28 साल बाद द्वाराहाट में लौटी कत्यूरी बैसी परंपरा, पहाड़ से भाबर तक भक्तिमय हुआ माहौल

द्वाराहाट में 28 साल बाद कत्यूरी बैसी परंपरा शुरू हुई। 11 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में सात गांवों के श्रद्धालु शामिल होकर आस्था का उत्सव मना रहे हैं।

उत्तराखंड के द्वाराहाट में 28 वर्षों बाद प्राचीन कत्यूरी बैसी परंपरा का आयोजन शुरू हुआ है। 11 दिनों तक चलने वाले इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में सात गांवों के श्रद्धालु भाग ले रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

अल्मोड़ा: उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और धार्मिक विरासत से जुड़ी कत्यूरी बैसी परंपरा 28 साल बाद एक बार फिर शुरू हो गई है। द्वाराहाट के विजयपुर धनखल गांव में आरंभ हुए इस 11 दिवसीय अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधक शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन से पहाड़ से लेकर भाबर क्षेत्र तक भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है।

28 वर्षों बाद फिर शुरू हुई कत्यूरी बैसी, श्रद्धालुओं में उत्साह

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्र में लगभग 28 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद प्राचीन कत्यूरी बैसी परंपरा का पुनः शुभारंभ हुआ है। यह धार्मिक अनुष्ठान उत्तराखंड की प्राचीन लोक आस्था और कत्यूरी राजवंश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। विजयपुर धनखल गांव में शुरू हुए इस आयोजन में सात गांवों के श्रद्धालु, साधक और देव डांगर बड़ी श्रद्धा के साथ भाग ले रहे हैं। पूरे क्षेत्र में ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है।

11 दिनों तक चलेगा विशेष देव अनुष्ठान

कत्यूरी बैसी 11 दिनों तक चलने वाला विशेष धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें साधक कठिन नियमों का पालन करते हुए तपस्या और संन्यास का जीवन अपनाते हैं। इस बार केवल वरिष्ठ साधक ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में युवाओं ने भी परंपरा का निर्वहन करने के लिए संन्यास धारण किया है। आयोजन के दौरान देवाधिदेव महादेव, भूमि देवता तथा स्थानीय देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से क्षेत्र में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

चित्रशिला घाट में हुआ महास्नान और जियारानी की जागर

अनुष्ठान के क्रम में श्रद्धालु विजयपुर धनखल से देव डांगरों के साथ हल्द्वानी स्थित रानीबाग के चित्रशिला घाट पहुंचे। यहां गौला (गार्गी) नदी में महास्नान किया गया और कत्यूरी राजवंश की प्रथम महारानी जियारानी की पारंपरिक जागर का आयोजन हुआ। धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कत्यूरी समाज के लोग शामिल हुए। हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले कत्यूरी परिवारों के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं नैनीताल सांसद अजय भट्ट भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

लोकसंस्कृति और परंपराओं को मिल रही नई पहचान

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान देव अवतरण की परंपरा भी निभाई गई। ढोल, दमाऊ, हुड़का और कांसे की थाली की पारंपरिक ध्वनि के बीच देव डांगरों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। इसके बाद श्रद्धालु देर रात वापस विजयपुर धनखल लौट आए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 28 वर्षों बाद इस परंपरा के पुनर्जीवित होने से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और सामाजिक एकता को भी नई पहचान देने का माध्यम बन रहा है।

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