राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में EVM पर सवाल उठाने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह चार बार इसी प्रणाली से चुनाव जीत चुकी हैं। उनके बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई बहस छिड़ गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने न केवल विपक्षी दलों बल्कि उनकी अपनी पार्टी की लाइन पर भी सवाल खड़े कर दिए। लोकसभा में बोलते हुए सुप्रिया सुले ने साफ कहा कि वह EVM या VVPAT पर कोई सवाल नहीं उठातीं, क्योंकि वह खुद चार बार इसी मशीन के जरिए चुनाव जीतकर संसद पहुंची हैं। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब महाराष्ट्र में विपक्षी दल लगातार EVM पर अविश्वास जता रहे हैं और मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
अपनी ही पार्टी की सोच से अलग नजर आईं सुप्रिया सुले
सुप्रिया सुले का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी के भीतर ही EVM को लेकर अलग रुख देखने को मिला है। पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी के एक विधायक ने EVM के खिलाफ खुलकर आंदोलन किया था। उस समय पार्टी नेतृत्व ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया था। ऐसे में सुप्रिया सुले का संसद में दिया गया बयान उनकी ही पार्टी की उस रणनीति को कमजोर करता नजर आ रहा है, जिसमें EVM पर सवाल उठाकर चुनावी हार की वजह तलाशने की कोशिश की गई थी।
चार बार EVM से जीत का दावा
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान सुप्रिया सुले ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्होंने चार बार EVM के जरिए चुनाव जीता है और इसलिए वह इस प्रणाली पर शक नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि अगर वही मशीन उन्हें जीत दिला रही है, तो उस पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं होगा। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में ईमानदार स्वीकारोक्ति के तौर पर भी देखा जा रहा है, लेकिन साथ ही इसे विपक्षी गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला कदम भी माना जा रहा है।
मालशिरस का मामला
सुप्रिया सुले का बयान उस पृष्ठभूमि में और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, जब याद किया जाए कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद उनकी ही पार्टी के विधायक उत्तमराव जानकर ने मालशिरस सीट पर EVM में हेराफेरी का आरोप लगाया था। उन्होंने मतपत्रों से पुनर्मतदान की मांग को लेकर अपने क्षेत्र में आंदोलन शुरू कर दिया था। इस दौरान उन्होंने प्रशासन की अनुमति के बिना अपने गांव मार्कडवाड़ी में दोबारा मतदान भी करा लिया था। बाद में प्रशासन ने इस मतदान को रद कर दिया और संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया।

उत्तमराव जानकर ने EVM में गड़बड़ी का दावा करते हुए करीब 1,76,000 मतदाताओं के शपथपत्र भी पेश किए थे। उनका कहना था कि EVM के नतीजे वास्तविक जनमत को नहीं दर्शाते। इस आंदोलन ने उस समय महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा शोर मचाया था और विपक्षी दलों ने इसे EVM के खिलाफ एक मजबूत उदाहरण के तौर पर पेश किया था।
शरद पवार का समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सुप्रिया सुले के पिता और राकांपा शरदचंद्र पवार गुट के प्रमुख शरद पवार खुद आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने वहां यह बयान दिया था कि मार्कडवाड़ी गांव के लोगों ने मतपत्रों के जरिए पुनर्मतदान पर विचार कर देश को सही दिशा दिखाई है। शरद पवार ने उस समय EVM को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि मशीन से आने वाले नतीजे कई बार अप्रत्याशित होते हैं और इस प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत है।
शरद पवार के उस बयान और अब सुप्रिया सुले के ताजा बयान के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है। जहां शरद पवार ने EVM पर संदेह जताया था, वहीं सुप्रिया सुले अब उसी EVM का बचाव करती नजर आ रही हैं। यह फर्क न केवल पार्टी के भीतर विचारधारात्मक मतभेद को उजागर करता है, बल्कि विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी के लिए झटका
महाराष्ट्र में राकांपा शरदचंद्र पवार गुट के साथ कांग्रेस और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट भी EVM के विरोध में मुखर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार मतचोरी और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे भी विधानसभा चुनाव में हार के बाद EVM के खिलाफ बयान देते आए हैं। ऐसे में सुप्रिया सुले का EVM के समर्थन में दिया गया बयान सहयोगी दलों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
आने वाले स्थानीय चुनावों पर असर
महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव जल्द घोषित होने वाले हैं। ऐसे में EVM को लेकर विपक्षी दलों की रणनीति पहले से ही चर्चा में थी। सुप्रिया सुले का यह बयान चुनाव से पहले विपक्षी खेमे की एकजुटता को कमजोर कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान विपक्ष के उस नैरेटिव को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसमें चुनावी हार के लिए EVM को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।











