गयाजी की धरती पर करीब 161 साल पहले गिरा मंगल ग्रह का एक दुर्लभ उल्कापिंड अब एक बेहद महंगी और अनोखी लग्जरी घड़ी का हिस्सा बन चुका है। 25 अगस्त 1865 को तत्कालीन शेरगोटी और वर्तमान शेरघाटी इलाके में गिरा Shergotty Martian Meteorite आज भी वैज्ञानिक और अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में खास महत्व रखता है। इसी ऐतिहासिक उल्कापिंड के एक प्रमाणित टुकड़े को स्विट्जरलैंड की लग्जरी घड़ी निर्माता कंपनी Louis Moinet ने अपनी खास घड़ी 'ONLY INDIA' में इस्तेमाल किया है। यह घड़ी दुनिया में सिर्फ एक पीस बनाई गई है और इसकी अनुमानित कीमत 2.1 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। कंपनी की जानकारी के अनुसार इसे एक Unique Timepiece के रूप में तैयार किया गया है।
इस घड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका डायल है, जिसमें मंगल ग्रह से आया वास्तविक Shergotty Martian Meteorite इस्तेमाल किया गया है। यानी घड़ी में लगा यह पत्थर सामान्य पृथ्वी की चट्टान नहीं, बल्कि उस उल्कापिंड का हिस्सा है जो अंतरिक्ष से धरती तक पहुंचा था। 1865 में शेरघाटी में गिरने के बाद इस उल्कापिंड का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया और इसे मंगल ग्रह से आया shergottite उल्कापिंड माना गया। मूल Shergotty meteorite का कुल वजन करीब पांच किलोग्राम दर्ज किया गया है। इतने पुराने और वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण उल्कापिंड का छोटा-सा प्रमाणित हिस्सा अब करोड़ों रुपये की घड़ी में इस्तेमाल होना गयाजी और शेरघाटी के लिए भी खास बात है।
घड़ी को केवल महंगा बनाने के लिए इसमें मंगल के उल्कापिंड का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि इसके पूरे डिजाइन में भारतीय संस्कृति और प्रतीकों को शामिल किया गया है। Louis Moinet ने इस घड़ी को भारत को समर्पित कलेक्टर टाइमपीस के तौर पर तैयार किया है। घड़ी के केस को 18 कैरेट रेड गोल्ड से बनाया गया है। इसके लग्स पर चार रूबी यानी माणिक लगाए गए हैं। केस पर हाथ से नक्काशी की गई है, जिससे इसकी फिनिश और डिजाइन को अलग पहचान मिलती है। इस तरह इसमें अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी दुर्लभ वस्तु के साथ भारतीय शिल्प और लक्जरी वॉचमेकिंग का संयोजन देखने को मिलता है।
इस घड़ी के डायल में एक और खास चीज इस्तेमाल की गई है, वह है असली मोर पंख। मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और घड़ी के डिजाइन में इसे भारतीय पहचान से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। उल्कापिंड, मोर पंख, सोना, माणिक और हाथ से की गई नक्काशी मिलकर घड़ी को सामान्य लग्जरी वॉच से अलग बनाते हैं। इसके डिजाइन में भारतीय संस्कृति के कई प्रतीकों को एक ही जगह पर शामिल करने की कोशिश की गई है।
घड़ी में अशोक चक्र से प्रेरित धर्म चक्र भी बनाया गया है। कंपनी के अनुसार इसमें 20 तीलियों वाला hand-engraved applique इस्तेमाल किया गया है। चक्र के केंद्र और तीलियों पर बारीक माइक्रो-पेंटिंग की गई है। हाथ से की गई नक्काशी और पेंटिंग के जरिए चक्र में गतिशीलता का प्रभाव पैदा किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय प्रतीकों और परंपराओं को घड़ी के बेहद छोटे और जटिल डायल पर कलात्मक तरीके से प्रस्तुत करना है।
घड़ी के अंदर भी सामान्य मैकेनिज्म नहीं है। इसमें Louis Moinet का LM-35 movement लगाया गया है। कंपनी के अनुसार इसी मूवमेंट ने International Chronometry Competition में प्रथम पुरस्कार हासिल किया था। घड़ी में टूरबिलॉन मैकेनिज्म भी दिया गया है, जिसमें घूमता हुआ cage दिखाई देता है। कंपनी के अनुसार इस मैकेनिज्म में balance spring, anchor और anchor wheel एक मिनट में एक पूरा rotation करते हैं। इसे प्रतियोगिता में भेजने से पहले लंबे समय तक परीक्षण किया गया और 150 से ज्यादा impacts के जरिए इसकी मजबूती को परखा गया था।
इस घड़ी में manual winding सिस्टम दिया गया है और इसका power reserve करीब 72 घंटे का है। इसकी frequency 21,600 vibrations per hour यानी 3 Hz बताई गई है। घड़ी का केस 47 मिलीमीटर का है और इसे 30 मीटर तक water resistant बताया गया है। इसमें कुल 19 jewels का इस्तेमाल किया गया है। इन तकनीकी विशेषताओं के साथ घड़ी का डिजाइन और उसमें इस्तेमाल की गई दुर्लभ सामग्री इसे कलेक्टरों के लिए अलग तरह का टाइमपीस बनाती है।
अब सवाल यह है कि आखिर 1865 में शेरघाटी में गिरा यह उल्कापिंड इतना महत्वपूर्ण क्यों है। वैज्ञानिक रूप से Shergotty को shergottite श्रेणी के मंगल ग्रह के उल्कापिंड के रूप में जाना जाता है। मंगल ग्रह की सतह से किसी बड़े टकराव के कारण चट्टान के टुकड़े अंतरिक्ष में बाहर निकल सकते हैं। इनमें से कुछ टुकड़े लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और अंततः धरती पर गिरते हैं। ऐसे प्रमाणित मंगल ग्रह के नमूने वैज्ञानिकों को दूसरे ग्रह की चट्टानों का अध्ययन करने का दुर्लभ अवसर देते हैं।
सामान्य तौर पर अंतरिक्ष में घूम रहे छोटे चट्टानी या धात्विक पिंडों को meteoroid कहा जाता है। जब कोई ऐसा पिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है और चमकता हुआ दिखाई देता है, तो उसे meteor कहा जाता है। अगर उसका कोई हिस्सा वायुमंडल को पार करके धरती की सतह तक पहुंच जाता है तो उसे meteorite यानी उल्कापिंड कहा जाता है। मंगल या चंद्रमा से आए प्रमाणित meteorites इसलिए खास होते हैं क्योंकि वे वैज्ञानिकों को दूसरे खगोलीय पिंडों की वास्तविक चट्टानों का नमूना उपलब्ध कराते हैं।
Shergotty meteorite की कहानी करीब 161 साल पुरानी है। 25 अगस्त 1865 को यह उल्कापिंड शेरघाटी क्षेत्र में गिरा था। उस समय शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि यह पत्थर आगे चलकर मंगल ग्रह के अध्ययन में महत्वपूर्ण माना जाएगा और इसके किसी हिस्से को एक दिन करोड़ों रुपये की लग्जरी घड़ी के डायल में इस्तेमाल किया जाएगा। आज शेरघाटी का नाम इसी meteorite की वजह से अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड में दर्ज है।
घड़ी की कीमत को लेकर भी एक जरूरी बात है। इसकी कीमत करीब 2.1 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक Louis Moinet ने सार्वजनिक रूप से इसकी कोई निश्चित आधिकारिक बिक्री कीमत जारी नहीं की है। कंपनी इसे Sold और Unique Timepiece के रूप में दर्ज करती है। इसलिए 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को अनुमानित कीमत के रूप में समझना उचित है, न कि कंपनी द्वारा घोषित निश्चित MRP के रूप में।
इस तरह घड़ी की कीमत केवल सोने या उसमें लगाए गए माणिक की वजह से नहीं है। इसकी असली दुर्लभता कई चीजों के मेल से बनती है। एक तरफ 18 कैरेट रेड गोल्ड और चार रूबी हैं, दूसरी तरफ मंगल ग्रह के उल्कापिंड का वास्तविक टुकड़ा है। इसके अलावा मोर पंख, हाथ से की गई नक्काशी, अशोक चक्र से प्रेरित धर्म चक्र और जटिल टूरबिलॉन मैकेनिज्म इसे एक कलेक्टर पीस बनाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डिजाइन का केवल एक ही पीस बनाया गया है।
मंगल ग्रह के उल्कापिंडों की दुर्लभता का अंदाजा हाल के वर्षों में हुई कुछ बड़ी नीलामियों से भी लगाया जा सकता है। 2025 में NWA 16788 नाम का करीब 24.67 किलोग्राम वजन वाला मंगल ग्रह का उल्कापिंड Sotheby's की नीलामी में करीब 53 लाख डॉलर में बिका था। उस समय इसे पृथ्वी पर मिले मंगल ग्रह के सबसे बड़े ज्ञात टुकड़ों में बताया गया था। हालांकि किसी meteorite की कीमत उसके आकार के अलावा उसकी प्रमाणिकता, उत्पत्ति, दुर्लभता और वैज्ञानिक महत्व जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर मंगल ग्रह के उल्कापिंड की कीमत करोड़ों रुपये होती है। किसी नमूने की वास्तविक कीमत उसके प्रमाणित होने, उसके इतिहास और वैज्ञानिक महत्व के साथ-साथ कलेक्टर बाजार में उसकी मांग पर निर्भर करती है। Shergotty जैसे ऐतिहासिक नमूने की खासियत उसकी वैज्ञानिक और ऐतिहासिक पहचान में है।
ONLY INDIA घड़ी में इस्तेमाल किया गया meteorite इसी वजह से केवल सजावटी सामग्री नहीं है। यह घड़ी को पृथ्वी और मंगल के बीच एक तरह का प्रतीकात्मक संबंध भी देता है। एक तरफ भारत की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले मोर पंख और अशोक चक्र जैसे डिजाइन हैं, तो दूसरी तरफ मंगल ग्रह से आया करोड़ों वर्ष पुराने अंतरिक्ष इतिहास का एक नमूना है। इस संयोजन को लग्जरी वॉच डिजाइन के जरिए प्रस्तुत किया गया है।
गयाजी के लिए भी यह खबर इसलिए खास है क्योंकि शेरघाटी इसी जिले का हिस्सा है और 1865 में गिरा Shergotty meteorite इसी क्षेत्र की पहचान को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक इतिहास से जोड़ता है। अब उसी meteorite के प्रमाणित टुकड़े का इस्तेमाल एक ऐसी घड़ी में किया गया है जिसे दुनिया में सिर्फ एक पीस के रूप में तैयार किया गया है। इस वजह से एक स्थानीय ऐतिहासिक घटना एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय लक्जरी और कलेक्टर बाजार के संदर्भ में चर्चा में आ गई है।
घड़ी के डिजाइन में इस्तेमाल प्रत्येक तत्व के पीछे अलग अर्थ और कहानी रखी गई है। 18 कैरेट रेड गोल्ड इसे प्रीमियम लुक देता है, चार माणिक इसके बाहरी डिजाइन का हिस्सा हैं, मोर पंख भारतीय पहचान को दर्शाता है और हाथ से बनाया गया धर्म चक्र भारतीय प्रतीकात्मकता को सामने लाता है। इसके बीच मंगल ग्रह का उल्कापिंड इसे बाकी सभी लक्जरी घड़ियों से अलग पहचान देता है। अंदर मौजूद टूरबिलॉन मूवमेंट इसकी तकनीकी जटिलता को बढ़ाता है।
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि गयाजी के शेरघाटी में 1865 में गिरा एक उल्कापिंड अब सिर्फ वैज्ञानिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है। उसके एक टुकड़े ने आधुनिक लग्जरी वॉच इंडस्ट्री में भी जगह बना ली है। 161 साल पुराने मंगल ग्रह के पत्थर को 18 कैरेट सोने, माणिक, मोर पंख और भारतीय प्रतीकों से सजाकर तैयार की गई ONLY INDIA घड़ी दुनिया में अपने तरह की अनोखी कलेक्टर वॉच बन गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका सिर्फ एक पीस बनाया गया है और इसकी अनुमानित कीमत 2.1 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।











