Black Plastic Food Containers: जानें इसके इस्तेमाल से जुड़े जोखिम और सावधानियां

गरम और तैलीय खाने में काले प्लास्टिक बर्तन माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकते हैं। ग्लास, स्टील या लकड़ी के बर्तन सेहत के लिए सुरक्षित हैं।

राज्यसभा में सांसदों ने ढाबों और होटलों में इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक बर्तनों को लेकर चिंता जताई है। ये बर्तन गरम या तैलीय खाने में माइक्रोप्लास्टिक और टॉक्सिक केमिकल छोड़ सकते हैं, जिससे हार्मोनल गड़बड़ी, डायबिटीज, दिल की बीमारी और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ ग्लास, स्टील या लकड़ी के बर्तनों का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं।

Plastic Health Risks: राज्यसभा में सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने ढाबों और होटलों में इस्तेमाल हो रहे काले प्लास्टिक बर्तनों को लेकर चेतावनी दी है। ये बर्तन इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट और औद्योगिक प्लास्टिक से बने होते हैं, और गरम या तैलीय खाने के संपर्क में आने पर माइक्रोप्लास्टिक तथा टॉक्सिक केमिकल छोड़ सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी, कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ता है, इसलिए ग्लास, स्टील या लकड़ी के सुरक्षित बर्तनों का उपयोग जरूरी है।

काले प्लास्टिक बर्तन और सेहत का खतरा

हाल ही में राज्यसभा में सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने ढाबों और होटलों में इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक बर्तनों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये बर्तन सामान्य प्लास्टिक नहीं होते और इनमें इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट या औद्योगिक प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। जब गर्म या तैलीय खाना इनमें रखा जाता है, तो माइक्रोप्लास्टिक और टॉक्सिक केमिकल खाने में मिल सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

कैसे बनते हैं काले प्लास्टिक बर्तन?

रिपोर्ट्स के अनुसार, काले प्लास्टिक में फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल, BPA और फ्थेलेट्स मिलाए जाते हैं। ये केमिकल पूरी तरह प्लास्टिक में बंधे नहीं रहते और गरम होने पर खाने में रिलीज हो सकते हैं। बार-बार इस्तेमाल या गर्म करने से ये केमिकल शरीर में जमा हो सकते हैं और लंबे समय में हार्मोनल गड़बड़ी, डायबिटीज, दिल की बीमारी और प्रजनन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं।

एक्सपर्ट्स का चेतावनी संदेश

2024 की स्टडी में 200 से अधिक ब्लैक प्लास्टिक उत्पादों का विश्लेषण किया गया, जिसमें 85% में टॉक्सिक फ्लेम रिटार्डेंट पाए गए। Dr. Aravind Badiger के अनुसार, लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। Dr. Sachin Trivedi और Prof. Chintamani ने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक भी शरीर में जाकर टॉक्सिक लोड बढ़ाता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर और गंभीर हो सकता है।

सुरक्षित विकल्प और सावधानी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि काले प्लास्टिक के डिब्बों की जगह ग्लास, स्टील या लकड़ी के बर्तन इस्तेमाल करें। खासकर खाना गरम करते समय प्लास्टिक से बचना चाहिए। यह सरल उपाय सेहत को लंबे समय के खतरों से बचाने में मदद करता है।

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