आम बजट के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार के लिए राजस्व जुटाने का प्रमुख साधन विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा विनिवेश नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
New Delhi: वित्त वर्ष 2027 का आम बजट पेश करने के एक दिन बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार के लिए आने वाले समय में राजस्व (Revenue) जुटाने का सबसे अहम रास्ता विनिवेश (Disinvestment) और परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Asset Monetisation) होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की मौजूदा विनिवेश नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसकी गति और दिशा ही यह तय करेगी कि अगले वित्त वर्ष में राजस्व जुटाने का माहौल कितना मजबूत रहेगा।
वित्त मंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही। उनका कहना था कि सरकार का ध्यान केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (Central Public Sector Enterprises) में हिस्सेदारी बेचने और गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर रहेगा, ताकि बिना अतिरिक्त कर बोझ डाले राजस्व बढ़ाया जा सके।
विनिवेश नीति में निरंतरता का भरोसा
निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि विनिवेश की योजना में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। सरकार पहले से तय रोडमैप के अनुसार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विनिवेश केवल शेयर बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग करना भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय पीएसयू के ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक निर्गम (Public Issue) लाने चाहिए और जिन परिसंपत्तियों की सरकार को सीधे जरूरत नहीं है, उनका मुद्रीकरण किया जाना चाहिए। इससे सरकार को संसाधन मिलेंगे और अर्थव्यवस्था में निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
वित्त वर्ष 2027 के लिए बड़ा विनिवेश लक्ष्य
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने विविध पूंजी प्राप्ति (Miscellaneous Capital Receipts) के तहत 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य पिछले वर्षों की तुलना में काफी बड़ा माना जा रहा है। इसमें केंद्रीय पीएसयू में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री के साथ-साथ परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से मिलने वाली राशि भी शामिल है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह लक्ष्य व्यावहारिक है और इसे हासिल किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर बाजार की स्थिति अनुकूल रही और प्रक्रियाएं समय पर पूरी की गईं, तो सरकार इस लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है।
पिछले वर्ष के लक्ष्य में कटौती की वजह
हालांकि वित्त वर्ष 2026 के लिए बजट में सरकार ने विनिवेश से 47,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बाद में संशोधित अनुमान (Revised Estimate) में इसे घटाकर 33,837 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि बाजार की परिस्थितियां और व्यावहारिक चुनौतियां कई बार तय लक्ष्यों को प्रभावित करती हैं।
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उन्होंने यह भी माना कि कुछ बड़े सौदे समय पर पूरे नहीं हो पाए, जिसकी वजह से संशोधन करना पड़ा। इसके बावजूद सरकार का दीर्घकालिक फोकस विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण पर ही बना हुआ है।
आईडीबीआई बैंक हिस्सेदारी बिक्री का संकेत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि सरकार आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करेगी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि इस दिशा में काम जारी है।
आईडीबीआई बैंक का विनिवेश लंबे समय से चर्चा में है और इसे सरकार के प्रमुख रणनीतिक विनिवेश मामलों में से एक माना जाता है। बाजार और निवेशक इस फैसले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
आईबीसी संशोधन विधेयक पर सरकार की तैयारी
ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC) के संशोधन विधेयक को लेकर भी वित्त मंत्री ने अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दूसरे हिस्से में यह विधेयक संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि संसद की प्रवर समिति (Parliamentary Standing Committee) ने दिसंबर में ही इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। सरकार अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही है। IBC को मजबूत करने का उद्देश्य कॉरपोरेट सेक्टर में समयबद्ध समाधान और बैंकिंग सिस्टम को स्थिर बनाना है।
राजकोषीय सुदृढ़ीकरण पर संतुलित रुख
राजकोषीय सुदृढ़ीकरण (Fiscal Consolidation) को लेकर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि यह हर साल की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास की गति बनाए रखने की होगी।
उन्होंने कहा कि अगले साल परिस्थितियां कैसी रहती हैं, उसके आधार पर फैसले लिए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए आर्थिक वृद्धि को प्रभावित न होने देना है।
एसईजेड से घरेलू बाजार में बिक्री पर अस्थायी राहत
विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone – SEZ) से जुड़े सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि SEZ इकाइयों को अपने उत्पाद घरेलू शुल्क क्षेत्र (Domestic Tariff Area) में बेचने की अनुमति एक बार का और अस्थायी उपाय है।
उन्होंने साफ किया कि यह फैसला मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इसे स्थायी नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।









