केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने मंगलवार को लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) विनिमय का शुभारंभ किया। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य भारत के भूमि बंदरगाहों (Land Ports) पर व्यापार और आवागमन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है।
नई दिल्ली: भारत ने सीमा व्यापार और सुरक्षा प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम' (LPMS) लॉन्च किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस नई डिजिटल प्रणाली का उद्घाटन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सीमा पार व्यापार को तेज, पारदर्शी और अधिक सुरक्षित बनाना है। साथ ही, सरकार अगले तीन वर्षों में देशभर में 11 नए लैंड पोर्ट विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत के सीमा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
कागजी प्रक्रिया की जगह डिजिटल प्रणाली
लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के लागू होने से सीमा व्यापार से जुड़े अधिकांश काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पूरे किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत प्रक्रियाएं कागजी दस्तावेजों पर आधारित हैं, जिन्हें अब डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। नई प्रणाली के तहत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम डेटा साझा किया जा सकेगा, जिससे दस्तावेजी देरी कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों की गति बढ़ेगी।
एलपीएमएस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में 'सिंगल इलेक्ट्रॉनिक विंडो' प्रणाली शामिल है। इसके जरिए सीमा पर आवश्यक मंजूरियों और प्रक्रियाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरा किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से सीमा पार व्यापार में लगने वाले समय में 40 से 60 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे माल ढुलाई, वाहनों की आवाजाही और व्यापारिक दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी।
अगले तीन वर्षों में 11 नए लैंड पोर्ट
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भारत का भूमि सीमा व्यापार पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लैंड पोर्ट के माध्यम से होने वाला व्यापार लगभग 83,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। वहीं, वर्ष 2014 में यह आंकड़ा करीब 5,000 करोड़ रुपये था। इस वृद्धि को देखते हुए सरकार सीमा अवसंरचना को आधुनिक बनाने और नए लैंड पोर्ट विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्तमान में देश में 15 लैंड पोर्ट संचालित हैं, जबकि अगले तीन वर्षों में 11 नए लैंड पोर्ट विकसित किए जाएंगे। इन नए सीमा बंदरगाहों का उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ाना, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और सीमावर्ती राज्यों के आर्थिक विकास को गति देना है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और सीमावर्ती जिलों से पलायन कम होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
स्मार्ट बॉर्डर योजना से मजबूत होगी सुरक्षा
सरकार लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम को अपनी व्यापक 'स्मार्ट बॉर्डर' रणनीति का हिस्सा मान रही है। इस पहल के तहत आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर सीमा सुरक्षा को और प्रभावी बनाया जाएगा। एलपीएमएस के माध्यम से भारतीय सीमा शुल्क इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज गेटवे (ICEGATE), केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), सीमा सुरक्षा बल (BSF), विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), मोटर वाहन प्रणाली, यूआईडीएआई और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) जैसी विभिन्न एजेंसियां एकीकृत डिजिटल मंच पर काम करेंगी।
इससे सुरक्षा एजेंसियों और व्यापारिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
गृह मंत्री ने कहा कि लैंड पोर्ट केवल व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक संपर्क और सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एकीकृत डिजिटल प्रणाली के जरिए कार्गो प्रबंधन, वाहनों की आवाजाही और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सरल बनाया जाएगा। इससे न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीमा क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार होगा।









