गयाजी में 25 सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष मेला-2026 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के गया पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसी क्रम में जिला अग्निशमन विभाग ने मेला क्षेत्र में संभावित अग्नि जोखिम वाले स्थानों की जांच शुरू कर दी है। फायर विभाग की टीम ने विष्णुपद मंदिर परिसर, प्रमुख घाटों, धार्मिक स्थलों और टेंट सिटी समेत कई स्थानों का निरीक्षण कर आग से बचाव के इंतजामों को परखा।
निरीक्षण के दौरान खास तौर पर बिजली की वायरिंग, अस्थायी ढांचों, आपातकालीन निकासी मार्ग और दमकल वाहनों के पहुंचने वाले रास्तों की स्थिति देखी गई। मेला क्षेत्र में बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें, पंडाल, टेंट और अन्य संरचनाएं तैयार की जाती हैं। ऐसे में बिजली के तारों या अस्थायी कनेक्शनों में किसी तरह की तकनीकी समस्या आग का कारण बन सकती है। इसी वजह से फायर विभाग ने बिजली व्यवस्था और आग से बचाव की तैयारियों को प्राथमिकता के साथ जांचा है।
जिला अग्निशमन पदाधिकारी ज्योति प्रकाश के नेतृत्व में विशेष टीम ने मेला क्षेत्र के संवेदनशील स्थानों का जायजा लिया। टीम ने यह देखने की कोशिश की कि किसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड और बचाव दल को मौके तक पहुंचने में कोई बाधा तो नहीं होगी। भीड़भाड़ वाले इलाकों में रास्ते खुले रखने और आपातकालीन प्रतिक्रिया को प्रभावी बनाने पर भी ध्यान दिया गया।
विष्णुपद मंदिर पितृपक्ष मेले का प्रमुख केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्मकांड के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा विभिन्न घाटों, सीताकुंड, अक्षयवट, प्रेतशिला और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थानों पर भीड़ के दबाव के साथ-साथ बिजली, खाना बनाने वाले स्थानों और अस्थायी निर्माण से जुड़े जोखिमों को देखते हुए फायर विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
फायर विभाग की टीम ने गांधी मैदान और गया रेलवे स्टेशन क्षेत्र में बनाई जा रही टेंट सिटी का भी निरीक्षण किया। पितृपक्ष मेले में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए टेंट सिटी समेत कई अस्थायी आवासीय व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रशासन की तैयारियों के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था टेंट सिटी, सामुदायिक भवन, होटल, धर्मशाला और अन्य स्थानों पर की गई है।
टेंट सिटी जैसे अस्थायी आवासीय क्षेत्रों में फायर सेफ्टी की व्यवस्था विशेष महत्व रखती है। यहां बड़ी संख्या में लोग एक सीमित क्षेत्र में ठहरते हैं और बिजली, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं के लिए अस्थायी विद्युत कनेक्शन और उपकरणों का इस्तेमाल होता है। इसलिए आग लगने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त रास्ते और दमकल वाहनों की आसान पहुंच जरूरी है। फायर विभाग के निरीक्षण में इन्हीं पहलुओं को देखा गया।
मेला क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर भी अलग से बड़े स्तर पर तैयारी की गई है। बिजली विभाग ने पितृपक्ष मेले के दौरान निर्बाध आपूर्ति के लिए 10 कंट्रोल रूम तैयार किए हैं और 21 अधिकारियों की तैनाती की गई है। विभाग के मुताबिक करीब आठ किलोमीटर एलटी तार बदले गए हैं और 50 ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी की गई है। कुछ ट्रांसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ाई गई है, ताकि मेले के दौरान बढ़ने वाले लोड को संभाला जा सके।
बिजली विभाग की तैयारी और फायर विभाग की जांच को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि मेला क्षेत्र में बिजली से संबंधित किसी भी तकनीकी समस्या का सीधा असर अग्नि सुरक्षा पर पड़ सकता है। जर्जर तार, ओवरलोडिंग, असुरक्षित कनेक्शन या खुले तार जैसी समस्याओं को समय रहते दूर करना जरूरी है। मेला क्षेत्र में अस्थायी दुकानें लगाने वालों के लिए भी अस्थायी बिजली कनेक्शन की व्यवस्था की गई है और बिना कनेक्शन या ओवरलोड बिजली इस्तेमाल करने पर कार्रवाई की बात कही गई है।
अग्निशमन विभाग ने केवल धार्मिक स्थलों पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि भीड़भाड़ वाले अन्य इलाकों की भी जांच की। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बस स्टैंड जैसे स्थानों पर श्रद्धालुओं और यात्रियों की आवाजाही अधिक रहने की संभावना है। ऐसे क्षेत्रों में आपात स्थिति पैदा होने पर लोगों को सुरक्षित निकालने और दमकल वाहनों को तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। फायर विभाग ने इन पहलुओं को भी निरीक्षण के दौरान देखा।
पितृपक्ष मेला इस वर्ष 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होगा। जिला प्रशासन ने मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, बिजली, स्वास्थ्य, यातायात, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन के लिए अलग-अलग विशेष सेल बनाए हैं। प्रशासन की समीक्षा के अनुसार 75,348 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था टेंट सिटी, सामुदायिक भवनों, पुलिस सुविधाओं, होटल, विश्राम गृह और धर्मशालाओं के माध्यम से की गई है।
भीड़ नियंत्रण और निगरानी के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिला प्रशासन के मुताबिक मेला क्षेत्र में 543 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और एआई आधारित रियल टाइम अलर्ट की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा 67 स्थानों पर 335 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की योजना है। गया जिला प्रशासन ने मेला क्षेत्र की सुरक्षा एवं विधि व्यवस्था के लिए अस्थायी सीसीटीवी, ड्रोन कैमरा, वीडियो कैमरा और अन्य उपकरणों की व्यवस्था को लेकर आधिकारिक निविदा भी जारी की थी।
इस बार सुरक्षा व्यवस्था को केवल पुलिसिंग तक सीमित नहीं रखा गया है। पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन, बिजली, स्वास्थ्य और यातायात समेत अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। मगध प्रक्षेत्र के आईजी ने भी हाल में विष्णुपद मंदिर क्षेत्र और गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी का निरीक्षण कर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया था।
श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया गया है। विष्णुपद स्थित संवास सदन में शुरू किए गए ई-समाधान आईवीआरएस कंट्रोल रूम के लिए 9266628168 नंबर जारी किया गया है। यहां श्रद्धालुओं की शिकायतों और सहायता से जुड़ी कॉल को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की व्यवस्था है। इसके अलावा देवघाट और अक्षयवट में अस्थायी कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
मेले के दौरान किसी श्रद्धालु के परिवार से बिछड़ने की स्थिति को देखते हुए खोया-पाया केंद्र भी सक्रिय किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था टेंट सिटी में किए जाने की जानकारी प्रशासन ने दी है। भीड़ वाले घाटों और वेदियों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से लगातार जरूरी सूचनाएं देने की भी व्यवस्था की गई है।
फायर विभाग की ओर से की जा रही जांच का मुख्य उद्देश्य किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे को पहले ही पहचानना है। मेला क्षेत्र में हजारों-लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच छोटी सी आग भी तेजी से फैल सकती है, खासकर उन जगहों पर जहां अस्थायी पंडाल, टेंट या दुकानें एक-दूसरे के करीब हों। इसलिए बिजली की वायरिंग, गैस या खाना पकाने वाले स्थान, आग बुझाने वाले उपकरण और आपातकालीन रास्तों की जांच को सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
प्रशासन की कोशिश है कि पितृपक्ष के दौरान गया आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान के साथ सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण भी मिले। विष्णुपद मंदिर, घाटों, अक्षयवट, सीताकुंड, प्रेतशिला और टेंट सिटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने की तैयारी है। फायर विभाग की टीम भी मेला शुरू होने से पहले संवेदनशील स्थानों की जांच कर आवश्यक सुधार के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दे रही है।
गयाजी में पितृपक्ष मेला शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं की निगरानी और बढ़ने की संभावना है। बिजली आपूर्ति के लिए कंट्रोल रूम, फायर विभाग की जांच, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी, पुलिस बल की तैनाती और सहायता केंद्रों की व्यवस्था को एक साथ सक्रिय किया जा रहा है। इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य मेले के दौरान किसी भी आपात स्थिति में जल्द प्रतिक्रिया देना और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना है।












