जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन 33वें दिन भी जारी, रिहा हुए हिरासत में लिए गए समर्थक; सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बरकरार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन 33वें दिन भी जारी है। हिरासत मे लिए गए समर्थकों की रिहाई, FIR, विपक्ष के समर्थन और सरकार से गतिरोध की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन 33वें दिन भी जारी है। हिरासत में लिए गए सभी समर्थकों की रिहाई के बाद पुलिस मुख्यालय का धरना समाप्त हुआ, जबकि आंदोलन स्थल पर हजारों लोग अब भी डटे हैं और सरकार से मांगें पूरी करने की मांग कर रहे हैं।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा प्रदर्शन बुधवार को 33वें दिन भी जारी रहा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार तीसरी रात हजारों प्रदर्शनकारी डटे रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। वहीं, संगठन ने दावा किया कि संसद मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए सभी समर्थकों को रिहा कर दिया गया है। इसके बाद दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर चल रहा धरना समाप्त कर दिया गया।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राज्यों से पहुंचे समर्थक मौजूद रहे। इनमें वे लोग भी शामिल थे जो 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने पूरी रात खुले आसमान के नीचे बिताई और बुधवार सुबह भी जंतर-मंतर पर डटे रहे।

संसद मार्च के बाद बढ़ा राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव

20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य पुलिस कार्रवाई में कई लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद से आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अब संगठन सरकार से संपर्क नहीं करेगा। उनका कहना है कि यदि बातचीत करनी है तो सरकार को स्वयं जंतर-मंतर आकर प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए। संगठन का दावा है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता।

हिरासत में लिए गए सभी समर्थकों की रिहाई का दावा

संगठन ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि संसद मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया है। इसी के बाद दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जारी धरना समाप्त करने का फैसला लिया गया।

हालांकि, जंतर-मंतर पर मुख्य प्रदर्शन जारी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी आंदोलन स्थल पर मौजूद हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपनी मूल मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे।

सोनम वांगचुक से मुलाकात को लेकर बढ़ी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।

हालांकि, इस मुलाकात को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वांगचुक के स्वास्थ्य और उनकी मांगों पर भी स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए।

पुलिस ने दर्ज की FIR

दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान पर कथित हमले के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, वायरल वीडियो में कुछ लोगों को RAF कर्मियों के साथ मारपीट करते, सरकारी वाहन पर पथराव और तोड़फोड़ करते हुए देखा गया है।

जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन 33वें दिन भी जारी, रिहा हुए हिरासत में लिए गए समर्थक; सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बरकरार

पुलिस मामले की जांच कर रही है और वीडियो फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

CJP ने सरकार पर लगाया बातचीत में देरी का आरोप

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को सरकार ने बातचीत के लिए बुलाने के बावजूद उन्हें कई घंटे तक इंतजार कराया। उनका कहना है कि उन्हें और संगठन के अन्य प्रतिनिधियों को फोन इस्तेमाल करने की भी अनुमति नहीं दी गई।

रांका के अनुसार, सरकार के साथ हुई बैठक में संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखीं—सोनम वांगचुक को स्वतंत्र रूप से इलाज और आंदोलन जारी रखने की अनुमति, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तथा कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता। सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।

विपक्षी नेताओं ने आंदोलन को दिया समर्थन

जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन में कई विपक्षी दलों के नेता पहुंचे। इनमें उद्धव ठाकरे, शरद पवार, सुप्रिया सुले, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और महुआ मोइत्रा सहित कई प्रमुख नेता शामिल रहे।

उद्धव ठाकरे ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए युवाओं के समर्थन की बात कही और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। वहीं महुआ मोइत्रा ने भी आंदोलन स्थल से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी पीछे हटने वाले नहीं हैं। विपक्षी दलों की बढ़ती मौजूदगी के बाद यह आंदोलन अब केवल छात्र आंदोलन न रहकर व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है।

घायल प्रदर्शनकारियों की स्थिति पर चिंता

आंदोलन से जुड़े कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। कुछ छात्र संगठनों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में घायल हुए कई प्रदर्शनकारियों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि सभी मामलों में नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अस्पतालों की ओर से समय-समय पर चिकित्सकीय जानकारी साझा की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई

दिल्ली पुलिस ने संसद भवन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। रफी मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग की गई है तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से की गई है।

आगे क्या?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की संभावना पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल संगठन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता। दूसरी ओर, पुलिस संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों की जांच आगे बढ़ा रही है। ऐसे में यह आंदोलन राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर आने वाले दिनों में भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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