फरीदाबाद में स्वतंत्रता दिवस पर शहीदों की प्रतिमाओं पर नहीं चढ़ी माला, शहरवासियों ने जताई नाराजगी

फरीदाबाद में स्वतंत्रता दिवस पर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण नहीं हुआ। शहरवासियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए।

फरीदाबाद में स्वतंत्रता दिवस के सरकारी कार्यक्रमों के बीच भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण नहीं हुआ। शहरवासियों ने इसे शहीदों के प्रति सम्मान की कमी बताते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए।

फरीदाबाद: स्वतंत्रता दिवस पर फरीदाबाद में सरकारी समारोहों में देशभक्ति और शहीदों के सम्मान की बातें हुईं, लेकिन शहर के प्रमुख चौराहों पर लगी महापुरुषों की प्रतिमाएं माल्यार्पण का इंतजार करती रहीं। एनआईटी क्षेत्र के भगत सिंह चौक पर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाओं पर माला नहीं चढ़ाई गई। इस स्थिति पर शहरवासियों ने नाराजगी जताई।

भगत सिंह चौक पर नहीं हुआ माल्यार्पण

फरीदाबाद में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिलेभर में देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकारी समारोहों में तिरंगा फहराया गया और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया गया। हालांकि, एनआईटी क्षेत्र में गांधी कॉलोनी के सामने स्थित भगत सिंह चौक पर तस्वीर कुछ अलग नजर आई।

चौक पर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की प्रतिमाएं लगी हुई हैं। इन तीनों क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी इन प्रतिमाओं पर माल्यार्पण नहीं किया गया।

बताया गया कि चौक पर झंडा जरूर फहराया गया, लेकिन शहीदों की प्रतिमाओं पर सम्मान के तौर पर एक माला तक नहीं चढ़ाई गई। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और आम नागरिक इस रास्ते से गुजरते रहे।

नीलम चौक पर भी प्रतिमाएं रहीं उपेक्षित

फरीदाबाद के प्रमुख नीलम चौक पर लगी पंडित जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाओं को लेकर भी इसी तरह की स्थिति सामने आई। स्वतंत्रता दिवस के दिन इन प्रतिमाओं पर भी किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी की ओर से माल्यार्पण किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई।

इस स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित देश के प्रमुख नेताओं और महापुरुषों की प्रतिमाओं का स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर सम्मान क्यों नहीं किया गया। समारोहों में शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का उल्लेख किया जाता है, लेकिन प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि देने की परंपरा कई जगह नजरअंदाज होती दिखाई दी।

शहरवासियों ने बताया शहीदों का अपमान

शहर के कुछ लोगों ने इस मामले पर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पद्मश्री डॉ. ब्रह्मदत्त और आरटीआई कार्यकर्ता अजय बहल ने इसे शहीदों के प्रति सम्मान की कमी बताया।

उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के आयोजन के लिए सरकारी स्तर पर व्यापक तैयारियां की जाती हैं। मंच लगाए जाते हैं, परेड होती है, भाषण दिए जाते हैं और सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में शहर के प्रमुख चौराहों पर स्थापित शहीदों और महापुरुषों की प्रतिमाओं पर फूलों की माला तक नहीं पहुंचना चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल मंच से भाषण देने या सोशल मीडिया पर संदेश साझा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शहीदों और महापुरुषों के प्रति सम्मान सार्वजनिक जीवन में भी दिखाई देना चाहिए।

स्वतंत्रता दिवस पर सामने आई यह स्थिति प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े करती है। शहरवासियों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शहीदों और महापुरुषों की प्रतिमाओं पर सम्मानपूर्वक माल्यार्पण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Leave a comment