अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल साइटों पर 5000 पाउंड बम गिराया। इसी बीच इज़राइल ने वरिष्ठ नेता अली लारीजानी और गुलाम रजा सुलेमानी को मार गिराया। घटना से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा और ईरान ने बदले की चेतावनी दी।
Middle East War: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बड़े और घातक हमले के तहत 5000 पाउंड के बम का इस्तेमाल किया है। यह हमला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल साइटों को निशाना बनाकर किया गया। अमेरिकी सेना ने इस हमले को सफल बताया और कहा कि इन साइटों पर रखी ईरानी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग के लिए खतरा पैदा कर रही थीं। इस कदम से माना जा रहा है कि अमेरिका अकेले ही स्ट्रेट को खोलने और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए सक्रिय हो सकता है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव
ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच मिडिल ईस्ट में जंग का 19वां दिन भी जारी है। इस दौरान दोनों तरफ से जबरदस्त हमले किए गए हैं। ईरान ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन अटैक किया, जिससे दूतावास की एक इमारत में आग लग गई। वहीं, इज़राइल के तेल अवीव में भी ईरानी मिसाइल का मलबा गिरने से रेलवे स्टेशन को भारी नुकसान पहुंचा। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हमला
US CENTCOM ने ट्वीट कर बताया कि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी समुद्र तट पर डीप पेनेट्रेटर हथियारों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। इसके तहत 5000 पाउंड के बम गिराए गए। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह हमला उन मिसाइल साइटों को निशाना बनाने के लिए किया गया जो अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग के लिए खतरा पैदा कर रही थीं। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य ताकत और सक्रिय भूमिका स्पष्ट हो गई है।
इज़राइल ने मारे दो सीनियर ईरानी अधिकारी
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इसी दौरान इज़राइल ने रात भर चलाए गए हमलों में दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों को मार गिराया। इज़राइली रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने बताया कि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी और रिवोल्यूशनरी गार्ड बासिज फोर्स के चीफ जनरल गुलाम रजा सुलेमानी को मार गिराया गया। अली लारीजानी को सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी माना जाता था और उनकी मौत से ईरान के राजनीतिक और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर असर पड़ेगा।
लारीजानी और सुलेमानी की भूमिका
अली लारीजानी और गुलाम रजा सुलेमानी दोनों ही ईरान के लिए अहम नेता थे। लारीजानी पूर्व में संसद के स्पीकर रह चुके थे और सुप्रीम लीडर के सलाहकार भी थे। उनकी रणनीतिक और राजनीतिक भूमिका ईरान की सुरक्षा नीतियों में महत्वपूर्ण रही। वहीं, जनरल सुलेमानी बासिज फोर्स के चीफ थे और विरोध प्रदर्शनों को दबाने तथा सैन्य अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उनकी मौत से ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे में बड़ा अंतर आएगा।
ईरान ने बदला लेने का ऐलान
ईरान ने लारीजानी और सुलेमानी की मौत के बाद इज़राइल पर प्रतिक्रिया देने का ऐलान किया है। ईरान की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि इज़राइल के खिलाफ मिसाइल हमले जारी रहेंगे। पहले ही इज़राइल ने तेल अवीव और अन्य शहरों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी हैं। ईरान की ओर से यह कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
NATO का इनकार
इस संघर्ष में अमेरिका को NATO से समर्थन नहीं मिला है। राष्ट्रपति ट्रंप ने NATO के इनकार पर नाराजगी व्यक्त की है और अमेरिका की तरफ से अकेले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के संकेत दिए हैं। यह स्थिति वैश्विक व्यापार और तेल शिपिंग के लिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेल की अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति में अहम मार्ग है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी और ईरानी कार्रवाई से क्षेत्रीय सुरक्षा संकट बढ़ गया है। ईरानी मिसाइल हमले और अमेरिकी बम गिराने के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात पर खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा, इस संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।








