झारखंड के चतरा में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। सदर अंचल क्षेत्र में जमीन के म्यूटेशन के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को एसीबी की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई सदर अंचल के कर्मचारी भवन में दोपहर करीब 12:45 बजे हुई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले मामले का सत्यापन किया और आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई। जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय योजना के तहत कर्मचारी को रिश्वत की रकम दी, वहां पहले से मौजूद एसीबी की टीम ने उसे पकड़ लिया। रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।
मामला जमीन के म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज से जुड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक लेम पंचायत हल्का सात में पदस्थापित राजस्व कर्मचारी सतीश प्रसाद पर एक व्यक्ति से जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। संबंधित व्यक्ति ने इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की शिकायत सही पाए जाने के बाद कर्मचारी को पकड़ने के लिए पूरी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई।
मंगलवार को शिकायतकर्ता पूर्व निर्धारित योजना के तहत रिश्वत की रकम लेकर राजस्व कर्मचारी के पास पहुंचा। जैसे ही सतीश कुमार ने 10 हजार रुपये लिए, एसीबी की टीम ने तत्काल उसे दबोच लिया। कार्रवाई अचानक होने के कारण मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टीम ने रिश्वत की रकम बरामद करने के बाद आरोपी कर्मचारी को हिरासत में लिया और आवश्यक कार्रवाई पूरी की।
एसीबी की इस कार्रवाई से सदर अंचल कार्यालय में भी हड़कंप मच गया। राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारियों के बीच पूरे मामले की चर्चा होने लगी। सरकारी कार्यालयों में जमीन से जुड़े काम कराने के लिए आम लोगों को राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों के संपर्क में रहना पड़ता है। ऐसे में म्यूटेशन जैसे महत्वपूर्ण काम के बदले रिश्वत मांगे जाने का आरोप गंभीर माना जा रहा है।
म्यूटेशन की प्रक्रिया जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में स्वामित्व से संबंधित बदलाव दर्ज करने के लिए की जाती है। जमीन खरीदने, विरासत में मिलने या किसी अन्य वैधानिक तरीके से स्वामित्व बदलने के बाद संबंधित रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया जरूरी होती है। जमीन के दस्तावेजों से जुड़े इस काम में किसी तरह की अनावश्यक देरी या अवैध रकम की मांग आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इसी वजह से इस मामले में शिकायत के बाद एसीबी ने कार्रवाई की।
इस पूरी कार्रवाई में शिकायत के सत्यापन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। एसीबी को शिकायत मिलने के बाद पहले यह सुनिश्चित किया गया कि वास्तव में रिश्वत की मांग की गई है या नहीं। इसके बाद ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई गई। शिकायतकर्ता को तय रकम के साथ कर्मचारी के पास भेजा गया और जैसे ही लेनदेन हुआ, टीम ने मौके पर पहुंचकर गिरफ्तारी कर ली। इस तरह कार्रवाई केवल शिकायत के आधार पर नहीं बल्कि सत्यापन के बाद की गई।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम आरोपी राजस्व कर्मचारी को अपने साथ हजारीबाग ले गई। वहां उससे पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जांच के दौरान एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर सकती है कि म्यूटेशन के इस मामले में रिश्वत की मांग और लेनदेन से जुड़े और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई का मुख्य आधार 10 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है।
इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को लेकर सवाल उठे हैं। जमीन से जुड़े मामलों में लोगों के लिए समय पर काम होना बेहद जरूरी होता है। यदि किसी आवेदक को अपने वैध काम के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़े तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में शिकायत के आधार पर एसीबी जैसी एजेंसी की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।
चतरा में हुई कार्रवाई का असर केवल एक कर्मचारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सदर अंचल में राजस्व से जुड़े काम कराने वाले लोगों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा है। एसीबी की ओर से की गई कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर जांच की जा सकती है और आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप कार्रवाई भी की जा सकती है।
जमीन के म्यूटेशन से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की जांच, संबंधित रिकॉर्ड और आवेदन की प्रक्रिया के बाद राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया जाता है। ऐसे में आवेदक के लिए यह जरूरी होता है कि वह निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और शुल्क के बारे में जानकारी रखे। किसी कर्मचारी द्वारा अतिरिक्त रकम की मांग किए जाने पर उसकी शिकायत संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से की जा सकती है।
एसीबी की टीम द्वारा कर्मचारी को मौके पर ही गिरफ्तार किए जाने के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। जांच के दौरान आरोपी कर्मचारी से पूछताछ की जाएगी और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। इसके बाद केस में आगे की प्रक्रिया तय होगी।
चतरा की यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्व विभाग से जुड़े काम सीधे आम लोगों की जमीन और संपत्ति के रिकॉर्ड से संबंधित होते हैं। म्यूटेशन जैसे काम में पारदर्शिता और समयबद्धता जरूरी है। रिश्वत लेने के आरोप में कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद अब विभागीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर लोगों की नजर रहेगी।
फिलहाल एसीबी ने राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई मंगलवार दोपहर सदर अंचल के कर्मचारी भवन में हुई। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाया था और लेनदेन होते ही कर्मचारी को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे हजारीबाग ले जाया गया है, जहां पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।












