बिहार बाढ़ राहत में नितिन नबीन ने दिए 3 महीने की सैलरी, BJP-LJP(R) सांसद-विधायक देंगे एक माह का वेतन

बिहार बाढ़ राहत में नितिन नबीन ने 3 महीने की सैलरी दी। BJP और LJP(R) के सांसद-विधायक एक महीने का वेतन देंगे। 13 जिलों में बारिश-वज्रपात का अलर्ट है।
बिहार बाढ़ राहत में नितिन नबीन ने दिए 3 महीने की सैलरी, BJP-LJP(R) सांसद-विधायक देंगे एक माह का वेतन
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बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच राहत और पुनर्वास के लिए राजनीतिक दलों की ओर से आर्थिक सहयोग की घोषणाएं सामने आई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नबीन ने बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए अपने तीन महीने के सांसद वेतन की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की है। उन्होंने 6.35 लाख रुपये की राशि राहत कोष में योगदान की है। इसके साथ ही बिहार भाजपा ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये का चेक सौंपा है और पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों तथा विधान पार्षदों से एक महीने का वेतन देने की घोषणा की गई है। दूसरी ओर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों का एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की है।

नितिन नबीन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने तीन महीने के सांसद वेतन की राशि बाढ़ राहत के लिए देने की जानकारी दी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में 6,35,000 रुपये का योगदान किया है। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों तक समय पर राहत एवं जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

नितिन नबीन के मुताबिक बाढ़ प्रभावित परिवारों को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों को 7,000 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सुविधाओं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी दी गई है। फसल नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया भी जारी बताई गई है।

भाजपा की ओर से भी राहत कोष में अलग से आर्थिक सहयोग दिया गया है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये का चेक सौंपा। इस दौरान पार्टी की ओर से यह घोषणा की गई कि बिहार के सभी भाजपा सांसद, विधायक और विधान पार्षद अपने एक महीने के वेतन की राशि राहत कोष में देंगे। पार्टी की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने में कार्यकर्ताओं को प्रशासन के साथ सहयोग करने की बात भी कही गई है।

बिहार में बाढ़ राहत को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से भी इसी तरह की घोषणा की गई है। पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि LJP (रामविलास) के सभी सांसद, विधायक और विधान पार्षद अपना एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देंगे। यह घोषणा 18 सितंबर को की गई। पार्टी की ओर से इसे राहत और पुनर्वास के काम में सहयोग के तौर पर बताया गया है।

इस तरह बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए अलग-अलग स्तरों पर आर्थिक योगदान की घोषणाएं सामने आई हैं। एक तरफ नितिन नबीन ने व्यक्तिगत तौर पर तीन महीने का सांसद वेतन दिया है, वहीं भाजपा और LJP (रामविलास) ने अपने जनप्रतिनिधियों के एक महीने के वेतन के योगदान की घोषणा की है। भाजपा की ओर से 51 लाख रुपये का तत्काल योगदान भी मुख्यमंत्री राहत कोष में किया गया है।

बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने भी बिहार के कई जिलों के लिए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। 19 सितंबर को राज्य के 13 जिलों में मेघ गर्जन और वज्रपात की चेतावनी दी गई है। जिन जिलों को चेतावनी वाले क्षेत्र में रखा गया है, उनमें रोहतास, कैमूर, भोजपुर, बक्सर, अरवल, औरंगाबाद, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और सहरसा शामिल हैं। कटिहार और किशनगंज में भारी वर्षा की भी चेतावनी बताई गई है।

प्रभात खबर की मौसम रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण-पश्चिम बिहार के कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, औरंगाबाद और अरवल में गरज-चमक के साथ बारिश तथा तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं उत्तर-पूर्वी बिहार के सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में भी बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के ताजा चेतावनी पेज पर भी 19 सितंबर के लिए बिहार में मेघ गर्जन और बिजली गिरने से संबंधित चेतावनी दर्ज है। हालांकि 20 से 22 सितंबर के लिए राज्य स्तर पर कोई चेतावनी नहीं दिखाई गई है, जबकि 23 और 24 सितंबर को फिर से मेघ गर्जन और वज्रपात की चेतावनी दर्ज है। इसका मतलब है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम पूरी तरह स्थिर होने के बजाय बीच-बीच में बदल सकता है।

पटना की बात करें तो भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 19 सितंबर को राजधानी में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ बौछार की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 20 और 21 सितंबर को भी आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, जबकि 22 सितंबर को फिर बारिश या गरज के साथ बौछार की संभावना बताई गई है।

राज्य में बारिश का यह दौर ऐसे समय में जारी है जब उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग से जुड़े पूर्वानुमानों के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने की परिस्थितियां बन रही हैं। इसके साथ बिहार में भारी बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना जताई गई है, हालांकि सितंबर के अंतिम दिनों तक अलग-अलग हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।

बाढ़ के कारण राज्य के कई हिस्सों में पहले से ही बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि और जलजमाव के कारण कई जगह सड़क संपर्क, खेती और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। राहत कार्यों में प्रशासन के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी लगाई गई हैं। राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के जरिए प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

बाढ़ का असर केवल घरों और सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से खरीफ फसलों को नुकसान होने की आशंका है। नितिन नबीन ने भी फसल क्षति का आकलन किए जाने और उसके आधार पर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।

केंद्र सरकार की ओर से भी बिहार में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए टीम भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। नितिन नबीन ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। बाढ़ का पानी कम होने के बाद नुकसान का विस्तृत आकलन किए जाने और केंद्र से आगे भी सहायता मिलने की बात कही गई है।

राहत कोष में राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के योगदान के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक सहायता को समय पर पहुंचाना है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में कई जगह सड़क संपर्क बाधित होने या पानी जमा रहने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में नावों और अन्य वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा और पशु चारे की उपलब्धता पर भी लगातार नजर रखने की जरूरत है।

मौसम विभाग की 19 सितंबर की चेतावनी को देखते हुए उन जिलों में विशेष सतर्कता की जरूरत है जहां वज्रपात और तेज हवा की आशंका जताई गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बारिश और बिजली गिरने का खतरा अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम खराब होने के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने तथा स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

उत्तर-पूर्वी बिहार के जिलों में बारिश की चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में पहले से बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित इलाके मौजूद हैं। सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में बारिश होने पर स्थानीय नदियों और जलनिकासी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। वहीं दक्षिण-पश्चिम बिहार के कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, औरंगाबाद और अरवल में गरज-चमक और तेज हवा के साथ बारिश का अनुमान है।

उत्तर बिहार के लिए जारी कृषि मौसम पूर्वानुमान में 19 से 23 सितंबर के बीच अधिकतर स्थानों पर हल्के बादल और कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बताई गई है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 30 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि पूरे राज्य में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी और अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम का प्रभाव अलग हो सकता है।

फिलहाल बिहार में बाढ़ राहत अभियान और मौसम की निगरानी दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष में व्यक्तिगत और राजनीतिक संगठनों की ओर से आर्थिक सहयोग देने की घोषणाओं के बीच प्रशासन प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने में जुटा है। वहीं 19 सितंबर को 13 जिलों में बारिश, मेघ गर्जन और वज्रपात की चेतावनी के कारण संबंधित जिलों में सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मानसून कमजोर होगा, बाढ़ का पानी उतरने और नुकसान का विस्तृत आकलन होने के बाद राहत एवं पुनर्वास की अगली तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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