DR Congo उवीरा में M23 हिंसा के आरोप, HRW रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

DR Congo के उवीरा शहर में M23 विद्रोही और कथित रवांडा सैनिकों ने बड़े पैमाने पर अत्याचार किए। हत्या, बलात्कार, अपहरण और युद्ध अपराध जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पूर्वी कांगो के उवीरा शहर में M23 विद्रोही और कथित रवांडा सैनिकों ने नागरिकों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार किए। इनमें हत्या, बलात्कार, अपहरण और युद्ध अपराध जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

ब्राज़ाविल: पूर्वी अफ्रीका के संघर्षग्रस्त क्षेत्र डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) के तटवर्ती शहर उवीरा में हुई हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता जताई जा रही है। मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch की एक नई जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शहर पर कई हफ्तों तक चले कब्जे के दौरान M23 विद्रोही समूह और कथित तौर पर रवांडा सेना से जुड़े सैनिकों द्वारा व्यापक अत्याचार किए गए। इनमें सामूहिक हत्याएं, बलात्कार, जबरन गायब करना और बच्चों तक को निशाना बनाना शामिल है।

यह पूरा मामला पूर्वी कांगो में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को एक बार फिर वैश्विक चर्चा में ला रहा है, जहां खनिज संसाधनों से भरपूर इलाकों पर नियंत्रण को लेकर लगातार हिंसक टकराव जारी है।

उवीरा में कब्जे के दौरान भय और हिंसा का माहौल

Uvira, जो कि Lake Tanganyika के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण शहर है, दिसंबर में M23 विद्रोहियों के कब्जे में चला गया था। इस दौरान स्थानीय लोगों ने ऐसी घटनाओं का सामना किया जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया।

Human Rights Watch की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में घर-घर तलाशी अभियानों के दौरान बड़े पैमाने पर नागरिकों को निशाना बनाया गया। कई गवाहों ने बताया कि सशस्त्र समूहों ने बिना किसी चेतावनी के लोगों को उनके घरों में घुसकर गोली मार दी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दर्जनों परिवारों ने अपने प्रियजनों को अपनी आंखों के सामने मरते देखा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, शहर में हर तरफ डर का माहौल था और हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने को मजबूर हो गए।

Human Rights Watch की रिपोर्ट में गंभीर खुलासे

Human Rights Watch की जांच में 130 से अधिक लोगों से बातचीत की गई। इस आधार पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उवीरा में कम से कम 53 नागरिकों की हत्या की पुष्टि या विश्वसनीय संकेत मिले हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में पीड़ितों को उनके घरों के भीतर या सड़क पर गोली मारी गई। कुछ गवाहों ने यह भी बताया कि सैनिकों और विद्रोहियों ने लोगों की पहचान पूछने के बाद उन्हें तुरंत मार दिया।

एक चश्मदीद के अनुसार, उसके पड़ोसी को सिर में गोली मारी गई, जबकि दूसरे व्यक्ति ने बताया कि उसने अपने पूरे परिवार को खो दिया। ऐसे बयान इस हिंसा की भयावहता को दर्शाते हैं।

बलात्कार और यौन हिंसा के आरोप

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू यौन हिंसा से जुड़े मामले हैं। जांच में कम से कम आठ बलात्कार के मामलों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें कथित तौर पर M23 विद्रोहियों और कुछ सैनिकों द्वारा अंजाम दिया गया।

पीड़ित महिलाओं ने बताया कि उन्हें हथियारों के बल पर धमकाया गया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। एक पीड़िता ने कहा कि उसके पति को उसके सामने गोली मार दी गई। अन्य मामलों में महिलाओं ने बताया कि उन्हें जबरन कपड़े उतारने और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा।

Human Rights Watch का कहना है कि यह घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत युद्ध अपराधों की श्रेणी में आती हैं।

रवांडा और M23 पर आरोप-प्रत्यारोप

इस पूरे संघर्ष में पड़ोसी देश Rwanda की भूमिका को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। DR Congo और पश्चिमी देशों का आरोप है कि रवांडा M23 विद्रोहियों को समर्थन देता है, हालांकि रवांडा सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।

इसी तरह M23 विद्रोही समूह पर भी कई मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने भी संकेत दिया है कि इस समूह के संचालन में बाहरी समर्थन की भूमिका हो सकती है, हालांकि इस पर पूर्ण सहमति नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, कब्जे के दौरान कुछ पीड़ितों ने ऐसे सैनिकों की पहचान की जिन्हें वे रवांडा की वर्दी में बता रहे हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

संयुक्त राष्ट्र और यूनिसेफ की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी UNICEF ने भी पूर्वी कांगो की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, केवल 2025 के शुरुआती नौ महीनों में ही 35,000 से अधिक बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामले दर्ज किए गए, जिनमें अधिकांश उत्तर और दक्षिण किवु क्षेत्रों से हैं, जहां M23 का प्रभाव बताया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार हिंसा ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।

मानवीय संकट और बड़े पैमाने पर विस्थापन

उवीरा और आसपास के क्षेत्रों में हिंसा के कारण लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। अनुमान के अनुसार, दक्षिण किवु में ही लगभग दो मिलियन लोग विस्थापित हुए हैं।

कई परिवार जंगलों, सीमावर्ती इलाकों और अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है। लगातार संघर्ष ने बच्चों की शिक्षा और सामान्य जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।

स्थानीय समुदायों का कहना है कि सुरक्षा की कमी के कारण वे अपने घर वापस लौटने में असमर्थ हैं।

शांति प्रयासों के बावजूद जारी संघर्ष

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ता और समझौते की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कुछ समय पहले अमेरिका की मध्यस्थता से क्षेत्र में शांति समझौते की कोशिश की गई थी, लेकिन इसके बावजूद तनाव कम नहीं हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खनिज संसाधनों और क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक इस संघर्ष के पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम है।

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