पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उथल-पुथल लगातार बढ़ती नजर आ रही है। हालिया चुनावी झटकों के बाद पार्टी को एक और बड़ा नुकसान तब हुआ, जब वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक तथा सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
कोलकाता: All India Trinamool Congress (टीएमसी) में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इनमें पूर्व राज्य मंत्री Jyotipriya Mallick और Gautam Deb, जो सिलीगुड़ी के मेयर भी हैं, शामिल हैं।
इन इस्तीफों के बाद तृणमूल कांग्रेस में चल रहे आंतरिक मतभेदों और संगठनात्मक चुनौतियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इस्तीफों के पीछे के कारणों पर अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन इसे पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
ज्योति प्रिय मल्लिक ने स्वास्थ्य कारणों से छोड़ी जिम्मेदारियां
टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देते हुए अपनी खराब सेहत को इसकी वजह बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसके कारण संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना कठिन हो गया है।
मल्लिक ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से नहीं निभा सकता, तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। खास बात यह है कि कुछ समय पहले ही पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी।
लंबा राजनीतिक सफर और विवादों से नाता
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ज्योति प्रिय मल्लिक पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। वे पांच बार विधायक चुने गए और उत्तर 24 परगना जिले में टीएमसी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में लंबा कार्यकाल संभाला और बाद में वन मंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। कथित राशन वितरण घोटाले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद वे लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करते रहे।
हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें अपने पारंपरिक राजनीतिक क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा, जिसे राजनीतिक विश्लेषक टीएमसी के लिए बड़ा झटका मानते हैं।
गौतम देब ने भी छोड़ा मेयर पद
टीएमसी के लिए दूसरा बड़ा झटका तब लगा जब सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देब ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संबंधित अधिकारियों को सौंपने के साथ ही सरकारी सुविधाओं का उपयोग भी बंद कर दिया। उत्तर बंगाल की राजनीति में गौतम देब का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। उनके इस्तीफे ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर बदलाव का दौर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
हाल के चुनावी परिणामों ने टीएमसी के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पार्टी को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिसके बाद संगठन के भीतर आत्ममंथन का दौर शुरू हुआ। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनावी प्रदर्शन का असर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है कि पार्टी को अपने संगठन और रणनीति में व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं।









