ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन फिलहाल नियंत्रण में हैं, लेकिन हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा तेज है। भारत दौरे पर आए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के विशेष दूत डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि ईरान में जो हालात दिखाए जा रहे हैं, वह वास्तविकता से काफी अलग हैं।
World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पश्चिम एशिया में युद्धपोत भेजने के बयान के बाद ईरान ने भी कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान ने साफ कहा है कि यदि उस पर जबरन कुछ थोपा गया तो वह युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के विशेष दूत डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही भारत दौरे पर हैं। भारत में मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. इलाही ने ईरान के मौजूदा हालात, प्रदर्शनों में लोगों की मौत और पश्चिमी देशों की धमकियों पर खुलकर अपनी बात रखी।
प्रदर्शन पर ईरान का दृष्टिकोण
डॉ. इलाही ने कहा कि ईरान में दो तरह की परिस्थितियां हैं: एक वास्तविक और दूसरी सिर्फ प्रचारित। उन्होंने बताया कि कुछ पत्रकार और अंतरराष्ट्रीय संगठन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारे देश में आर्थिक समस्याएं हैं और कुछ लोग इससे नाराज भी हैं, लेकिन यह स्थिति मुख्य रूप से बाहरी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबावों के कारण बनी है। कुछ लोग इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्थिति जैसी दिखाई जा रही है, वैसी नहीं है।
ईरान के विरोध प्रदर्शन में हजारों मौतों के दावों को डॉ. इलाही ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के मरने की घटनाएं हुई हैं, लेकिन उनकी संख्या स्पष्ट नहीं है. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आम नागरिकों और पुलिस पर हमला किया, कई पुलिसकर्मी मारे गए। सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा दी गई संख्या वास्तविकता से मेल नहीं खाती। डॉ. इलाही का कहना था कि हिंसा बाहरी लोगों और सोशल मीडिया के प्रभाव से भड़काई गई, जिनमें कुछ ईरान के बाहर पढ़े गए लोग भी शामिल थे।

इंटरनेट और बाहरी दखल
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट नियंत्रण का उद्देश्य बाहरी दखल को रोकना और हालात को शांत करना था।ईरान के खिलाफ 250 से अधिक चैनल झूठा भ्रम फैलाते हैं। स्थानीय इंटरनेट काम कर रहा है, लेकिन बाहरी दखल को रोकने के लिए सीमित नियंत्रण जरूरी था। अमेरिका द्वारा पश्चिम एशिया में युद्धपोत भेजने की धमकी पर डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन अगर युद्ध थोपा गया तो ईरान भी तैयार है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, क्योंकि यह इस्लाम में हराम है। लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनकी ताकत जरूरी है। हम पर प्रतिबंध हैं, जबकि कई देशों के पास परमाणु हथियार हैं और उनका इस्तेमाल भी हुआ, लेकिन उन्हें कोई आपत्ति नहीं करता।











