बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी जंग: उपेंद्र कुशवाहा के विधायक ने उठाया मुद्दा, BJP के दिलीप जायसवाल ने किया खारिज

बिहार में शराबबंदी के मुद्दे पर सियासी विवाद बढ़ गया है। उपेंद्र कुशवाहा के विधायक ने इसे लेकर सवाल उठाए, जबकि भाजपा के दिलीप जायसवाल ने उनका विरोध करते हुए

पटना में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। माधव आनंद द्वारा शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाने के बाद यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया है।

पटना: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLM) के विधायक माधव आनंद ने हाल ही में विधानसभा में शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग उठाई। उनके बयान ने राज्य की राजनीति में नया सियासी बहस का केंद्र बना दिया। हालांकि, इस पर BJP के राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और माधव आनंद के बयान को गैर-गंभीर और महत्वहीन करार दिया।

माधव आनंद का बयान

माधव आनंद ने विधानसभा में कहा था कि शराबबंदी कानून की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि समय बदलने के साथ इस कानून की प्रभावशीलता और समाज पर इसके प्रभाव को परखना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कानून की समीक्षा कराकर उसकी कार्यक्षमता और सुधार के उपायों पर विचार करना चाहिए।

उनका यह बयान राज्य में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जुबानी जंग का कारण बन गया। विपक्ष ने इसे सामाजिक मुद्दे के रूप में उठाया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया।

BJP मंत्री दिलीप जायसवाल का जवाब

मंत्री दिलीप जायसवाल ने माधव आनंद के बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि विधायक अक्सर विधानसभा की कार्यवाही में अनुपस्थित रहते हैं और गंभीरता का परिचय नहीं देते। उन्होंने कहा, माधव आनंद के इस तरह के बयानों का कोई खास महत्व नहीं है। अगर वे केवल बयानबाजी करना चाहते हैं, तो अगले पांच साल तक ऐसा करते रहें।

जायसवाल ने साफ किया कि सरकार शराबबंदी कानून के अपने फैसले पर कायम है और इसे सामाजिक सुधार के दृष्टिकोण से लागू किया गया है। उनका यह भी कहना था कि विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

शराबबंदी कानून पर बिहार में बहस

बिहार में शराबबंदी कानून काफी समय से लागू है और इसे लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। कुछ नेता, जैसे माधव आनंद, कानून की समीक्षा और संशोधन की मांग करते रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह कानून सामाजिक सुधार और लोगों को शराब के नशे से दूर रखने के लिए जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी के सामाजिक लाभ हैं, लेकिन इसके अनुपालन और प्रभावशीलता पर निरंतर नजर रखने की जरूरत है।

दिलीप जायसवाल ने यह भी तंज कसा कि माधव आनंद खुद ही अक्सर विधानसभा की कार्यवाही में अनुपस्थित रहते हैं। ऐसे में उनके बयान का कोई गंभीर राजनीतिक महत्व नहीं है। यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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