धनबाद में जमीन धंसने से आधे दर्जन घर जमींदोज, छाताबाद में 55 घरों पर संकट; खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर लोग

: धनबाद के छाताबाद में फिर जमीन धंसने से आधे दर्जन घर जमींदोज हो गए। करीब 55 घर प्रभावित हैं और 500 लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर बताए जा रहे हैं।
धनबाद में जमीन धंसने से आधे दर्जन घर जमींदोज, छाताबाद में 55 घरों पर संकट; खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर लोग
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धनबाद के कतरास इलाके में जमीन धंसने की लगातार घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। छाताबाद में एक बार फिर भू-धंसान की घटना सामने आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। ताजा घटना में करीब आधे दर्जन घरों के जमींदोज होने की बात सामने आई है, जबकि लगभग 55 घरों पर संकट मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, भू-धंसान के कारण करीब 500 लोगों के सामने सुरक्षित आशियाने की समस्या खड़ी हो गई है। कई परिवार अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित जगहों की तलाश कर रहे हैं और कुछ लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

छाताबाद में भू-धंसान की यह पहली घटना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले भी 7 जुलाई और 7 अगस्त को यहां जमीन धंसने की घटनाएं हो चुकी हैं। लगातार तीसरी बार धरती के धंसने से स्थानीय लोगों का डर और बढ़ गया है। जिन परिवारों के घर पहले से कमजोर या प्रभावित थे, उनके लिए नई घटना ने खतरे को और गंभीर कर दिया है। लोगों का कहना है कि अब उन्हें इस बात का भरोसा नहीं रह गया है कि अगली बार जमीन कब और कहां धंस जाएगी।

ताजा भू-धंसान के बाद इलाके में कई स्थानों पर जमीन में दरारें और धंसने के निशान दिखाई देने की बात सामने आई है। प्रभावित परिवारों ने अपने घरों के अंदर रखे जरूरी सामान को बाहर निकालना शुरू कर दिया है। घरों में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर है। लगातार जमीन खिसकने के खतरे के बीच लोग रात के समय भी चैन से सो नहीं पा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर करीब 55 घरों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ घरों को सीधे नुकसान पहुंचा है, जबकि अन्य मकानों पर भी खतरा बना हुआ बताया जा रहा है। करीब आधे दर्जन मकानों के जमींदोज होने की सूचना ने स्थिति की गंभीरता को सामने ला दिया है। लोगों का कहना है कि अगर भू-धंसान का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो आने वाले समय में और मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं।

इस घटना का असर सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है। भू-धंसान से प्रभावित परिवारों के सामने रहने, खाने और अपने सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती भी पैदा हो गई है। जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से घर बनाया था, वे अब उसी घर को छोड़ने के लिए मजबूर हैं। कुछ परिवार खुले आसमान के नीचे रहने की स्थिति में पहुंच गए हैं, जबकि दूसरे परिवार सुरक्षित स्थान पर रिश्तेदारों या परिचितों के यहां जाने की कोशिश कर रहे हैं।

छाताबाद में पहले हुई घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी ठहरने की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन ताजा भू-धंसान ने उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली घटनाओं के बाद जिस सामुदायिक भवन में लोगों को अस्थायी तौर पर ठहराया गया था, वह भी अब भू-धंसान से प्रभावित हुआ है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान की तलाश और भी बड़ी समस्या बन गई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछली घटनाओं के बाद उन्हें प्रशासन, BCCL और जनप्रतिनिधियों की ओर से समाधान और पुनर्वास का भरोसा दिया गया था। लोगों का कहना है कि अगर प्रभावित परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर स्थायी रूप से बसाया जाता और संवेदनशील इलाके में जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाते तो मौजूदा स्थिति से बचने में मदद मिल सकती थी। हालांकि भू-धंसान के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

छाताबाद के लोग लंबे समय से पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि केवल घटना के बाद लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी आवास और सुरक्षा की व्यवस्था चाहिए। जिन घरों को रहने के लिए असुरक्षित माना जा रहा है, वहां परिवारों को वापस भेजना भी जोखिम भरा हो सकता है। यही वजह है कि स्थानीय लोग सुरक्षित पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय पार्षद मोहम्मद शहाबुद्दीन के मुताबिक, मौजूदा घटना के बाद करीब 500 लोग बेघर हुए हैं। उनके अनुसार, लंबे आंदोलन के बाद BCCL प्रबंधन की ओर से पुनर्वास, स्थल का सर्वे और प्रभावित क्षेत्र में भराई जैसे मुद्दों पर आश्वासन दिया गया था, लेकिन लोगों को अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई दिखाई नहीं दी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर इन मांगों को लेकर दबाव बढ़ गया है।

भू-धंसान की लगातार घटनाओं के बीच प्रशासन की ओर से भी मौके की स्थिति का जायजा लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाघमारा के अंचल अधिकारी गिरजानंद किस्कू मौके पर पहुंचे और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की बात कही। साथ ही BCCL प्रबंधन के साथ बैठक कर समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है।

छाताबाद की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए पिछले कुछ महीनों की घटनाओं पर नजर डालना भी जरूरी है। जुलाई में यहां भू-धंसान की घटना के बाद घर प्रभावित हुए थे। अगस्त में फिर जमीन धंसने से करीब एक दर्जन घरों के प्रभावित होने की खबर सामने आई थी। अगस्त के अंत में काजूबागान तालाब के पास भी जमीन धंसने से बड़ा गोफ बनने और तालाब का पानी जमीन में समाने की घटना सामने आई थी। इससे इलाके की जमीन की स्थिरता को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई थी।

धनबाद के कतरास और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। अलग-अलग घटनाओं में मकानों के क्षतिग्रस्त होने, लोगों के घायल होने और कुछ मामलों में जान जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे भू-धंसान प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए पुनर्वास और सुरक्षा का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

छाताबाद के लोगों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे अपने परिवार और सामान को लेकर कहां जाएं। जिन घरों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं या जिनके आसपास जमीन धंस रही है, वहां वापस जाकर रहना लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन के सामने तत्काल सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास की व्यवस्था करने की चुनौती है।

लगातार हो रही घटनाओं ने यह भी साफ कर दिया है कि छाताबाद में केवल एक बार की राहत व्यवस्था से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का विस्तृत सर्वे, जोखिम वाले मकानों की पहचान, जमीन की स्थिरता की जांच और सुरक्षित पुनर्वास की ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक स्थानीय लोगों के बीच भय बना रह सकता है। फिलहाल प्रशासन और BCCL की आगामी कार्रवाई पर प्रभावित परिवारों की नजर है। लोगों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित रहने की स्थायी व्यवस्था मिलेगी।

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