High Court of Singapore ने शिक्षा-प्रौद्योगिकी कंपनी BYJU'S के संस्थापक Byju Raveendran के खिलाफ अदालत की अवमानना मामले में दी गई छह महीने की सजा पर अस्थायी रोक लगा दी है।
बिजनेस न्यूज़: भारत की प्रमुख एडटेक कंपनी BYJU'S के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) मामले में सुनाई गई छह महीने की जेल की सजा और आत्मसमर्पण के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद रवींद्रन को 15 जून तक आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं होगी, जबकि मामले में उनकी अपील पर आगे सुनवाई जारी रहेगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कभी भारत की सबसे मूल्यवान स्टार्टअप कंपनियों में शामिल BYJU'S वित्तीय और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंगापुर की अदालत का यह फैसला कंपनी और उसके संस्थापक के लिए अस्थायी राहत लेकर आया है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है।
छह महीने की सजा पर लगी रोक
सिंगापुर उच्च न्यायालय ने पहले 25 मई 2026 को बायजू रवींद्रन को अदालत के आदेशों का कथित रूप से पालन नहीं करने के मामले में छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें 15 जून तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश भी दिया था। हालांकि, रवींद्रन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत की सामान्य पीठ ने 10 जून 2026 को गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण से जुड़े निर्देशों पर रोक लगा दी।
इसके साथ ही उनकी सजा फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगी और उन्हें तत्काल जेल नहीं जाना होगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोक अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि अपील पर विचार होने तक दी गई अंतरिम राहत है।
क्या है पूरा मामला?
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यह विवाद BYJU'S में निवेश करने वाली एक निवेशक इकाई से जुड़ा है। मामला कतर निवेश प्राधिकरण (Qatar Investment Authority) की एक सहायक कंपनी द्वारा दायर किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि बायजू रवींद्रन ने कुछ आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने से संबंधित अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया। इसी आधार पर अदालत ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी।
रवींद्रन के वकीलों का कहना है कि यह मामला किसी आपराधिक आरोप या धोखाधड़ी से संबंधित नहीं है, बल्कि दस्तावेजों और खुलासे से जुड़े कानूनी विवाद का हिस्सा है। उन्होंने अवमानना के आदेश के खिलाफ औपचारिक अपील भी दायर कर दी है।
अदालत ने दिए अन्य निर्देश
सजा पर रोक लगाने के बावजूद अदालत ने कुछ अन्य निर्देशों को बरकरार रखा है। इनमें कानूनी खर्च के रूप में 90,000 सिंगापुर डॉलर का भुगतान और सिंगापुर स्थित एक निवेश इकाई में रवींद्रन की हिस्सेदारी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करना शामिल है। इन शर्तों का उद्देश्य मामले की आगे की सुनवाई के दौरान आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है।
बायजू रवींद्रन ने क्या कहा?
अदालत के फैसले के बाद जारी बयान में बायजू रवींद्रन ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं और अपने पक्ष को उचित तरीके से अदालत के समक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी के संस्थापकों ने कथित विवादित राशि का व्यक्तिगत लाभ नहीं उठाया है। उनके अनुसार, उनके परिवार और उन्होंने स्वयं कंपनी में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की निजी पूंजी निवेश की है। रवींद्रन ने यह भी कहा कि विवाद को लेकर गलत धारणा बनाई जा रही है और वह तथ्यों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से स्पष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।









