चमोली टनल हादसे में 9 मजदूरों की मौत, पानी-मलबा भरने से रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण

चमोली की निर्माणाधीन टनल में पानी और मलबा भरने से हादसा हुआ। 7 मजदूरों की मौत और कई घायल हुए, जबकि रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

उत्तराखंड के चमोली में पीपलकोटी स्थित निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन के बाद पानी और मलबा भर गया। हादसे में 28 मजदूर फंस गए, जिनमें 9 की मौत हुई और 16 को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी और मलबा भरने से बड़ा हादसा हो गया। चमोली टनल हादसे में 28 मजदूरों के फंसने की सूचना सामने आई, जिनमें 9 की मौत हो गई। राहत और बचाव दलों ने अभियान चलाकर 16 श्रमिकों को बाहर निकाला, जबकि कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

चमोली टनल हादसे में 9 मजदूरों की मौत, पानी और मलबा भरने से रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित

उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन के बाद अचानक पानी और मलबा भर गया। हादसे में 28 मजदूर फंस गए, जिनमें 9 की मौत हो गई। रेस्क्यू टीमों ने 16 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि कुछ श्रमिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

टनल में पानी भरने से रेस्क्यू में आई मुश्किल

घटना के बाद टनल के भीतर बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया था। इसके अलावा किनारों से लगातार पानी रिसने के कारण राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुआ। एनडीआरएफ की टीम ने विशेष उपकरणों की मदद से पानी और मलबे के बीच फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने का प्रयास किया।

हादसे के समय कई मजदूर सुरंग के भीतर मौजूद थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार 28 मजदूर फंस गए थे। रेस्क्यू अभियान के दौरान 16 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि 9 मजदूरों की मौत हो गई।

रेस्क्यू किए गए श्रमिकों का इलाज जारी

बचाए गए मजदूरों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। अधिकारियों के अनुसार कुछ श्रमिकों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है। राहत दलों ने सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार अभियान चलाया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तत्काल मौके पर भेजने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सभी फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और रेस्क्यू किए गए श्रमिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने संभाला मोर्चा

एनडीआरएफ टीम के कमांडर अमृत लाल मीणा के अनुसार सुरंग में पानी का स्तर काफी अधिक था और दोनों तरफ से पानी रिस रहा था। ऐसी परिस्थितियों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना रहा। टीम ने उपलब्ध संसाधनों और विशेष उपकरणों के जरिए अंदर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने का प्रयास किया।

घटना के बाद सुरंग की सुरक्षा और अंदर की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। राहत एजेंसियों की टीमें प्रभावित हिस्से में बचाव कार्य में जुटी रहीं।

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