फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के काम के तय घंटों को लेकर बहस पिछले वर्ष तब तेज हो गई थी, जब अभिनेत्री Deepika Padukone के ‘स्पिरिट’ और Kalki 2898 AD से बाहर होने की खबरें सामने आई थीं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: भारतीय फिल्म अभिनेत्री Dia Mirza ने हाल ही में अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए मनोरंजन उद्योग में नए कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के बाद उन्हें लंबे समय तक लगातार काम करना पड़ता था और कई बार परिस्थितियां इतनी कठिन होती थीं कि उन्हें बिना पूरी स्क्रिप्ट के भी फिल्मों के लिए हामी भरनी पड़ती थी।
दीया का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक फिल्म उद्योग में कलाकारों के कार्य घंटे, कार्यस्थल की परिस्थितियां और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो रही है। मनोरंजन जगत में काम के संतुलित घंटों और पेशेवर वातावरण को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है।
नई अभिनेत्री होने के कारण मिलीं कई चुनौतियां
एक बातचीत के दौरान दीया मिर्जा ने बताया कि जब उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा, तब उन्हें वह प्रशिक्षण और तैयारी नहीं मिली जो आज कई नए कलाकारों को उपलब्ध होती है। उन्होंने कहा कि कई कलाकारों को लॉन्च करने से पहले अभिनय कार्यशालाएं, डांस ट्रेनिंग और पेशेवर मार्गदर्शन दिया जाता है, लेकिन उनके साथ ऐसा नहीं हुआ।
उन्हें सीधे फिल्मों की शूटिंग में शामिल कर दिया गया, जहां सीखने और प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी एक साथ निभानी पड़ती थी। अभिनेत्री के अनुसार, उस दौर में नए कलाकारों से अपेक्षा की जाती थी कि वे काम करते हुए ही सब कुछ सीखें और तेजी से खुद को साबित करें।
लगातार 27 से 28 घंटे तक काम करने का अनुभव
दीया मिर्जा ने अपने शुरुआती फिल्मी सफर का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार उनका कार्य कार्यक्रम इतना व्यस्त होता था कि उन्हें लगातार 27 से 28 घंटे तक काम करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि एक साथ कई फिल्मों में काम करने के कारण उनका अधिकांश समय शूटिंग सेट पर ही गुजरता था। लंबे कार्य घंटों के बावजूद उनसे लगातार ऊर्जा, एकाग्रता और पेशेवर प्रदर्शन की अपेक्षा की जाती थी।
दीया ने कहा कि उस दौर की मेहनत ने उन्हें मानसिक और पेशेवर रूप से मजबूत बनाया, हालांकि आज के नजरिए से देखें तो इतने लंबे कार्य घंटे किसी भी कलाकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाएंगे।
स्क्रिप्ट के बिना फिल्मों के लिए हां कहना पड़ता था
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अभिनेत्री ने यह भी खुलासा किया कि कई बार उन्हें फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट पढ़ने का अवसर नहीं मिलता था। अक्सर कहानी का संक्षिप्त विवरण सुनाकर उन्हें परियोजना से जुड़ने के लिए कहा जाता था। उन्होंने बताया कि नए कलाकारों के पास उस समय विकल्प सीमित होते थे और करियर की शुरुआत में अवसरों को ठुकराना आसान नहीं था। यही कारण था कि कई बार उन्हें केवल विश्वास और उम्मीद के आधार पर फिल्में स्वीकार करनी पड़ती थीं।
यह अनुभव आज के समय से काफी अलग माना जाता है, जहां कलाकार स्क्रिप्ट, अनुबंध और कार्य परिस्थितियों को लेकर पहले से अधिक जागरूक और सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
‘रहना है तेरे दिल में’ से मिली पहचान
दीया मिर्जा ने वर्ष 2001 में रोमांटिक फिल्म Rehnaa Hai Terre Dil Mein से अभिनय की दुनिया में प्रवेश किया था। इस फिल्म में उनके साथ R. Madhavan और Saif Ali Khan प्रमुख भूमिकाओं में दिखाई दिए थे। हालांकि फिल्म को शुरुआती दौर में सीमित व्यावसायिक सफलता मिली थी, लेकिन समय के साथ यह एक कल्ट क्लासिक के रूप में लोकप्रिय हुई और दीया मिर्जा को व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हुई।
उनके सहज अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस की उस समय भी काफी सराहना की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में फिल्म उद्योग में कार्य संस्कृति को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। कलाकारों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां, निर्धारित कार्य घंटे और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
आगामी परियोजना को लेकर उत्साहित हैं दीया
करियर के नए चरण में प्रवेश कर चुकी दीया मिर्जा अब विभिन्न प्रकार की फिल्मों और डिजिटल प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन रही हैं। उनकी आगामी फिल्म Ikkis को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है। इस परियोजना में उनके साथ कई अनुभवी कलाकार भी नजर आएंगे। फिल्म एक महत्वपूर्ण कानूनी संघर्ष की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है और इसके डिजिटल रिलीज़ की तैयारी चल रही है।










