CPI(ML) और कांग्रेस में बढ़ा तनाव: झारखंड राज्यसभा चुनाव के बाद खड़गे को लिखी चिट्ठी में दीपांकर भट्टाचार्य ने जताई नाराजगी

झारखंड राज्यसभा चुनाव के बाद CPI(ML) और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। दीपांकर भट्टाचार्य ने मल्लिकार्जुन खड़गे को चिट्ठी लिखकर नाराजगी जताई।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार Pranav Jha की हार के बाद Indian National Developmental Inclusive Alliance (I.N.D.I.A.) गठबंधन के भीतर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। चुनाव परिणाम के बाद सहयोगी दलों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगाए जाने से राजनीतिक विवाद गहरा गया है।

नई दिल्ली: झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं बदले, बल्कि विपक्षी I.N.D.I.A. गठबंधन के भीतर भी नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद सहयोगी दलों पर लगाए गए क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने गठबंधन में तनाव बढ़ा दिया है। इस विवाद के बीच CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर अपनी पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया और आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई।

दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस नेताओं द्वारा CPI(ML) विधायकों पर लगाए गए आरोपों को "झूठा, निराधार और दुर्भावनापूर्ण" बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने गठबंधन धर्म का पूरी तरह पालन किया है।

कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन का दावा

अपने पत्र में दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि CPI(ML) लिबरेशन I.N.D.I.A. गठबंधन की एक प्रतिबद्ध सहयोगी पार्टी है और उसने राज्यसभा चुनाव में विपक्ष की साझा रणनीति का पालन किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया था। इतना ही नहीं, मतदान से पहले पार्टी के अधिकृत पोलिंग एजेंटों ने दोनों वोटों की पुष्टि भी की थी।

भट्टाचार्य के अनुसार, उनकी पार्टी पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाने का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। CPI(ML) ने आरोप लगाया कि उसकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पत्र में कहा गया कि पार्टी ने बिहार और झारखंड सहित कई राज्यों में राज्यसभा चुनावों के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों का लगातार समर्थन किया है।

दीपांकर भट्टाचार्य ने लिखा कि कांग्रेस उम्मीदवार की हार के लिए उनकी पार्टी को जिम्मेदार ठहराना वास्तविक तथ्यों से ध्यान हटाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि बिना किसी जांच या प्रमाण के ऐसे आरोप लगाना सहयोगी दलों के बीच विश्वास को कमजोर करता है और गठबंधन की एकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

कांग्रेस नेतृत्व से की हस्तक्षेप की मांग

पत्र में CPI(ML) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से अपील की कि वे पार्टी नेताओं को सहयोगी दलों के खिलाफ बिना सबूत आरोप लगाने से रोकें। भट्टाचार्य का कहना है कि गठबंधन की मजबूती आपसी सम्मान और विश्वास पर निर्भर करती है। यदि सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जाएंगे, तो इसका असर भविष्य के राजनीतिक सहयोग पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी हार के कारणों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, न कि सहयोगी दलों को दोषी ठहराया जाए।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

CPI(ML) और कांग्रेस में बढ़ा तनाव: झारखंड राज्यसभा चुनाव के बाद खड़गे को लिखी चिट्ठी में दीपांकर भट्टाचार्य ने जताई नाराजगी

झारखंड राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया था कि गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों ने पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं किया। झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने कथित तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और CPI(ML) लिबरेशन पर कांग्रेस उम्मीदवार को पूरा समर्थन नहीं देने का आरोप लगाया था। 

इसके बाद CPI(ML) ने तत्काल इन आरोपों का खंडन किया और स्पष्ट किया कि उसके दोनों विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला था। पार्टी ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस अपने सभी विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने में सफल नहीं रही।

राज्यसभा चुनाव के नतीजे

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में राजनीतिक मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। चुनाव परिणामों के अनुसार, NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने एक सीट पर जीत दर्ज की। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम दूसरी सीट जीतने में सफल रहे। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। मतगणना के अनुसार:

  • परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले।
  • बैद्यनाथ राम को 30 वोट प्राप्त हुए।
  • कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले।

कुल तीन मत अमान्य घोषित किए गए, जिनमें भाजपा के दो और कांग्रेस का एक वोट शामिल था। झारखंड विधानसभा में I.N.D.I.A. गठबंधन के पास बहुमत होने के बावजूद राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गठबंधन के घटक दलों के बीच क्रॉस वोटिंग के आरोप और सार्वजनिक बयानबाजी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

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