कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ किसी भी तरह के सत्ता संघर्ष की अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता मिलकर जनता की सेवा कर रहे हैं और उनकी ताकत कांग्रेस के गठबंधन वाले सभी विधायकों से है।
बेंगलुरु: कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कथित सत्ता संघर्ष की अटकलों के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री ने बीजेपी को कड़ा संदेश दिया है। डीके शिवकुमार ने साफ शब्दों में कहा कि उनके और मुख्यमंत्री के बीच कोई मतभेद नहीं है और दोनों नेता मिलकर राज्य की जनता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक ताकत कांग्रेस के सभी सहयोगी विधायकों से आती है, जिनमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी शामिल हैं।
शिवकुमार का यह बयान तब आया जब विपक्ष के नेता और बीजेपी विधायक आर. अशोक ने राज्य सरकार के भीतर गुटबाजी और खेमेबंदी के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है और बड़ी संख्या में विधायक उपमुख्यमंत्री के पक्ष में हैं।
हर संकट में सिद्धारमैया के साथ खड़ा रहा हूं - डीके शिवकुमार
डीके शिवकुमार ने विधानसभा में अपने बयान में जोर देकर कहा कि वे हर मुश्किल समय में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि संकट के समय में सिद्धारमैया ने भी उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा, “हम दोनों का उद्देश्य सत्ता संघर्ष नहीं, बल्कि कर्नाटक के लोगों की सेवा करना है। हमारी ताकत कांग्रेस गठबंधन के सभी विधायकों में है, न कि किसी व्यक्तिगत खेमे में।”
बीजेपी विधायक आर. अशोक ने इससे पहले दावा किया था कि कम से कम 56 कांग्रेस विधायक डीके शिवकुमार का समर्थन करने के लिए तैयार हैं और हर सुबह उनके खेमे में जाते हैं, जबकि शाम तक मुख्यमंत्री के खेमे में लौट जाते हैं।
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नेतृत्व का फैसला आलाकमान करता है: शिवकुमार
बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस में नेतृत्व तय करने का अधिकार पार्टी आलाकमान के पास है, न कि कुछ विधायकों के पास। उन्होंने कहा कि कुछ विधायकों का समर्थन किसी भी राजनीतिक परिणाम को तय नहीं कर सकता। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह पार्टी खुद कर्नाटक में कई बार मुख्यमंत्री बदल चुकी है और बड़े पैमाने पर कैबिनेट फेरबदल कर चुकी है। ऐसे में कांग्रेस पर गुटबाजी का आरोप लगाना उचित नहीं है।
आर. अशोक ने शिवकुमार से पिछले महीने दिए गए उनके भाषणों, बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर स्पष्टीकरण मांगा था। उनका कहना था कि इन पोस्ट्स से कई तरह के राजनीतिक संकेत मिलते हैं। इस पर शिवकुमार ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट्स की अलग-अलग तरह से व्याख्या की जा सकती है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “कुछ ट्वीट हमारे कार्यालय से होते हैं, कुछ आपके कार्यालय से भी होते हैं। हर पोस्ट का राजनीतिक अर्थ निकालना सही नहीं है।”
संतोष लाड को लेकर गरमागरम बहस
बहस के दौरान बीजेपी नेता आर. अशोक ने यह भी दावा किया कि श्रम मंत्री संतोष लाड मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच ‘झूलते’ रहते हैं। इस टिप्पणी पर संतोष लाड ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि वे किसी खेमे के समर्थक नहीं हैं। लाड ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी सरकारें गिराने में माहिर है, जबकि कांग्रेस विकास की राजनीति में विश्वास करती है।
आर. अशोक ने जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी कभी भी सरकार गिराने की कोशिश नहीं करेगी और अगर कांग्रेस सरकार गिरेगी तो वह पार्टी के आंतरिक सत्ता संघर्ष के कारण ही गिरेगी।










