हिमाचल प्रदेश के चंबा से चिकित्सा लापरवाही से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट में सर्जिकल स्पंज छूट जाने का मामला करीब एक साल बाद सामने आया। लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझने के बाद जब जांच कराई गई तो पेट के अंदर विदेशी वस्तु होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर विचार करते हुए मरीज को 5.12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल होने वाले स्पंज या गॉज का उद्देश्य रक्त और अन्य तरल पदार्थ को सोखना होता है। सामान्य तौर पर सर्जरी समाप्त होने से पहले इस्तेमाल किए गए सभी स्पंज और अन्य सामग्री की गिनती की जाती है, ताकि कोई वस्तु मरीज के शरीर के अंदर न रह जाए। चिकित्सा साहित्य में ऑपरेशन के बाद शरीर के अंदर सर्जिकल स्पंज रह जाने की स्थिति को गॉसिपिबोमा कहा जाता है। ऐसी स्थिति में पेट दर्द, संक्रमण, सूजन और दूसरी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
चंबा के इस मामले में ऑपरेशन के बाद मरीज की परेशानी लंबे समय तक बनी रही। शुरुआत में समस्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। समय बीतने के साथ जब तकलीफ लगातार बनी रही, तब आगे की चिकित्सकीय जांच कराई गई। जांच में पेट के अंदर सर्जरी के दौरान छूटे स्पंज का पता चलने के बाद मामला गंभीर हो गया। परिवार की ओर से संबंधित डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
मामले में यह सवाल भी उठा कि यदि ऑपरेशन के दौरान स्पंज का इस्तेमाल किया गया था तो सर्जरी खत्म होने के बाद उसकी गिनती और अंतिम जांच किस तरह की गई। चिकित्सा मानकों के अनुसार सर्जिकल टीम के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री का हिसाब रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। अदालतों और उपभोक्ता आयोगों के सामने ऐसे मामलों में यह तथ्य महत्वपूर्ण रहा है कि मरीज के शरीर के अंदर सर्जिकल स्पंज का रह जाना एक ऐसी घटना है जिसे उचित सावधानी से रोका जा सकता है।
इस तरह के मामलों में मरीज को केवल शारीरिक परेशानी ही नहीं झेलनी पड़ती, बल्कि लंबे समय तक इलाज, जांच और मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ सकता है। कई मामलों में शरीर के अंदर छूटा स्पंज संक्रमण या अन्य जटिलताएं पैदा कर सकता है और उसे निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन तक की जरूरत पड़ सकती है।
चंबा के मामले में भी करीब एक साल बाद सच्चाई सामने आने से मरीज और उसके परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टरों को मरीज को 5.12 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। यह राशि मरीज को हुई परेशानी और मामले में सामने आई चिकित्सकीय लापरवाही के लिए दी जाने वाली क्षतिपूर्ति से जुड़ी है।
ऐसे मामलों में मुआवजे का उद्देश्य मरीज को हुई आर्थिक और मानसिक परेशानी की भरपाई करना होता है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के कई मामलों में भी ऑपरेशन के बाद शरीर के अंदर सर्जिकल स्पंज पाए जाने को चिकित्सकीय लापरवाही के संदर्भ में देखा गया है। एक मामले में आयोग ने डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजे की राशि निर्धारित की थी।
ऑपरेशन के दौरान किसी विदेशी वस्तु का मरीज के शरीर में रह जाना चिकित्सा व्यवस्था में गंभीर चिंता का विषय माना जाता है। इससे बचने के लिए सर्जरी के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले स्पंज, गॉज, उपकरण और अन्य सामग्री की गिनती की जाती है। खासकर बड़े ऑपरेशन में सर्जिकल टीम के बीच इस प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी होता है। चिकित्सा शोध में भी बताया गया है कि शरीर के अंदर छूटा सर्जिकल स्पंज गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है और कई बार इसका पता काफी देर से चलता है।
चंबा का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ऑपरेशन के बाद समस्या का पता तुरंत नहीं चला और लगभग एक साल बाद पेट के अंदर छूटी वस्तु का राज खुला। अब मुआवजे के आदेश के बाद मरीज को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह मामला अस्पतालों में ऑपरेशन के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं और सर्जिकल सामग्री की गिनती को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।











