चीन के लिए बढ़ी चुनौती, ताइवान ने टी-डोम डिफेंस सिस्टम किया लॉन्च, जानिए इसकी खासियत

ताइवान ने अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई मल्टी-लेयर डिफेंस प्रणाली ‘टी-डोम’ की घोषणा की है। यह मिसाइल, वायु और साइबर हमलों से सुरक्षा देगा।

ताइवान चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए एक उन्नत मल्टी-लेयर रक्षा प्रणाली ‘टी-डोम’ विकसित कर रहा है। यह मिसाइल, वायु और साइबर हमलों को रोकने में सक्षम होगी। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की शीर्ष प्राथमिकता बताया है।

T-Dome: ताइवान अपनी सुरक्षा क्षमता को पहले से कहीं अधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसी प्रयास के तहत ताइवान एक नई मल्टी-लेयर रक्षा प्रणाली विकसित कर रहा है जिसे ‘टी-डोम’ या Taiwan Dome कहा जा रहा है। यह प्रणाली मिसाइल हमलों, वायु हमलों और साइबर अटैक जैसी व्यापक चुनौतियों से ताइवान की रक्षा करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, टी-डोम के सक्रिय होने के बाद चीन को ताइवान पर हमला करने से पहले गंभीरता से सोचना पड़ेगा। 

राष्ट्रपति लाई चिंग-ते की घोषणा

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने हाल ही में देश की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना टी-डोम की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चीन की ओर से बढ़ते खतरे को देखते हुए इस प्रणाली को तेजी से पूरा करना बेहद जरूरी है। लाई चिंग-ते ने टी-डोम के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा की शीर्ष प्राथमिकता बताया है और इसे आने वाले वर्षों में रक्षा ढांचे का सबसे मजबूत स्तंभ बनाने की योजना पर जोर दिया है। उन्होंने 10 अक्टूबर को टी-डोम से जुड़ी रणनीति का विवरण प्रस्तुत किया, जिसके बाद यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई।

चीन से बढ़ते खतरे की वास्तविकता

ताइवान लगातार चीन की ओर से मिल रही धमकियों का सामना कर रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है और उसे बलपूर्वक शामिल करने की धमकी दे चुका है। इस राजनीतिक और सैन्य तनाव के बीच ताइवान अपनी रक्षा संरचना को आधुनिक बनाने के लिए बड़े निवेश कर रहा है।

सरकार ने अगले कुछ वर्षों में अपने रक्षा बजट में 40 बिलियन डॉलर से अधिक जोड़ने की योजना बनाई है, जिसमें टी-डोम शीर्ष स्थान पर है। इस परियोजना का उद्देश्य ताइवान को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से मिलने वाले किसी भी संभावित हमले के लिए तैयार करना है।

टी-डोम की क्षमता

टी-डोम को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह एक साथ कई तरह के खतरों को संभाल सके। यह प्रणाली चीन के लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों जैसे किसी भी हवाई खतरे से तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगी। साइबर अटैक को रोकने की क्षमता इसे आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाती है। ताइवान टी-डोम को एक ऑल-इन-वन डिफेंस सिस्टम के रूप में तैयार कर रहा है, जिसमें advanced radar, interception technology और real-time alert mechanism का इस्तेमाल होगा।

आयरन डोम से तुलना

टी-डोम की तुलना इजरायल की प्रसिद्ध आयरन डोम प्रणाली से की जा रही है। हालांकि दोनों की भूमिका और उद्देश्य कुछ हद तक समान हैं, लेकिन दायरा अलग है। आयरन डोम मुख्य रूप से कम दूरी की रॉकेट फायर और तोपखाने से आने वाले हमलों को रोकने के लिए विकसित किया गया था। वहीं, ताइवान का टी-डोम इससे कहीं व्यापक खतरे को संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है। ताइपे स्थित सुरक्षा विश्लेषक जे. माइकल कोल ने कहा है कि टी-डोम “खतरों की एक बहुत व्यापक श्रृंखला” को काउंटर करेगा।

2027 तक पूरी प्रणाली तैयार होना चुनौती

हालांकि ताइवान टी-डोम को जल्दी से जल्दी तैयार करना चाहता है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी प्रणाली को 2027 से पहले ऑपरेशनल बनाना लगभग असंभव है। इसका कारण इसका विशाल ढांचा, high-tech requirements और multilayer structure है। इसके बावजूद ताइवान लगातार प्रयास कर रहा है कि अधिकतम हिस्से को जल्द से जल्द सक्रिय किया जा सके ताकि चीन से मिल रहे खतरे को कम किया जा सके।

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