झारखंड में माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षा बलों और पुलिस की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में एक और बड़े इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज उर्फ दीपक उर्फ राकेश ने 17 सितंबर 2026 को कोलकाता एसटीएफ के सामने आत्मसमर्पण किया। असीम मंडल भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य बताया गया है। उस पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इस तरह उस पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था। वह पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक का रहने वाला बताया गया है।
असीम मंडल के आत्मसमर्पण के साथ झारखंड में एक करोड़ रुपये या उससे अधिक इनाम वाले कई बड़े माओवादी चेहरों की सूची में एक और नाम कम हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग अभियानों के दौरान कुछ शीर्ष माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए, कुछ को गिरफ्तार किया गया और कुछ ने पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों के सामने हथियार डाल दिए। इन घटनाओं ने झारखंड में माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व और उसके प्रभाव वाले इलाकों पर लगातार दबाव की स्थिति को सामने रखा है।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2018 में बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में सक्रिय भाकपा माओवादी के शीर्ष कमांडर और सेंट्रल कमेटी सदस्य देव कुमार सिंह उर्फ अरविंद की मौत हुई थी। उस समय उस पर झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम बताया गया था। अरविंद को झारखंड में माओवादी संगठन के प्रमुख चेहरों में गिना जाता था और बूढ़ा पहाड़ लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा था। उसकी मौत के बाद संगठन के नेतृत्व में बदलाव हुआ और इसी क्षेत्र में सक्रिय रहे दूसरे बड़े नेताओं पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ी।
अरविंद की मौत के बाद 11 फरवरी 2019 को सुधाकर ने बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में माओवादियों की कमान संभाली। वह भी सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और उस पर झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम बताया गया था। बाद में उसने तेलंगाना में अपनी पत्नी नीलिमा के साथ आत्मसमर्पण किया। नीलिमा भी माओवादी संगठन की स्पेशल एरिया कमेटी की सदस्य थी और उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों के आत्मसमर्पण को भी माओवादी संगठन के शीर्ष स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया था।
इसके बाद 14 नवंबर 2021 को झारखंड पुलिस ने सरायकेला-खरसावां में माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन और उसकी पत्नी शीला मरांडी को गिरफ्तार किया। प्रशांत बोस पर एक करोड़ रुपये का इनाम था, जबकि शीला मरांडी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। प्रशांत बोस को माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेताओं में शामिल बताया जाता रहा है। दोनों की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई थी, क्योंकि यह मामला संगठन के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ा था।
माओवादी संगठन के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला 2025 में भी जारी रहा। 21 अप्रैल 2025 को बोकारो जिले में एक करोड़ रुपये के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक के मुठभेड़ में मारे जाने की जानकारी सामने आई। इसके कुछ महीनों बाद 15 सितंबर 2025 को हजारीबाग जिले के गिरिडीह थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में माओवादी संगठन के सेंट्रल कमेटी सदस्य अनुज उर्फ सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश उर्फ अमलेश के मारे जाने की बात सामने आई। दोनों घटनाओं ने सुरक्षा बलों और माओवादी संगठन के बीच चल रही कार्रवाई के एक और चरण को दिखाया।
22 जनवरी 2026 को पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र में छोटानागरा थाना क्षेत्र के जंगलों में ऑपरेशन मेगाबुरु के दौरान एक करोड़ रुपये के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य अनल उर्फ पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश सहित 17 माओवादियों के मारे जाने की जानकारी दी गई। यह कार्रवाई सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के अभियान से जुड़ी थी। इतने बड़े स्तर पर माओवादियों के मारे जाने की घटना ने संगठन की स्थानीय संरचना पर असर डालने के साथ-साथ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को भी रेखांकित किया।
इसके बाद 29 जुलाई 2026 को माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल समेत पांच माओवादियों की धनबाद में गिरफ्तारी हुई। मिसिर बेसरा पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यानी उसके ऊपर भी कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था। उसकी गिरफ्तारी को झारखंड में माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई की कड़ी में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया गया।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद असीम मंडल को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी थी। इससे पहले पुलिस के पोस्टरों में असीम मंडल को एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी के तौर पर चिन्हित किया गया था। अगस्त 2026 में पूर्वी सिंहभूम पुलिस ने झारखंड-बंगाल सीमा से लगे क्षेत्रों में उसके समेत छह वांछित माओवादियों के पोस्टर लगाए थे। पुलिस ने लोगों से इन वांछित माओवादियों के बारे में सूचना देने की अपील की थी। उस समय असीम मंडल को एक करोड़ रुपये के इनाम वाला प्रमुख माओवादी बताया गया था।
असीम मंडल से जुड़े घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उसके दस्ते के कई सदस्य पहले ही पुलिस कार्रवाई की जद में आ चुके थे। अगस्त में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, असीम मंडल के दस्ते के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि कुछ मुठभेड़ों में मारे गए और कुछ ने आत्मसमर्पण किया। इससे उसके नेतृत्व वाले दस्ते पर भी लगातार दबाव बना हुआ था।
मई 2026 में भी झारखंड में बड़े पैमाने पर माओवादियों के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, 27 माओवादियों ने रांची में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। उस समय पुलिस की ओर से बताया गया था कि वर्ष 2026 में उस समय तक 22 माओवादी मारे गए, 44 गिरफ्तार हुए और 29 ने आत्मसमर्पण किया था। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए थे।
असीम मंडल का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह सिर्फ झारखंड में सक्रिय किसी स्थानीय स्तर के माओवादी के रूप में नहीं, बल्कि सेंट्रल कमेटी के सदस्य के तौर पर सामने आया है। उसके ऊपर झारखंड और ओडिशा दोनों राज्यों में इनाम घोषित था। जागरण के मुताबिक झारखंड की ओर से एक करोड़ और ओडिशा की ओर से 1.20 करोड़ रुपये का इनाम होने के कारण कुल इनामी राशि 2.20 करोड़ रुपये तक पहुंचती थी। अब उसके आत्मसमर्पण के बाद इस स्तर के एक और बड़े माओवादी नेता का संगठन से बाहर होना दर्ज हुआ है।
झारखंड में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई केवल मुठभेड़ तक सीमित नहीं रही है। पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से गिरफ्तारियां, आत्मसमर्पण, हथियारों की बरामदगी और वांछित माओवादियों की तलाश भी लगातार चलती रही है। कई मामलों में सुरक्षा एजेंसियों ने संगठन के बड़े नेताओं तक पहुंचने के लिए उनके दस्तों और स्थानीय नेटवर्क पर कार्रवाई की है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे चेहरे सामने आए, जो कभी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे, लेकिन बाद में मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया का हिस्सा बने।
असीम मंडल के आत्मसमर्पण के बाद अब झारखंड में एक करोड़ रुपये या उससे अधिक इनाम वाले बड़े माओवादी चेहरों की सूची में एक और नाम कम हुआ है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि माओवादी गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां अभी भी सक्रिय दस्तों और वांछित सदस्यों की तलाश कर रही हैं। अगस्त के अंत में पूर्वी सिंहभूम में पुलिस ने छह वांछित माओवादियों के पोस्टर लगाकर उनकी तलाश तेज करने की जानकारी दी थी। यानी बड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ निचले और क्षेत्रीय स्तर के नेटवर्क पर भी अभियान जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम में पिछले करीब आठ वर्षों की तस्वीर देखें तो बड़े इनामी माओवादी चेहरों को लेकर अलग-अलग तरह की कार्रवाई हुई है। 2018 में अरविंद की मौत, 2019 में सुधाकर का आत्मसमर्पण, 2021 में प्रशांत बोस और शीला मरांडी की गिरफ्तारी, 2025 में प्रयाग मांझी और अनुज की मुठभेड़ में मौत, जनवरी 2026 में अनल की मौत, जुलाई 2026 में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और अब सितंबर 2026 में असीम मंडल का आत्मसमर्पण—इन घटनाओं ने झारखंड में माओवादी संगठन के शीर्ष स्तर के कई प्रमुख नामों की स्थिति बदल दी है।
असीम मंडल के आत्मसमर्पण की घटना ऐसे समय सामने आई है जब झारखंड में सुरक्षा एजेंसियां माओवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए हैं। उसके आत्मसमर्पण से पहले ही उसके दस्ते से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी और अन्य सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आती रही थीं। अब असीम मंडल के पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियां उससे संगठन की गतिविधियों, नेटवर्क और अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती हैं। हालांकि उससे संबंधित किसी भी पूछताछ या आगे की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से सामने आने पर ही स्पष्ट होगी।
इस तरह झारखंड में एक करोड़ रुपये या उससे अधिक इनाम वाले आठ बड़े माओवादी चेहरों की कहानी में अलग-अलग पड़ाव रहे हैं। किसी की मुठभेड़ में मौत हुई, किसी को पुलिस ने गिरफ्तार किया और किसी ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया। असीम मंडल का आत्मसमर्पण इस सूची में ताजा घटनाक्रम है। अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने बाकी सक्रिय और वांछित माओवादी सदस्यों तक पहुंचने तथा उनके नेटवर्क की जानकारी जुटाने की चुनौती बनी हुई है।












