बॉन्डी बीच हमले के दौरान हमलावर को निहत्था करने वाले अहमद अल अहमद को घरेलू हिंसा मामले में राहत मिली है। सिडनी की अदालत में अभियोजन पक्ष ने आरोप वापस ले लिए। अहमद 12 महीने के घरेलू हिंसा संरक्षण आदेश का पालन करेंगे।
सिडनी: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर हुए घातक गोलीकांड के दौरान हमलावर को निहत्था करने के लिए दुनिया भर में चर्चा में आए अहमद अल अहमद को घरेलू हिंसा से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने उनके खिलाफ लगाए गए मारपीट और डराने-धमकाने से संबंधित आरोप वापस ले लिए हैं। बुधवार को स्थानीय सिडनी अदालत में अभियोजन पक्ष ने आरोप वापस लेने का फैसला किया। 44 वर्षीय अहमद के खिलाफ जून में घरेलू हिंसा से संबंधित सामान्य मारपीट, पीछा करने और डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए थे। ये आरोप मार्च में दक्षिण-पश्चिम सिडनी स्थित एक घर में उनके पिता के साथ कथित घटना से जुड़े थे। अहमद ने आरोपों से इनकार किया था।
अदालत में आरोप वापस लेने पर बनी सहमति
बुधवार को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अहमद के खिलाफ लगाए गए आरोप वापस ले लिए। इसके बदले अहमद ने 12 महीने की अवधि के लिए एक घरेलू हिंसा संरक्षण आदेश का पालन करने पर सहमति जताई। इस आदेश के तहत अहमद के अपने पिता के साथ संपर्क पर कुछ प्रतिबंध लागू रहेंगे। उन्हें अपने पिता के खिलाफ मारपीट, धमकी, पीछा करने या डराने-धमकाने जैसी गतिविधियों से दूर रहना होगा।
अहमद के बचाव पक्ष के वकील मोहम्मद साकर ने अदालत में स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी अपराध को स्वीकार किए बिना स्वीकार किया गया है। यानी अहमद ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अभियोजन पक्ष द्वारा वापस ले लिए गए हैं।
अदालत के बाहर अहमद ने जताई खुशी
सुनवाई के बाद अदालत के बाहर अहमद अल अहमद ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने अदालत की कार्रवाई के बाद खुद को एक "आजाद इंसान" बताते हुए राहत जाहिर की। अहमद ने कहा कि वह अब शांति की उम्मीद करते हैं। उनके बयान से संकेत मिला कि वह मामले को पीछे छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं। यह मामला इसलिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा था क्योंकि अहमद कुछ ही महीनों पहले सिडनी के बॉन्डी बीच पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान अपनी बहादुरी के कारण वैश्विक सुर्खियों में आए थे।
बॉन्डी बीच हमले में हमलावर को किया था काबू
अहमद अल अहमद उस समय दुनिया की नजरों में आए जब दिसंबर में सिडनी के बॉन्डी बीच पर एक यहूदी कार्यक्रम के दौरान दो बंदूकधारियों ने लोगों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। घटना के दौरान सामने आए वीडियो फुटेज में अहमद को एक हमलावर की ओर बढ़ते और उसे काबू करते देखा गया था। उन्होंने जोखिम उठाकर बंदूकधारी को निहत्था करने की कोशिश की, जिससे हमले के दौरान लोगों को बचने का मौका मिला।
हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी। घटना को ऑस्ट्रेलिया में दशकों में हुए सबसे घातक सामूहिक गोलीकांडों में से एक माना गया। बाद में पुलिस ने इसे यहूदी समुदाय को निशाना बनाने वाला आतंकवादी हमला घोषित किया। अहमद की बहादुरी की व्यापक स्तर पर प्रशंसा हुई और उन्हें हमले के दौरान साहस दिखाने वाले व्यक्ति के रूप में देखा गया।
अहमद के लिए जुटाए गए करोड़ों रुपये
हमले के बाद अहमद के समर्थन में एक ऑनलाइन फंडरेजर शुरू किया गया था। इस अभियान के जरिए कुछ ही समय में 2.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई थी। यह रकम अहमद के इलाज, सहायता और उनके परिवार की मदद के लिए जुटाई गई थी।
अहमद को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का समर्थन भी मिला था। प्रधानमंत्री ने अस्पताल में अहमद से मुलाकात की थी और उनके साहस की सराहना की थी। हमले के बाद अहमद की कहानी ने ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी व्यापक जगह बनाई थी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने उन्हें लोगों के बीच एक बहादुर व्यक्ति के तौर पर पहचान दिलाई।

अब सामने आया पारिवारिक विवाद
बॉन्डी बीच हमले के बाद अहमद की सार्वजनिक छवि एक बहादुर व्यक्ति के रूप में बनी, लेकिन इसके बाद उनका नाम एक अलग कानूनी विवाद में सामने आया। मार्च में दक्षिण-पश्चिम सिडनी स्थित एक घर में उनके पिता के साथ कथित घटना के बाद पुलिस ने अहमद के खिलाफ घरेलू हिंसा से संबंधित आरोप लगाए थे। जून में उन पर सामान्य मारपीट के साथ पीछा करने और डराने-धमकाने से जुड़े आरोप भी लगाए गए।
अहमद ने इन सभी आरोपों से इनकार किया। बुधवार को अदालत में अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप वापस लिए जाने के बाद फिलहाल यह मामला अलग दिशा में आगे बढ़ा है। हालांकि, घरेलू हिंसा संरक्षण आदेश के कारण उनके पिता के साथ संपर्क पर अगले 12 महीनों तक प्रतिबंध बने रहेंगे।
भाइयों पर भी लगे गंभीर आरोप
अहमद से जुड़ा एक अन्य कानूनी मामला भी हाल में सामने आया है। उनके दो भाइयों पर कथित तौर पर अहमद को धमकाने और बॉन्डी बीच हमले के बाद उन्हें मिली आर्थिक मदद में से कुछ राशि हड़पने या वसूलने की कोशिश करने के आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला अहमद के लिए जुटाई गई बड़ी रकम से जुड़ा हुआ है। हमले के बाद उनके समर्थन में जुटाई गई राशि ने व्यापक सार्वजनिक समर्थन को दिखाया था। अब उनके परिवार से जुड़े कथित विवादों ने मामले को एक नया कानूनी आयाम दे दिया है। इन आरोपों की प्रकृति और अदालत में चल रही अलग कार्यवाही अहमद के खिलाफ बुधवार को वापस लिए गए आरोपों से अलग है। इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के रूप में देखा जा रहा है।
बहादुरी के बाद कानूनी विवादों में घिरे अहमद
अहमद अल अहमद की कहानी ऑस्ट्रेलिया में पिछले वर्ष के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रही है। एक तरफ उन्हें बॉन्डी बीच हमले के दौरान साहस दिखाकर एक हमलावर को रोकने के लिए सम्मान और सार्वजनिक समर्थन मिला, वहीं दूसरी तरफ बाद में उनके निजी जीवन से जुड़े कानूनी विवाद सामने आए।
बुधवार का अदालत का फैसला उनके लिए तत्काल राहत लेकर आया है। हालांकि, 12 महीने का घरेलू हिंसा संरक्षण आदेश उन्हें अपने पिता के साथ संपर्क को लेकर कानूनी सीमाओं का पालन करने के लिए बाध्य करेगा।
ऑस्ट्रेलिया में बॉन्डी बीच हमले की याद अब भी ताजा
बॉन्डी बीच हमला ऑस्ट्रेलिया की हालिया सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी सबसे गंभीर घटनाओं में से एक रहा है। यहूदी समुदाय के कार्यक्रम को निशाना बनाए जाने के कारण इस घटना ने देश में सामुदायिक सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गंभीर बहस छेड़ी थी।
अहमद का हमलावर को रोकने वाला वीडियो हमले की भयावहता के बीच साहस का प्रतीक बन गया था। उनके लिए जुटाई गई बड़ी धनराशि और प्रधानमंत्री की अस्पताल में मुलाकात ने भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अब घरेलू हिंसा मामले में आरोप वापस लिए जाने के बाद अहमद ने शांति और सामान्य जीवन की उम्मीद जताई है। हालांकि, उनके परिवार से जुड़े अन्य कानूनी मामले अभी भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं।











