दिल्ली स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। ACB ने पूर्व DGHS डॉ. वत्सला अग्रवाल समेत तीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच तेज कर दी है।
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल, डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार किया है।
यह मामला दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सर्जिकल सामग्री की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला कई सौ करोड़ रुपये तक फैला हो सकता है।
सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के जरिए खरीद में गड़बड़ी का आरोप
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के माध्यम से की गई खरीद प्रक्रियाओं से संबंधित है, जो DGHS के अधीन कार्य करती है। आरोप है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, बेडशीट, लिनेन, दवाइयों और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन जैसी आवश्यक चिकित्सा सामग्री की खरीद में गंभीर अनियमितताएं की गईं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया को इस तरह से डिजाइन किया गया कि कुछ चुनिंदा सप्लायर्स को अनुचित लाभ मिल सके। टेंडर की शर्तें कथित तौर पर विशेष कंपनियों के अनुकूल तैयार की गईं, जिससे अन्य योग्य बोलीदाता प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गए। इसके परिणामस्वरूप सरकार को अत्यधिक बढ़ी हुई कीमतों पर सामान खरीदना पड़ा, जिससे सार्वजनिक धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।
ACB की जांच और गिरफ्तारी की कड़ी कार्रवाई
एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने इस मामले में 2 जून को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद जांच को तेज किया गया और कई स्तरों पर वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और खरीद प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई।
जांच के दौरान पूर्व में गिरफ्तार किए गए डॉ. विनोद कुमार रंगा से पूछताछ के आधार पर कई अहम सुराग मिले, जिसके बाद यह नई गिरफ्तारियां की गईं। बताया जा रहा है कि पूछताछ में टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर और आपसी मिलीभगत से जुड़े कई तथ्य सामने आए।
पूर्व DGHS अधिकारी पर गंभीर आरोप
पूर्व DGHS डॉ. वत्सला अग्रवाल को इस मामले में मुख्य प्रशासनिक भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी रही और कई महत्वपूर्ण निर्णयों में नियमों की अनदेखी की गई।
गिरफ्तारी से पहले उन्हें 21 मई को DGHS पद से हटाकर प्रतीक्षा सूची में रखा गया था। इसके बाद उनका तबादला गुरु तेग बहादुर अस्पताल में किया गया। बाद में दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया, ताकि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके।
![]()
अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच
इस मामले में नीरज चोपड़ा, जो कि डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स के पद पर कार्यरत थे, को भी गिरफ्तार किया गया है। उन पर वित्तीय मंजूरी और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं को नजरअंदाज करने या उसमें सहयोग करने के आरोप हैं।
इसके अलावा, पहले गिरफ्तार किए गए अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। ACB यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह कथित घोटाला एक संगठित नेटवर्क के तहत संचालित हो रहा था या इसमें व्यक्तिगत स्तर पर भ्रष्टाचार शामिल था।
प्रशासनिक कार्रवाई और निलंबन
घोटाले के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। आंतरिक जांच के आधार पर दिल्ली सरकार ने पांच फार्मासिस्टों और CPA के दो अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी पाया गया कि दवाओं की खरीद, भंडारण और वितरण प्रणाली में कई गंभीर खामियां थीं। कई मामलों में रिकॉर्ड और वास्तविक आपूर्ति में अंतर पाया गया, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और मजबूत हुई है।
जांच का दायरा बढ़ा, और गिरफ्तारियां संभव
ACB अब इस पूरे मामले को एक बड़े वित्तीय घोटाले के रूप में देख रही है। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े कई स्तरों पर संदेहास्पद गतिविधियां सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार मामलों में से एक हो सकता है।
जनता के धन के दुरुपयोग पर उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताएं न केवल वित्तीय नुकसान का कारण बनती हैं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग, ऑडिट सिस्टम और स्वतंत्र निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।










