महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर चेंबर की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित कर दोनों महान व्यक्तित्वों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। कार्यक्रम में चेंबर से जुड़े पदाधिकारियों, सदस्यों और अन्य लोगों ने महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके जीवन, संघर्ष, विचारों तथा देश के प्रति योगदान को स्मरण किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि दोनों महापुरुषों का जीवन आज भी समाज और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित सदस्यों ने कुछ समय मौन रहकर दोनों महापुरुषों को नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकता जैसे मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने आम लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर देश की आजादी के संघर्ष को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं, लाल बहादुर शास्त्री को सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शास्त्री जी का सार्वजनिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि देश के सर्वोच्च पद पर रहने वाला व्यक्ति भी सादगी और विनम्रता के साथ अपना दायित्व निभा सकता है। उनका जीवन देशसेवा, किसानों और जवानों के प्रति सम्मान तथा कठिन परिस्थितियों में दृढ़ता का संदेश देता है।
चेंबर के सदस्यों ने कहा कि गांधी और शास्त्री जयंती केवल किसी औपचारिक आयोजन तक सीमित रहने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपने सामाजिक और नागरिक दायित्वों पर विचार करने का दिन भी है। महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत तथा शास्त्री जी की ईमानदारी और सादगी आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। समाज में आपसी सहयोग, भाईचारा और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के लिए इन मूल्यों को व्यवहार में उतारना जरूरी है।
कार्यक्रम में स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि गांधी जी ने स्वच्छता को केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा था। आज भी सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और आसपास के लोगों के प्रति जिम्मेदारी निभाना उनके विचारों को व्यवहार में लागू करने का महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है। चेंबर के सदस्यों ने लोगों से अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।
इस मौके पर व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने कहा कि देश के विकास में आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। व्यवसाय से जुड़े लोगों को ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदार व्यवहार को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे न केवल व्यापारिक वातावरण बेहतर होता है, बल्कि समाज में विश्वास की भावना भी मजबूत होती है।
वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी ने जहां सत्य और अहिंसा के माध्यम से सामाजिक एवं राजनीतिक बदलाव का रास्ता दिखाया, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने अपने सार्वजनिक जीवन से सादगी और कर्तव्यपरायणता की मिसाल कायम की। दोनों के जीवन में एक समान बात यह रही कि उन्होंने व्यक्तिगत हित से ऊपर देश और समाज के हित को महत्व दिया। यही कारण है कि पीढ़ियां बदलने के बावजूद उनके विचार आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
चेंबर के सदस्यों ने इस अवसर पर संकल्प लिया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देंगे। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि युवा पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों के जीवन से परिचित कराना जरूरी है। उनके संघर्ष और विचारों से युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा मिल सकती है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। ऐसे में गांधी और शास्त्री के विचार लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से समस्याओं का समाधान खोजने, मेहनत करने, ईमानदारी से अपने दायित्व निभाने और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देते हैं। जयंती समारोह के माध्यम से चेंबर ने दोनों महापुरुषों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके बताए मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
अंत में उपस्थित सदस्यों ने एक-दूसरे को गांधी जयंती और शास्त्री जयंती की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का समापन दोनों महापुरुषों के आदर्शों को याद करते हुए सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निभाने के संकल्प के साथ हुआ। चेंबर परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और उपस्थित लोगों ने महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को नम










