बिहार में फलदार पेड़ों की खेती पर किसानों को मिलेंगे 1 लाख रुपये प्रति एकड़, भागलपुर के गांवों में बनेंगे विशेष क्लस्टर

बिहार सरकार बेल, कटहल, अनार और आंवले की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख रुपये देगी। भागलपुर के गांवों में बनेंगे फल उत्पादन क्लस्टर।
बिहार में फलदार पेड़ों की खेती पर किसानों को मिलेंगे 1 लाख रुपये प्रति एकड़, भागलपुर के गांवों में बनेंगे विशेष क्लस्टर
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बिहार सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और पारंपरिक खेती के साथ फलदार पौधों की व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नई पहल कर रही है। इसके तहत भागलपुर जिले में बेल, कटहल, अनार और आंवले की खेती के लिए विशेष क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी। उद्यान विभाग की इस पहल से जिले में फल उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को कमाई का नया विकल्प मिलने की उम्मीद है।

भागलपुर जिले में इस परियोजना के लिए कुल 100 एकड़ जमीन निर्धारित की गई है। चार अलग-अलग फलदार फसलों के लिए 25-25 एकड़ के क्लस्टर तैयार किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य है कि किसान छोटे-छोटे खेतों में अलग-अलग खेती करने के बजाय एक बड़े क्षेत्र में एक ही प्रकार के फलदार पौधे लगाएं। इससे उत्पादन को व्यवस्थित करने और बाजार तक फल पहुंचाने में आसानी होगी।

उद्यान विभाग की कार्ययोजना के अनुसार कहलगांव प्रखंड के कैरिया गांव में कटहल और बेल की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। यहां 25 एकड़ में कटहल और 25 एकड़ में बेल के पौधे लगाए जाएंगे। इसी प्रखंड की सिया पंचायत में 25 एकड़ जमीन पर अनार की खेती की योजना है। इसके अलावा सन्हौला प्रखंड के भोल्सर गांव में 25 एकड़ क्षेत्र में आंवले की बागवानी विकसित की जाएगी। इस तरह जिले के तीन स्थानों पर चार फलदार फसलों के विशेष क्लस्टर तैयार होंगे।

इस योजना को कृषि विभाग की पहल गांव की बागवानी हमारे गौरव की कहानी के तहत संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसे वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक तीन वर्षों के लिए लागू किया है। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर फलदार पौधों की व्यावसायिक खेती से जोड़ना है। इसके साथ ही स्थानीय बाजारों में दूसरे राज्यों से आने वाले फलों पर निर्भरता कम करने की भी तैयारी है।

योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि एक साथ नहीं बल्कि दो किस्तों में दी जाएगी। पहले वर्ष किसानों को कुल स्वीकृत सहायता राशि का 60 प्रतिशत यानी 60 हजार रुपये मिलेंगे। इसके बाद दूसरे वर्ष शेष 40 प्रतिशत यानी 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। हालांकि दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए किसानों को एक महत्वपूर्ण शर्त पूरी करनी होगी।

दूसरे वर्ष की सहायता राशि तभी जारी की जाएगी जब खेत में लगाए गए कम से कम 90 प्रतिशत पौधे जीवित पाए जाएंगे। इसके लिए विभाग की ओर से पौधों की स्थिति का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल पौधे लगवाना नहीं बल्कि उनकी नियमित देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार चाहती है कि किसानों की बागवानी लंबे समय तक चल सके और उन्हें आने वाले वर्षों में इसका आर्थिक लाभ मिले।

इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों को कुछ जरूरी व्यवस्थाएं अपने स्तर से भी करनी होंगी। खेत में लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले फलदार पौधों की व्यवस्था किसानों को करनी होगी। इसके अलावा पौधों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाने और खेत की सुरक्षा के लिए घेराबंदी करने की जिम्मेदारी भी किसानों की होगी। घेराबंदी से नीलगाय और आवारा पशुओं से पौधों को बचाने में मदद मिलेगी। किसानों को शुरुआत में इन व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक तैयारी भी करनी होगी।

क्लस्टर आधारित खेती का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही स्थान पर बड़े क्षेत्र में एक प्रकार के फल का उत्पादन किया जा सकेगा। इससे किसानों को बाजार तक अपनी उपज पहुंचाने में आसानी होगी। व्यापारी भी सीधे खेतों से बड़ी मात्रा में फल खरीद सकेंगे। इससे परिवहन और बिक्री की व्यवस्था बेहतर होने के साथ बिचौलियों पर निर्भरता कम करने की संभावना रहेगी।

भागलपुर में बेल, कटहल, अनार और आंवले की खेती को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर फल उत्पादन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। अभी कई प्रकार के फल दूसरे राज्यों और बाहरी बाजारों से मंगाए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से बाजार की मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा किसानों को फसल विविधीकरण का अवसर मिलेगा और वे पारंपरिक अनाज की खेती के साथ बागवानी से भी आमदनी प्राप्त कर सकेंगे।

बिहार सरकार की उद्यान विभाग की क्लस्टर योजना में अन्य फलदार फसलों को भी शामिल किया गया है। विभाग की आधिकारिक योजना के अनुसार अमरूद, नींबू, एप्पल बेर, बेल, कटहल, आंवला और अनार जैसी फसलों के लिए भी अधिकतम एक लाख रुपये प्रति एकड़ तक अनुदान का प्रावधान है। सामान्य तौर पर इस योजना में न्यूनतम 0.25 एकड़ और अधिकतम 10 एकड़ तक लाभ लेने का प्रावधान रखा गया है।

भागलपुर के किसानों के लिए यह योजना खेती के तरीके में बदलाव लाने का अवसर बन सकती है। खासकर कैरिया, सिया और भोल्सर में विकसित होने वाले क्लस्टर आने वाले वर्षों में फल उत्पादन के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। यदि किसान पौधों की उचित देखभाल और सिंचाई की व्यवस्था पर ध्यान देते हैं तो इससे जिले में बागवानी आधारित रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

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