बिहार के दरभंगा में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक इंजीनियर डेटिंग वेबसाइट के जरिए शुरू हुए ऑनलाइन रिश्ते के चक्कर में करीब डेढ़ करोड़ रुपये गंवा बैठा। आरोप है कि साइबर ठगों ने पहले इंजीनियर से दोस्ती की और धीरे-धीरे उसका भरोसा जीत लिया। इसके बाद उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। इंजीनियर को इस तरह निवेश के जाल में फंसाया गया कि उसने एक महीने के भीतर 35 अलग-अलग बैंक खातों में 65 बार पैसे ट्रांसफर कर दिए। जब तक उसे ठगी का एहसास हुआ, तब तक बड़ी रकम उसके हाथ से निकल चुकी थी।
जानकारी के मुताबिक, इंजीनियर की मुलाकात एक डेटिंग वेबसाइट के माध्यम से एक व्यक्ति से हुई थी। बातचीत का सिलसिला शुरू होने के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। ऑनलाइन बातचीत के दौरान सामने वाले ने इंजीनियर का विश्वास हासिल किया। इसके बाद उसे ट्रेडिंग और निवेश के बारे में बताया जाने लगा। उसे समझाया गया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पैसा लगाकर कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
शुरुआत में निवेश को आकर्षक तरीके से पेश किया गया। ठगी करने वालों ने इंजीनियर को भरोसा दिलाया कि ट्रेडिंग में पैसा लगाने से उसकी कमाई बढ़ सकती है। इसी भरोसे में आकर इंजीनियर ने निवेश करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उससे अधिक रकम जमा कराने के लिए कहा जाने लगा। हर बार उसे मुनाफे का लालच दिया जाता और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजने के लिए कहा जाता था।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महज एक महीने के दौरान इंजीनियर से 35 बैंक खातों में 65 बार ट्रांजेक्शन कराया गया। इतनी बड़ी संख्या में अलग-अलग खातों में रकम भेजे जाने के बावजूद उसे शुरुआत में ठगी का अंदाजा नहीं हुआ। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर उससे लगातार पैसे जमा कराए। कुल मिलाकर इंजीनियर के करीब डेढ़ करोड़ रुपये ठगी की भेंट चढ़ गए।
साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर पहले पीड़ित से दोस्ती करते हैं और फिर भावनात्मक भरोसे का इस्तेमाल करके उसे आर्थिक जाल में फंसाते हैं। डेटिंग वेबसाइट, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क बनाने के बाद निवेश का प्रस्ताव दिया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम लगवाकर भरोसा जीतने की कोशिश की जाती है। इसके बाद बड़े मुनाफे का लालच देकर अधिक पैसे जमा कराने को कहा जाता है। कई मामलों में फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर मुनाफा दिखाकर पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि उसका निवेश बढ़ रहा है।
दरभंगा के इस मामले में भी इंजीनियर को ट्रेडिंग के नाम पर लगातार रकम भेजने के लिए प्रेरित किया गया। 35 बैंक खातों में 65 बार लेनदेन होने की जानकारी से इस ठगी के संगठित तरीके से किए जाने की आशंका सामने आती है। अलग-अलग खातों का इस्तेमाल करके रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे के वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यह घटना ऑनलाइन दोस्ती और निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी को लेकर लोगों के लिए चेतावनी है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर किसी ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले संबंधित कंपनी और प्लेटफॉर्म की वैधता की जांच करना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति के बताए बैंक खाते में बिना सत्यापन के रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। खासकर डेटिंग वेबसाइट या सोशल मीडिया पर बने नए रिश्तों के जरिए मिलने वाले निवेश प्रस्तावों से सावधान रहने की जरूरत है।
फिलहाल इस मामले में डेढ़ करोड़ रुपये की कथित ठगी और 35 बैंक खातों में हुए 65 ट्रांजेक्शन जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। ठगी में इस्तेमाल किए गए खातों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान होने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।









