ताओं का कहना है कि मच्छरों को आकर्षित करने वाले सबसे मजबूत संकेतों में कार्बन डाइऑक्साइड शामिल है। जब हम सांस लेते हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है, जिसे मच्छर दूर से भी महसूस कर सकते हैं। जो लोग अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं, जैसे बड़े शरीर वाले व्यक्ति या शारीरिक गतिविधि करने वाले लोग, वे मच्छरों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं।
इसके अलावा शरीर का तापमान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्म शरीर और अधिक पसीना आने की स्थिति में मच्छरों के आकर्षित होने की संभावना बढ़ सकती है।
त्वचा की गंध और रासायनिक संरचना का भी असर
वैज्ञानिकों ने पाया है कि त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया और उनसे बनने वाली विशेष गंध भी मच्छरों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाती है। हर व्यक्ति की त्वचा की रासायनिक संरचना अलग होती है, जिससे निकलने वाली गंध भी अलग होती है। यही वजह है कि एक ही जगह मौजूद लोगों में से मच्छर कुछ व्यक्तियों को ज्यादा निशाना बनाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मच्छरों के व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने से भविष्य में ऐसे उपाय विकसित किए जा सकते हैं, जो लोगों को मच्छरों के काटने और उनसे फैलने वाली बीमारियों से अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकें। यह शोध मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









