इथियोपिया के अमहारा क्षेत्र में एक पहाड़ी मठ में विशेष प्रार्थना के दौरान हुए भूस्खलन में 14 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। लगातार बारिश के बाद पहाड़ी का हिस्सा ढह गया। राहत अभियान पूरा कर लिया गया है और मृतकों का अंतिम संस्कार शुरू हो चुका है।
अदीस अबाबा: इथियोपिया के उत्तरी अमहारा क्षेत्र में स्थित त्सादकाने देब्रे मितमाक सेंट मैरी मठ में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा उस समय मातम में बदल गई, जब सोमवार तड़के लगातार बारिश के बाद पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। इस हादसे में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि सात लोग घायल हुए हैं। घायलों में पांच की हालत गंभीर बताई गई है। स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश के लिए चलाया गया बचाव अभियान अब समाप्त कर दिया गया है।
रातभर हुई बारिश के बाद ढही पहाड़ी
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, घटना से पहले पूरी रात तेज बारिश होती रही। इससे पहाड़ी की मिट्टी कमजोर हो गई और तड़के पहाड़ी का ऊपरी हिस्सा खिसककर सीधे उस स्थान पर आ गिरा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु विशेष धार्मिक अनुष्ठान में शामिल थे। मठ की प्रार्थना गुफा पहाड़ को काटकर बनाई गई है। इसी गुफानुमा प्रार्थना कक्ष में श्रद्धालु एकत्र थे, जब अचानक ऊपर से मिट्टी और चट्टानें गिरने लगीं। कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
पवित्र जल अनुष्ठान में शामिल थे श्रद्धालु
इस धार्मिक आयोजन में पवित्र जल से शुद्धिकरण की परंपरागत रस्म आयोजित की जा रही थी। इथियोपियाई ऑर्थोडॉक्स ईसाई समुदाय में यह अनुष्ठान विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि इससे लंबे समय से चली आ रही शारीरिक और मानसिक समस्याओं से आध्यात्मिक राहत मिलती है। स्थानीय चर्च अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में अधिकांश वे श्रद्धालु थे, जो इसी पवित्र जल अनुष्ठान में भाग लेने के लिए मठ पहुंचे थे।
मृतकों का अंतिम संस्कार शुरू
चर्च प्रशासन के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले 11 लोगों का अंतिम संस्कार मठ परिसर में ही किया गया, जबकि अन्य मृतकों के शव उनके गृह क्षेत्रों में अंतिम संस्कार के लिए भेज दिए गए हैं। कुछ मृतकों की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ क्योंकि हादसे में कई शव गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। प्रशासन और चर्च मिलकर परिजनों की सहायता से पहचान प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
बचाव अभियान में स्थानीय लोगों ने निभाई अहम भूमिका
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा बलों, स्वास्थ्यकर्मियों और आसपास के ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबा हटाकर घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। हालांकि शुरुआती घंटों में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका थी, लेकिन व्यापक तलाशी अभियान के बाद अधिकारियों ने अभियान समाप्त करने की घोषणा कर दी।
धार्मिक नेताओं ने पीड़ित परिवारों को दिया सांत्वना संदेश
इथियोपियाई ऑर्थोडॉक्स चर्च के नॉर्थ शेवा डायोसिस के प्रमुख आर्कबिशप अबुने क्लेमेंटोस भी हादसे के बाद मठ पहुंचे। उन्होंने मृतकों के लिए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की, घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। चर्च प्रशासन ने इस हादसे को पूरे धार्मिक समुदाय के लिए अत्यंत दुखद बताया है।
इथियोपिया में बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
इथियोपिया में जून से अगस्त तक मुख्य वर्षा ऋतु रहती है। इस दौरान देश के कई पर्वतीय और ढलानदार इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार भारी वर्षा से मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे पहाड़ों का संतुलन बिगड़ता है और बड़े पैमाने पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आती हैं।
हाल के वर्षों में कई बड़े हादसे
इथियोपिया हाल के वर्षों में कई गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है। मार्च 2026 में दक्षिणी गामो क्षेत्र में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। इससे पहले जुलाई 2024 में पड़ोसी गेजे गोफा क्षेत्र में हुए विनाशकारी भूस्खलन में 229 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। यह इथियोपिया के इतिहास की सबसे भीषण मौसम संबंधी आपदाओं में से एक मानी जाती है। उस हादसे में बचाव अभियान में शामिल कई राहतकर्मी भी मारे गए थे।
जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा है चरम मौसम की घटनाएं
पूर्वी अफ्रीका में पिछले दो दशकों के दौरान मौसम के स्वरूप में बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि अत्यधिक बारिश और लंबे सूखे की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्रता से हो रही हैं।
जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव गतिविधियों से बढ़ रहे वैश्विक तापमान के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है, जिससे कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि भूस्खलन, अचानक बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम लगातार बढ़ रहा है।
आगे की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इथियोपिया जैसे पर्वतीय देशों में जोखिम वाले इलाकों की बेहतर निगरानी, वर्षा आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली और संवेदनशील धार्मिक एवं आवासीय स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इससे भविष्य में ऐसे हादसों में होने वाली जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।










