दौसा के बसवा क्षेत्र में बुजुर्ग महिला से चांदी के कड़े काटकर लूट करने वाले तीन आरोपियों को कोर्ट में पेशी के दौरान वकील ने थप्पड़ मारे। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद बार काउंसिल ने उनकी पैरवी न करने का फैसला लिया।
दौसा:राजस्थान के दौसा जिले के बसवा थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला से चांदी के कड़े लूटने के मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस केस में गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेशी के दौरान एक वकील द्वारा कथित रूप से थप्पड़ मारने की घटना सामने आई है, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी वायरल बताया जा रहा है। इस घटना के बाद न्यायिक और कानूनी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले में जहां पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं कोर्ट परिसर में हुई इस कथित मारपीट ने पूरे सिस्टम को चर्चा में ला दिया है।
कोर्ट परिसर में आरोपी पर हमला, CCTV फुटेज वायरल
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जा रहा था। इसी दौरान एक वकील ने एक आरोपी को थप्पड़ मार दिए। घटना का वीडियो सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है।
इस घटना के बाद कानून व्यवस्था और कोर्ट परिसर में अनुशासन को लेकर गंभीर बहस शुरू हो गई है। हालांकि अभी तक संबंधित वकील की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला: आरोपियों की पैरवी से इनकार
इस घटना के बाद बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। बार काउंसिल अध्यक्ष सचिदानंद मिश्रा ने बताया कि वकीलों की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि इस मामले में आरोपियों की अदालत में कोई भी वकील पैरवी नहीं करेगा।
इस फैसले को लेकर कानूनी समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे पीड़ित के प्रति भावनात्मक प्रतिक्रिया मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाला कदम बता रहे हैं।
मामला क्या है: 80 वर्षीय महिला से चांदी के कड़े लूटे गए
यह पूरी घटना बुधवार दोपहर करीब 3 बजे की बताई जा रही है, जब 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला मनफूली योगी अपने घर के आंगन में चारपाई पर सो रही थीं। इसी दौरान बाइक पर सवार होकर आए तीन बदमाश घर में घुसे।
आरोप है कि बदमाश पानी पीने के बहाने घर में दाखिल हुए और जैसे ही महिला उठीं, उन्होंने उनका मुंह दबाकर उन्हें घर के अंदर ले जाकर बंधक बना लिया।
इसके बाद बदमाशों ने इलेक्ट्रिक ग्राइंडर मशीन का उपयोग कर महिला के बाएं पैर में पहना करीब 500 ग्राम वजन का चांदी का कड़ा काट लिया।

हमले के दौरान महिला घायल, परिवार में नहीं था कोई सदस्य
घटना के दौरान महिला के दूसरे पैर के कड़े को भी काटने की कोशिश की गई, लेकिन उसी समय घर में परिवार की एक सदस्य अचानक पहुंच गई। उसे देखकर बदमाश मौके से भाग गए और केवल एक कड़ा लेकर फरार हो गए।
इस हमले में बुजुर्ग महिला के पैर में गंभीर चोट आई है। घटना के समय घर में अन्य परिजन मौजूद नहीं थे—बड़ा बेटा अपनी चाय की दुकान पर था, जबकि छोटा बेटा काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था।
परिवार की बहू भी उस समय बकरियां चराने के लिए घर से बाहर थी, जिसके कारण आरोपी आसानी से वारदात को अंजाम देने में सफल हो गए।
पुलिस कार्रवाई: तीन आरोपी गिरफ्तार, रिमांड पर भेजे गए
बसवा थाना प्रभारी हनुमान सहाय ने बताया कि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो वयस्क और एक किशोर शामिल बताया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार बताई गई है:
- महेश प्रजापत (गुढाकटला निवासी)
- देवाराम प्रजापत (महवा के रूदकानगला निवासी)
- एक बाल अपचारी
पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 18 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।
आरोपियों की गिरफ्तारी कैसे हुई
पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपी पास के मुही गांव के जंगलों में छिप गए थे। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार किया। इस ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस और तकनीकी निगरानी की मदद ली गई।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों से लूटी गई संपत्ति और वारदात में इस्तेमाल किए गए उपकरणों की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
न्याय व्यवस्था पर सवाल और बहस तेज
कोर्ट परिसर में वकील द्वारा आरोपी को थप्पड़ मारने की घटना ने न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता और आचरण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत परिसर में किसी भी प्रकार की हिंसा कानून के शासन के सिद्धांत के खिलाफ है।
दूसरी ओर, स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गुस्सा भी देखा जा रहा है, क्योंकि मामला एक बुजुर्ग महिला पर हुए अत्याचार से जुड़ा है।
सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चाहे आरोपी कितना भी गंभीर अपराधी क्यों न हो, न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की मारपीट या दबाव स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में केवल कानून और अदालत ही निर्णय ले सकती है।
इस घटना के बाद अब यह भी चर्चा में है कि क्या वकील के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और क्या बार एसोसिएशन का पैरवी से इनकार करने का निर्णय कानूनी रूप से उचित है।












