दिव्या दत्ता ने चिरैया वेब सीरीज में मैरिटल रेप जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दमदार भूमिका निभाई है। उनके अभिनय और किरदार की गहराई ने दर्शकों को प्रभावित किया और इस गंभीर विषय पर चर्चा को बढ़ावा दिया।
Web Series: Divya Dutta इन दिनों जियोहॉटस्टार की वेब सीरीज Chiraiya को लेकर चर्चा में हैं। इस सीरीज में उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को उठाया है, जिस पर आमतौर पर खुलकर बात नहीं होती। मैरिटल रेप जैसे गंभीर विषय को कहानी के जरिए सामने लाया गया है, जिसमें दिव्या का किरदार एक ऐसी महिला का है जो सामाजिक बंधनों में बंधी हुई है और धीरे-धीरे सही-गलत को समझने की कोशिश करती है।
बचपन से लेकर अब तक का सफर
दिव्या दत्ता ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी जिंदगी हमेशा से ऐसी नहीं रही जैसी उनके किरदारों में दिखती है। वह कहती हैं कि बचपन में वह बहुत शर्मीली थीं और अपनी मां के दुपट्टे को पकड़कर उनके पीछे खड़ी रहती थीं। उनकी दुनिया बहुत सीमित और सुरक्षित थी, जहां उन्हें जिंदगी की मुश्किलों का सामना करना नहीं आता था।
समय के साथ उनकी मां ने उन्हें आगे बढ़ना सिखाया और जीवन को समझने का नजरिया दिया। जब उनकी मां इस दुनिया में नहीं रहीं, तब उन्हें खुद को संभालना पड़ा। यही वह समय था जब उन्होंने खुद पर भरोसा करना सीखा और मजबूत बनना शुरू किया।
सख्त महिला की बनी छवि
दिव्या दत्ता ने बताया कि लगातार मजबूत किरदार निभाने की वजह से उनकी एक अलग छवि बन गई है। लोग उन्हें एक सख्त महिला के रूप में देखने लगे हैं। कई बार ऐसा होता है कि लोग उनसे बात करने में भी हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वह बहुत मजबूत और गंभीर हैं।
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वह इस बात को सहज तरीके से स्वीकार करती हैं और कहती हैं कि यह उनके निभाए गए किरदारों का असर है। हालांकि, वह खुद को एक सामान्य इंसान मानती हैं, जो भावनाओं को समझती है और रिश्तों को महत्व देती है।
‘चिरैया’ में निभाया अलग किरदार
इस वेब सीरीज में दिव्या एक ऐसी महिला का किरदार निभा रही हैं, जो सामाजिक दायरों में बंधी हुई है। उसे सही और गलत के बीच फर्क समझने में समय लगता है, लेकिन जब कोई उसे बिना दबाव के समझाता है, तो वह बात समझ भी जाती है।
वह बताती हैं कि अगर किसी को उसके नजरिए को समझते हुए ईमानदारी से समझाया जाए, तो वह अपनी सोच में बदलाव ला सकता है। यह किरदार इसी सोच को दर्शाता है कि हर इंसान धीरे-धीरे अपनी समझ विकसित करता है।
कॉमेडी फिल्मों की इच्छा
दिव्या दत्ता ने यह भी कहा कि अब वह कॉमेडी फिल्मों में काम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि एक कलाकार के लिए अलग-अलग तरह के किरदार निभाना जरूरी होता है। लगातार गंभीर भूमिकाएं निभाने के बाद अब वह कुछ हल्का और अलग करना चाहती हैं। वह बताती हैं कि सेट पर लोगों से घुलने-मिलने में उन्हें थोड़ा समय लगता है, लेकिन एक बार जुड़ने के बाद वह खुलकर काम करती हैं।
अभिनय को लेकर उनका नजरिया
दिव्या दत्ता का कहना है कि अभिनय कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे सिर्फ सीखा जा सके, बल्कि इसे महसूस करना पड़ता है। हर कलाकार अपनी सोच और समझ के अनुसार काम करता है, चाहे वह सही हो या गलत।
वह बताती हैं कि इस शो की कहानी अच्छी तरह लिखी गई है और निर्देशक ने उन्हें हर कदम पर सही दिशा दी। कई बार वह अपने काम को मॉनिटर पर देखने की बजाय निर्देशक के चेहरे से समझ जाती थीं कि उनका शॉट सही है या नहीं। उनका मानना है कि अभिनय में कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसे पूरी तरह महसूस करना पड़ता है और उसी के आधार पर स्क्रीन पर प्रस्तुत करना होता है।
जीवन से मिली सीख
दिव्या दत्ता ने अपनी मां की बातों को याद करते हुए बताया कि उनकी मां हमेशा कहती थीं कि जिंदगी जैसी है, उसे वैसे ही अपनाना चाहिए। हालांकि, वह खुद को थोड़ा बगावती मानती हैं और पहले इस बात को मानने से इंकार करती थीं।
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समय के साथ उन्होंने यह समझा कि किसी भी स्थिति को पहले स्वीकार करना जरूरी होता है, उसके बाद ही उस पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए। यह समझ उन्हें धीरे-धीरे अनुभव के साथ मिली है।
असुरक्षा की भावना पर बात
दिव्या दत्ता ने यह भी बताया कि हर इंसान की तरह वह भी कभी-कभी असुरक्षित महसूस करती हैं। हालांकि, अभिनय के क्षेत्र में वह इसे अलग तरीके से देखती हैं। अगर वह किसी बेहतर कलाकार को देखती हैं, तो उससे सीखने की कोशिश करती हैं और खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करती हैं। वह मानती हैं कि हर किसी को अपने आसपास के लोगों की अच्छाइयों को स्वीकार करना चाहिए और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। वह कहती हैं कि उनकी प्रतिस्पर्धा किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है। उनका लक्ष्य हर दिन खुद को बेहतर बनाना है।
सीखते रहने की सोच
दिव्या दत्ता का कहना है कि अगर कोई कलाकार यह सोच ले कि उसे सब कुछ आता है, तो वहीं से उसकी प्रगति रुक जाती है। वह हमेशा सीखने की कोशिश करती हैं और अपने से ज्यादा जानकार लोगों से प्रेरणा लेती हैं। वह मानती हैं कि सीखना कभी खत्म नहीं होना चाहिए और यही एक कलाकार को बेहतर बनाता है।
रिश्तों और अनुभवों से मिली समझ
दिव्या बताती हैं कि वह अपने आसपास के लोगों से बहुत कुछ सीखती हैं। उनके अनुसार, जीवन में हर अनुभव कुछ नया सिखाता है और उसी से इंसान आगे बढ़ता है। वह कहती हैं कि कई बार वह छोटी-छोटी बातों को लेकर भी असुरक्षित महसूस करती हैं, जैसे कोई दोस्त उनसे बात क्यों नहीं कर रहा। लेकिन फिर वह खुद को समझाती हैं और अपने विचारों को संतुलित करती हैं।








