सरकारी नौकरी का झांसा देकर 18.5 लाख रुपये की कथित ठगी, पूर्व टीएमसी ग्राम प्रधान ने लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल के अंडाल में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पूर्व टीएमसी ग्राम प्रधान के साथ 18.5 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया, फर्जी आईडी कार्ड भी दिया

पश्चिम बंगाल के अंडाल में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 18.5 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पूर्व टीएमसी ग्राम प्रधान ने फर्जी नियुक्ति पत्र, ट्रेनिंग, आईडी कार्ड और नकली चेक देकर धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया है

बर्धमान; पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के अंडाल क्षेत्र से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सेरामपुर ग्राम पंचायत की पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख प्रियंका मंडल ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके भाई को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कुल 18.5 लाख रुपये की ठगी की गई। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने पूरे भर्ती प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने के लिए फर्जी प्रशिक्षण, इंटरव्यू, नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र तक उपलब्ध कराए।

यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, आरोपों की आधिकारिक जांच और पुलिस की कार्रवाई के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

नौकरी दिलाने का भरोसा देकर वसूले गए लाखों रुपये

प्रियंका मंडल का आरोप है कि वर्ष 2022 में कुछ लोगों ने उन्हें फूड विभाग तथा उनके भाई को एक्साइज विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। कथित तौर पर इस आश्वासन के बदले अलग-अलग चरणों में उनसे कुल 18 लाख 50 हजार रुपये लिए गए। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि उनकी नियुक्ति सरकारी प्रक्रिया के तहत पूरी तरह वैध तरीके से कराई जाएगी। इसी विश्वास के आधार पर परिवार ने बड़ी रकम का भुगतान किया।

फर्जी ट्रेनिंग और इंटरव्यू से बढ़ाया भरोसा

शिकायत में कहा गया है कि नौकरी की प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने के लिए प्रियंका मंडल को कोलकाता स्थित एक कार्यालय में ले जाया गया, जहां कथित तौर पर प्रशिक्षण, दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू जैसी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। इसके बाद उन्हें नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र भी सौंपे गए। इसी प्रकार उनके भाई को भी समान प्रक्रिया से गुजरने के लिए कहा गया। प्रारंभिक स्तर पर सभी दस्तावेज और प्रक्रिया सरकारी भर्ती जैसी प्रतीत हुई, जिससे उन्हें किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।

जांच में फर्जी निकले सभी दस्तावेज

कुछ समय बाद जब संबंधित विभाग से दस्तावेजों की पुष्टि कराई गई तो पूरा मामला संदिग्ध हो गया। शिकायत के अनुसार, विभागीय स्तर पर जांच करने पर पता चला कि नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज, इंटरव्यू रिकॉर्ड और पहचान पत्र सभी कथित रूप से फर्जी थे। इस खुलासे के बाद पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पहले से तैयार की गई धोखाधड़ी का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य नौकरी के नाम पर लोगों से बड़ी रकम वसूलना था।

सरकारी नौकरी का झांसा देकर 18.5 लाख रुपये की कथित ठगी, पूर्व टीएमसी ग्राम प्रधान ने लगाए गंभीर आरोप

पैसे लौटाने के बजाय दिया गया कथित फर्जी चेक

प्रियंका मंडल का आरोप है कि जब उन्होंने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे तो उन्हें 6.5 लाख रुपये का चेक दिया गया। हालांकि, बैंक में जमा करने पर चेक अमान्य निकला और भुगतान नहीं हो सका। उनका कहना है कि इस घटना के बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से आर्थिक धोखाधड़ी की गई है। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले को सार्वजनिक किया और जांच की मांग की।

प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता का भी आरोप

पूर्व ग्राम प्रधान ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने कथित आरोपियों से रकम वापस मांगने का प्रयास किया तो उन्हें धमकाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले में कुछ प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की ओर से भी इस संबंध में सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जांच की मांग तेज

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो सरकारी नौकरी के नाम पर चल रहे किसी बड़े फर्जी नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। कई सामाजिक संगठनों ने भी पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है ताकि यदि कोई संगठित गिरोह सक्रिय है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी भर्ती के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में अक्सर फर्जी दस्तावेज, नकली वेबसाइट, जाली नियुक्ति पत्र और फर्जी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का इस्तेमाल लोगों का विश्वास जीतने के लिए किया जाता है।

सरकारी नौकरी के नाम पर बढ़ रहे साइबर और वित्तीय अपराध

हाल के वर्षों में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के कई मामले देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आए हैं। अपराधी बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को निशाना बनाकर मोटी रकम वसूलने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में फर्जी कॉल लेटर, नकली ईमेल, जाली वेबसाइट और बनावटी इंटरव्यू प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, भर्ती अधिसूचना और नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य करनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति या निजी माध्यम से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे की मांग होने पर तुरंत सतर्क रहना आवश्यक है।

आधिकारिक जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल यह मामला आरोपों के आधार पर सामने आया है और संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा इसकी जांच की जानी बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तौर पर कितने लोग इस मामले में शामिल थे और आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी भर्ती प्रणाली के नाम पर लोगों का विश्वास तोड़ने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े के रूप में भी सामने आ सकता है। वहीं, यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं, तो उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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