धनबाद के कतरास में नहीं थम रहा भू-धंसान का सिलसिला, जोरदार आवाज के साथ फिर धंसी धरती; दो जख्मी

धनबाद के कतरास छाताबाद में जोरदार आवाज के साथ फिर जमीन धंस गई। सड़क 10 फीट नीचे चली गई और करीब एक दर्जन घरों में दरारें आईं, दो लोग घायल हुए।
धनबाद के कतरास में नहीं थम रहा भू-धंसान का सिलसिला, जोरदार आवाज के साथ फिर धंसी धरती; दो जख्मी
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झारखंड के धनबाद जिले के कतरास इलाके में भू-धंसान की घटनाएं लगातार लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। छाताबाद के खुशबू मोहल्ले में एक बार फिर जमीन धंसने की घटना सामने आई है। बुधवार शाम करीब 3:30 बजे हुई इस घटना के दौरान अचानक जोरदार आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते सड़क, आसपास के मकानों और सामुदायिक भवन के हिस्से में दरारें पड़ने लगीं। जमीन के धंसने से सड़क करीब 10 फीट नीचे चली गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित जगहों पर ले जाने लगे। इस घटना में 48 वर्षीय तबस्सुम परवीन और 12 वर्षीय रौशनी घायल हो गईं। दोनों को स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया।

बताया गया है कि छाताबाद के खुशबू मोहल्ले में जिस जगह यह घटना हुई, वहां लंबे समय से भू-धंसान का खतरा बना हुआ है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी इलाके से करीब 200 मीटर की दूरी पर इससे पहले भी 7 जुलाई को भू-धंसान की घटना हुई थी। इसके बाद 7 अगस्त को भी जमीन धंसने की घटना सामने आई थी। लगातार हो रही घटनाओं के कारण स्थानीय लोगों में पहले से ही डर का माहौल था। बुधवार को फिर जमीन धंसने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

घटना के वक्त तबस्सुम परवीन खाना खाने के बाद मैदान की ओर जा रही थीं। इसी दौरान उन्हें जमीन में हलचल महसूस हुई। अचानक तेज आवाज के साथ आसपास का हिस्सा धंसने लगा। स्थिति को देखकर उन्होंने शोर मचाया और वहां मौजूद 12 वर्षीय रौशनी को अपनी ओर खींच लिया। इस कोशिश में दोनों जमीन की चपेट में आ गईं और उनके हाथ-पैर में चोटें आईं। आसपास के लोगों ने तत्काल दोनों को वहां से निकालकर पास के मेडिकल हाल में पहुंचाया, जहां उनका इलाज कराया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि घटना के बाद मकानों की दीवारों में दरारें तेजी से दिखाई देने लगीं और कुछ घरों के झुकने की स्थिति भी बनी।

भू-धंसान के कारण केवल सड़क ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि आसपास के करीब एक दर्जन घरों और सामुदायिक भवन में भी बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं। जिस सामुदायिक भवन के आसपास लोग जुटते थे, वह भी इस घटना की चपेट में आ गया। इलाके में जमीन के नीचे हलचल और सड़क के धंसने से लोगों को अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी। कई परिवारों ने तत्काल अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में घरों के अंदर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना से कुछ समय पहले ही बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से इलाके में नोटिस चस्पा किया गया था। लोगों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने की हिदायत दी गई थी। इसके बाद इलाके में लाउडस्पीकर के माध्यम से भी लोगों को सावधान किया गया। लेकिन इसी बीच इतनी बड़ी भू-धंसान की घटना हो गई कि कई परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई। लोगों का कहना है कि अगर उन्हें पहले सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाता तो जोखिम कम किया जा सकता था।

भू-धंसान की लगातार घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी भी सामने आई है। प्रभावित लोगों का कहना है कि वे पिछले करीब तीन महीने से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। बार-बार जमीन धंसने और मकानों में दरार आने के बावजूद अब तक सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थायी रूप से पुनर्वासित नहीं किया जा सका है। लोगों का कहना है कि सिर्फ खतरे की सूचना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने की ठोस व्यवस्था भी जरूरी है।

इससे पहले भी भू-धंसान की घटनाओं के बाद इलाके में रहने वाले लोगों ने पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन किया था। आशियाना बचाओ आंदोलन के बैनर तले लोगों ने जीटीए डेको आउटसोर्सिंग कंपनी का चक्का जाम किया और कई दिनों तक धरना दिया था। आंदोलन के दौरान प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई जनप्रतिनिधि भी घटनास्थल का दौरा कर चुके हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का आश्वासन दिया गया था।

कतरास और धनबाद के कोयला क्षेत्रों में भू-धंसान का खतरा नया नहीं है। कोयला खनन से जुड़े क्षेत्रों में जमीन के नीचे पुराने खनन क्षेत्र, खाली भूमिगत हिस्से और अन्य भूगर्भीय परिस्थितियां कई जगहों पर जमीन की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। धनबाद में हाल के दिनों में अलग-अलग इलाकों से भू-धंसान की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि किसी एक घटना के पीछे तत्काल कारण क्या रहा, इसका तकनीकी निर्धारण संबंधित विशेषज्ञ जांच और सर्वे के आधार पर ही किया जा सकता है।

इसी बीच धनबाद के अन्य खनन क्षेत्रों में भू-धंसान और कथित अवैध खनन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में झरिया विधायक रागिनी सिंह ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी के सामने धनबाद के विभिन्न खनन क्षेत्रों में भू-धंसान, अवैध अथवा अनधिकृत खनन और हेवी ब्लास्टिंग से जुड़ी शिकायतों को उठाया था। उन्होंने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग की थी। केंद्रीय मंत्री की ओर से मंत्रालय की टीम को धनबाद भेजकर स्थिति का जायजा लेने का भरोसा दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

छाताबाद की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को स्थायी सुरक्षा कब मिलेगी। स्थानीय लोगों के लिए समस्या सिर्फ जमीन धंसने तक सीमित नहीं है। मकानों में दरारें आने के बाद उन्हें अपने घरों के सुरक्षित होने पर भी भरोसा नहीं रह जाता। सड़क धंसने से आवागमन प्रभावित हो सकता है और सामुदायिक भवन के क्षतिग्रस्त होने से लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल भी मुश्किल हो जाता है। सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बनी रहती है।

घटना के बाद प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन के सामने तत्काल चुनौती प्रभावित इलाके को सुरक्षित रखने की है। ऐसे स्थानों पर लोगों की आवाजाही रोकना, जोखिम वाले मकानों की पहचान करना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाना जरूरी हो जाता है। इसके साथ ही जमीन के नीचे की वास्तविक स्थिति का तकनीकी सर्वे कराना भी महत्वपूर्ण है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भू-धंसान का दायरा कितना है और भविष्य में किन हिस्सों में खतरा बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-धंसान की घटनाएं लगातार सामने आने के बावजूद पुनर्वास की प्रक्रिया उनकी अपेक्षा के अनुरूप आगे नहीं बढ़ी है। दूसरी ओर बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से इलाके को असुरक्षित घोषित करने और लोगों को जल्द सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट होने की हिदायत दिए जाने की बात सामने आई है। गोविंदपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक सत्यकाम आनंद के अनुसार, प्रबंधन अपने स्तर से सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा गया है।

घटना के बाद स्थानीय प्रतिनिधियों की ओर से यह मांग भी उठी है कि जिन स्थानों का सर्वे किया गया है, उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्र में जमीन के नीचे बने खाली हिस्सों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से भरने और लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया तेज करने की मांग की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जमीन के नीचे की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी और परिवारों को सुरक्षित स्थान पर नहीं बसाया जाएगा, तब तक हर नई दरार और जमीन में हलचल उनके लिए डर का कारण बनी रहेगी।

छाताबाद में बुधवार को हुई घटना में सबसे राहत की बात यह रही कि 12 वर्षीय रौशनी और 48 वर्षीय तबस्सुम परवीन की जान बच गई। अगर जमीन धंसने के समय आसपास और लोग मौजूद होते तो नुकसान और बड़ा हो सकता था। घटना के दौरान दोनों के हाथ-पैर में चोटें आईं और आसपास के लोगों ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए पहुंचाया। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए खतरा कितना गंभीर हो सकता है।

अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि ताजा भू-धंसान के बाद प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन क्या कदम उठाता है। जिन घरों में दरारें आई हैं, उनकी सुरक्षा जांच, प्रभावित परिवारों का सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरण और जमीन की तकनीकी जांच इस समय सबसे अहम मुद्दे हैं। लोगों का कहना है कि बार-बार होने वाली घटनाओं के बाद केवल तत्काल राहत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्हें सुरक्षित पुनर्वास और भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव की ठोस व्यवस्था चाहिए।

कतरास के छाताबाद में फिर धंसी जमीन की घटना ने धनबाद के खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर सड़क करीब 10 फीट नीचे धंस गई, दूसरी ओर करीब एक दर्जन घरों और सामुदायिक भवन में दरारें आ गईं। दो लोग घायल हुए और कई परिवारों को अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा। अब इस इलाके में आगे की स्थिति प्रशासनिक और तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित स्थान और स्थायी पुनर्वास की है।

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