बिल्ली पालने पर मानसिक बीमारी का खतरा? ऑस्ट्रेलियाई शोध में नया दावा सामने आया

ऑस्ट्रेलिया की रिसर्च में पाया गया कि लंबे समय तक बिल्लियों के संपर्क में रहने वाले लोगों में स्किज़ोफ्रेनिया का खतरा लगभग दोगुना हो सकता है।

ऑस्ट्रेलिया की एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि पालतू बिल्लियों के संपर्क में रहने वाले लोगों में स्किज़ोफ्रेनिया जैसे मानसिक विकारों का जोखिम बढ़ सकता है। 17 स्टडीज़ के विश्लेषण में पाया गया कि लंबे समय तक बिल्लियों के आसपास रहने वालों में खतरा लगभग दोगुना था। शोधकर्ता इसे एक संभावित पर्यावरणीय जोखिम मानकर आगे अध्ययन की जरूरत बता रहे हैं।

Schizophrenia Research Update: ऑस्ट्रेलिया में किए गए एक व्यापक विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पालतू बिल्लियों और स्किज़ोफ्रेनिया जोखिम के बीच संबंध पाया है। यह अध्ययन 17 पुरानी रिसर्च की समीक्षा पर आधारित है, जिसमें सामने आया कि लंबे समय तक बिल्लियों के संपर्क में रहने वाले लोगों में मानसिक विकारों की संभावना अधिक देखी गई। शोध बुधवार को जारी किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि Toxoplasma gondii नामक परजीवी इसके पीछे मुख्य कारण हो सकता है। यह निष्कर्ष इसलिए अहम है क्योंकि स्किज़ोफ्रेनिया का वास्तविक कारण अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और पर्यावरणीय कारक इसकी समझ को नए दिशा में ले जा सकते हैं।

बिल्लियों से संपर्क और स्किज़ोफ्रेनिया का बढ़ा जोखिम

ऑस्ट्रेलिया की नई रिसर्च में दावा किया गया है कि पालतू बिल्लियों के संपर्क में रहने वाले लोगों में स्किज़ोफ्रेनिया जैसे मानसिक विकारों का जोखिम बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने 17 पुरानी स्टडीज़ के विश्लेषण में पाया कि लंबे समय तक बिल्लियों के साथ रहने वालों में यह खतरा लगभग दोगुना देखा गया। हालांकि इसे सीधा कारण नहीं माना गया है, लेकिन जोखिम का संबंध इतना मजबूत है कि वैज्ञानिक इसे एक संभावित पर्यावरणीय कारक मान रहे हैं।

स्किज़ोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसमें सोच, व्यवहार और वास्तविकता को समझने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसके लक्षणों में भ्रम, आवाजें सुनाई देना, असंगत बातें करना और सामाजिक दूरी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेनेटिक और न्यूरोलॉजिकल कारकों के साथ पर्यावरणीय एक्सपोजर भी इस बीमारी को प्रभावित कर सकता है।

Toxoplasma gondii कैसे बढ़ाता है खतरा

रिसर्च में पाया गया कि स्किज़ोफ्रेनिया के जोखिम के पीछे सबसे बड़ा कारण Toxoplasma gondii नामक परजीवी हो सकता है। यह परजीवी बिल्लियों के मल और उनके आसपास पाए जाने वाले वातावरण में मौजूद रहता है। संक्रमित व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंचकर यह न्यूरोट्रांसमीटर को प्रभावित कर सकता है, जिससे सोचने और व्यवहार की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

कई स्टडीज़ पहले भी इस परजीवी से जुड़े मानसिक विकारों की ओर इशारा कर चुकी हैं। रिसर्च टीम के अनुसार, जो लोग लंबे समय तक कैट लिटर या बिल्लियों के मल के संपर्क में रहते हैं, उनमें संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे गंभीर जोखिम कारक के रूप में अध्ययन करने की सलाह दे रहे हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी और जरूरी सावधानियां

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह निष्कर्ष केवल एक संबंध दर्शाता है, यह सीधी पुष्टि नहीं है कि बिल्ली पालने से स्किज़ोफ्रेनिया जरूर होगा। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि साफ-सफाई और हाइजीन को नज़रअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कैट लिटर को सावधानी से संभालें, नियमित रूप से हाथ धोएं और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाएं।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। इसके साथ ही, लोगों को अपनी आदतों में छोटे बदलाव लाकर इस जोखिम को कम करने की कोशिश करनी चाहिए। खासकर उन लोगों के लिए यह जरूरी है जिनके परिवार में मानसिक विकारों का इतिहास रहा है।

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