ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अपना हाईली एनरिच्ड यूरेनियम हटाने पर सहमति जताई है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावना बढ़ी है। ट्रम्प ने कहा कि डील और दोबारा सैन्य कार्रवाई, दोनों के 50-50 चांस हैं।
ईरान/अमेरिका वॉर: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने युद्धविराम और तनाव कम करने के बदले अपने हाईली एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को हटाने पर सहमति जताई है। हालांकि यह अभी तय नहीं हुआ है कि यह यूरेनियम कहां भेजा जाएगा और इसकी निगरानी कौन करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका ईरान को लेकर बड़ा फैसला ले सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ “अच्छे समझौते” की संभावना है, लेकिन अगर वार्ता विफल होती है तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ईरान के पास 400 किलो से ज्यादा हाईली एनरिच्ड यूरेनियम
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 400 किलो से ज्यादा ऐसा यूरेनियम मौजूद है, जिसे और अधिक संवर्धित करके परमाणु हथियारों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इजराइल लंबे समय से इस भंडार को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम सैद्धांतिक रूप से कई परमाणु बम बनाने की क्षमता रखता है। हालांकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और नागरिक उपयोग के लिए है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान ने अमेरिका को संकेत दिया है कि वह इस भंडार को देश से बाहर भेजने या किसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था के तहत रखने पर विचार कर सकता है। हालांकि इसके तकनीकी और राजनीतिक पहलुओं पर अभी बातचीत जारी है।
ट्रम्प बोले- “50-50 चांस”, फैसला जल्द
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ समझौते की संभावना “50-50” है। उन्होंने कहा कि वे अपने शीर्ष सलाहकारों के साथ बैठक कर ईरान के नए प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे।
ट्रम्प के मुताबिक, इस बैठक में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, सलाहकार जैरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल होंगे। बैठक के बाद यह तय किया जाएगा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई रोके रखेगा या फिर ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू किए जाएंगे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका “बेहद कड़ा हमला” कर सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी है विवाद
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार और शिपिंग सेक्टर में भारी अस्थिरता देखने को मिली थी।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश 60 दिन के लिए युद्धविराम बढ़ाने और धीरे-धीरे होर्मुज को खोलने पर सहमत हो सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि ईरान ने ट्रम्प के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि समझौते के तहत होर्मुज पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि होर्मुज पर नियंत्रण ईरान के पास ही रहेगा।
तेहरान ने यह जरूर माना कि जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर तक बहाल किया जा सकता है, लेकिन “फ्री पैसेज” जैसी स्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी।

इजराइल की भूमिका सीमित होने के संकेत
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ट्रम्प प्रशासन ने ईरान वार्ता में इजराइल की भूमिका सीमित कर दी है। इसे इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
इजराइल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाता रहा है और वह किसी भी ऐसे समझौते का विरोध करता है, जिसमें ईरान को संवर्धन कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति मिले।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका अब क्षेत्रीय युद्ध को रोकने और तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहा है।
अमेरिका में भी बढ़ा राजनीतिक विरोध
ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक मतभेद तेज हो गए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने कहा कि यदि समझौते के बाद भी ईरान को यूरेनियम संवर्धन जारी रखने की अनुमति मिलती है, तो यह अमेरिका की बड़ी रणनीतिक गलती होगी।
वहीं रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने ट्रम्प की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अंत में समझौता ही करना था, तो युद्ध शुरू क्यों किया गया।
ग्राहम ने चेतावनी दी कि यदि दुनिया यह मान लेती है कि ईरान किसी भी समय होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर सकता है, तो इससे मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन बदल सकता है और इसका सबसे ज्यादा असर इजराइल पर पड़ेगा।
पाकिस्तान और खाड़ी देशों की मध्यस्थता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर और पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रम्प की शांति कोशिशों की तारीफ करते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक समाधान जरूरी है।
उन्होंने बताया कि ट्रम्प ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किये, UAE, मिस्र, जॉर्डन और पाकिस्तान के नेताओं के साथ बातचीत की। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी इस वार्ता में शामिल रहे। सूत्रों के अनुसार, अगला दौर पाकिस्तान में आयोजित किया जा सकता है।
लेबनान पर इजराइली हमले जारी
इस बीच क्षेत्र में हिंसा पूरी तरह थमी नहीं है। इजराइल ने लेबनान में कई हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 20 लोगों की मौत की खबर है। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कई लोग घायल भी हुए हैं और राहत अभियान जारी है।
नबातियेह और टायर क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। इन हमलों ने यह संकेत दिया है कि मिडिल ईस्ट में तनाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
तेल कीमतों पर असर, भारत में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल
मिडिल ईस्ट संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब ₹99.51 प्रति लीटर और डीजल ₹92.49 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव कम नहीं हुआ तो तेल कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या समझौते से टलेगा बड़ा युद्ध?
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौता फिलहाल शुरुआती चरण में है, लेकिन यह मिडिल ईस्ट के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यदि ईरान वास्तव में अपने हाईली एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देने को तैयार होता है, तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है।
हालांकि इजराइल, अमेरिकी रिपब्लिकन नेताओं और ईरान के कट्टरपंथी गुटों की आपत्तियों के कारण यह प्रक्रिया आसान नहीं मानी जा रही। आने वाले दिनों में ट्रम्प प्रशासन का फैसला तय करेगा कि क्षेत्र युद्ध की ओर बढ़ेगा या कूटनीति की दिशा में आगे बढ़ेगा।









