धार भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने भोजशाला को हिंदू मंदिर मानते हुए हिंदू समुदाय को पूजा अधिकार देने की बात कही थी।
मध्य प्रदेश : भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानते हुए हिंदू समुदाय के पूजा अधिकार को बरकरार रखा गया था। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अब नया कानूनी मोड़ आ गया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से काजी मोइनुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, मामला डायरी नंबर 32281/2026 के तहत दर्ज किया गया है और अभी विचाराधीन है।
हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना था मंदिर
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और हिंदू मंदिर माना था। अदालत ने कहा था कि हिंदू समुदाय का पूजा का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ।
कोर्ट ने 2003 में एएसआई द्वारा बनाई गई नमाज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे। फैसले में कहा गया कि यह व्यवस्था स्थल के मूल स्वरूप के अनुरूप नहीं थी। साथ ही मुस्लिम समुदाय के लिए वैकल्पिक जमीन पर मस्जिद निर्माण पर विचार करने की बात भी कही गई थी।
एएसआई रिपोर्ट और पूजा अधिकार का जिक्र
अदालत ने अपने फैसले में 2024 की पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट का उल्लेख किया था। रिपोर्ट में संस्कृत शिलालेख, हवन कुंड और मंदिर वास्तुकला से जुड़े अवशेष मिलने की बात कही गई थी।
फैसले के बाद एएसआई ने हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा और मां सरस्वती से जुड़े अध्ययन कार्यों की अनुमति देने का आदेश जारी किया था। हालांकि, परिसर का प्रशासनिक नियंत्रण एएसआई के पास ही रहेगा क्योंकि यह संरक्षित स्मारक है।
वाग्देवी प्रतिमा और कैविएट याचिका
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास करने का निर्देश भी दिया था।
वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की गई है। इसमें अनुरोध किया गया है कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ किसी भी याचिका पर बिना उनका पक्ष सुने कोई अंतरिम आदेश न दिया जाए।
लंबे समय से जारी है विवाद
भोजशाला विवाद मध्य भारत के सबसे चर्चित धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल राजा भोज द्वारा स्थापित मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताते हुए अपनी धार्मिक परंपरा और पूर्व प्रशासनिक व्यवस्थाओं का हवाला देता रहा है।











